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Jharkhand News: लातेहार के जामडीह में जल जीवन मिशन ठप, नल-जल के दावों के बीच आदिवासी गांव प्यास से जूझ रहा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लातेहार Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 06 Jan 2026 09:14 PM IST
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सार

Latehar News: लातेहार के आदिवासी बहुल जामडीह गांव में जल जीवन मिशन ठप है। जल मीनारें निष्क्रिय हैं, ग्रामीण दूषित जल पीने को मजबूर हैं। शिकायतों के बावजूद सुधार नहीं हुआ, जिससे स्वास्थ्य संकट और सरकारी जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

Jal Jeevan Mission stalled in Jamdih Latehar tribal village struggling with thirst amidst Nal-Jal claims
लातेहार के जामडीह में पेयजल के लिए जद्दोजहद करते आदिवासी लोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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झारखंड में जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लातेहार जिले के अनुसूचित जनजाति बहुल जामडीह गांव में सरकारी दस्तावेजों में नल-जल योजना से पूर्ण आच्छादन का दावा किया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी है।

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जल मीनारें बनीं शोपीस
गांव में स्थापित जल मीनारें वर्षों से निष्क्रिय बताई जा रही हैं। मोटर बंद हैं, टंकियां खाली हैं और पाइपलाइन से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार, लंबे समय से किसी तकनीकी टीम ने मरम्मत या जांच नहीं की, जिससे पूरी संरचना अनुपयोगी बनी हुई है।
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दूषित जल पर निर्भरता
नल-जल व्यवस्था ठप होने के कारण ग्रामीण पास के चुआरी से पानी लेने को मजबूर हैं। इसी पानी का उपयोग पीने, खाना बनाने और बच्चों को पिलाने में किया जा रहा है। बरसात के मौसम में पानी में कीचड़ और गंदगी बढ़ जाती है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम और बढ़ जाते हैं।
 
महिलाओं और बच्चों की बढ़ती कठिनाई
गांव की महिलाएं रोज कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाती हैं और कई बार छोटे बच्चों को साथ ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पानी के सेवन से बच्चों में उल्टी-दस्त, पेट दर्द और बुखार जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।

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शिकायतें और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत से लेकर प्रखंड कार्यालय तक कई बार शिकायत की गई, लेकिन न तो कोई अधिकारी गांव पहुंचा और न ही जल मीनारों की तकनीकी जांच हुई। हर बार आश्वासन देकर मामले को टाल दिया गया, जिससे योजना की निगरानी और जवाबदेही पर प्रश्न उठते हैं।
 
खर्च और जवाबदेही पर सवाल
जल जीवन मिशन पर बड़े पैमाने पर खर्च के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि पानी की आपूर्ति क्यों शुरू नहीं हो सकी। राशि के उपयोग, जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका को लेकर ग्रामीणों में असंतोष है। इसे केवल लापरवाही नहीं, बल्कि जवाबदेही की कमी के रूप में देखा जा रहा है।
 
स्वच्छ पेयजल के अभाव में गांव में स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है। पेयजल और स्वास्थ्य विभाग की ओर से ठोस पहल नहीं होने से स्थिति और गंभीर प्रतीत होती है। जामडीह की स्थिति यह संकेत देती है कि योजना का लाभ कागजों तक सीमित रह गया है।

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