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AI समय: चैटबॉट हैं नई पीढ़ी के असली दोस्त, लेकिन किशोरों के सामाजिक विकास और कौशल को पहुंचेगा नुकसान
एन्नाबेल ब्लेके, द कन्वर्सेशन
Published by: Pavan
Updated Sat, 09 May 2026 08:39 AM IST
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सार
बेशक एआई चैटबॉट्स ने युवाओं को अभिव्यक्ति का नया मंच दिया है, लेकिन इसके कुछ गंभीर खतरे भी सामने आने लगे हैं। एक शोध के मुताबिक, 2026 में अमेरिका के दस में से तीन किशोर रोजाना एआई का उपयोग करेंगे। यह दो बड़ी आशंकाओं को उजागर करता है।
अमर उजाला
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
साल 2022 में चैटबॉट स्टार्टअप कैरक्टर.एआई के संस्थापकों ने एक ऐसा प्लेटफॉर्म शुरू किया था, जहां कोई भी एआई संचालित ऐसे किरदार बना सकता था, जो हमसे संवाद कर सकें। देखते ही देखते इसके दो करोड़ से ज्यादा उपयोगकर्ताओं ने एक करोड़ से अधिक और चैटबॉट किरदार बना डाले। इन्हें बनाने वाले ज्यादातर उपयोगकर्ता युवा ही थे। मगर फिर स्थिति बदलने लगी। नवंबर 2025 में जब इनके उपयोग से जुड़े किशोरों व नौजवानों में खुदकुशी की घटनाएं बढ़ने लगीं, तो कैरक्टर.एआई ने 18 साल से कम उम्र के किशोरों पर इसके इस्तेमाल को लेकर प्रतिबंध लगा दिया। इसका असर यह हुआ कि इस कदम से युवाओं द्वारा किए जा रहे रचनात्मक व भावनात्मक रूप से अभिव्यक्त एआई प्रयोग दब गए।
हमने युवाओं के एआई के साथ किए जा रहे नए प्रयोगों पर शोध किया, ताकि बेहतर भविष्य की दिशा में बढ़ा जा सके। शोध के मुताबिक, 2026 में अमेरिका के दस में से तीन किशोर रोजाना एआई का उपयोग करेंगे। यह दो बड़ी आशंकाओं को उजागर करता है। पहली, युवा असली मानवीय दोस्ती को एआई से बदल देंगे। दूसरी, वास्तविक लोगों के बजाय चापलूस चैटबॉट से बातचीत करने से किशोरों के सामाजिक विकास और कौशल में कमी आने लगेगी। ये चिंताएं अपनी जगह वाजिब भी हैं। प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे के अनुसार, 57 फीसदी किशोर एआई का इस्तेमाल सूचना पाने, 54 फीसदी होमवर्क, 47 फीसदी मनोरंजन, 12 फीसदी भावनात्मक समर्थन या सलाह और 8-11 फीसदी अकेलेपन से राहत पाने के लिए करते हैं।
हमारी टीम ने जुलाई 2024 से मार्च 2025 के बीच आठ महीने से अधिक समय कैरक्टर.एआई के आधिकारिक ऑनलाइन चैट प्लेटफॉर्म ‘डिस्कॉर्ड’ समुदाय में बिताया, जिसके पांच लाख से ज्यादा सदस्य हैं। हमने 13 से 17 वर्ष के युवाओं द्वारा किए गए 2,236 पोस्ट का विश्लेषण किया। इन किशोरों से चर्चा के विश्लेषण के आधार पर हमने कैरक्टर.एआई के साथ जुड़ने के तीन मुख्य उद्देश्य पहचाने। हमने पाया कि युवा लोग भावनात्मक सुकून, मन की भड़ास निकालने, तनाव से मुक्ति पाने और मनोदशा को नियंत्रित करने के लिए किरदारों का उपयोग करते थे। औपचारिक नैदानिक अभ्यास की नकल करने के बजाय हमने युवाओं को ‘कंफर्ट बॉट्स’ पर चर्चा करते हुए देखा। युवाओं ने सीमाओं का पता लगाया, रचनात्मक दुनिया बनाई और अपने पसंदीदा किरदारों के प्रति प्रेम बढ़ाया। एक किशोर ने किरदारों की आपसी बातचीत के जरिये तीन पुस्तकें लिख डालीं। दूसरे ने रंगमंच के प्रति अपने प्रेम से प्रेरित होकर यात्रा करने वाले थिएटर किरदारों का एक समूह बनाया। उन्होंने बताया कि इससे उनके कौशल दुनिया के सामने आए, उनकी रचनात्मकता बढ़ी और लेखन में भी सुधार हुआ।
कई युवाओं ने एआई का उपयोग करके वास्तविक जीवन के रिश्तों को समझा और वास्तविक जीवन की कठिन परिस्थितियों को नए सिरे से गढ़ा। कुछ लोगों ने अपने ही ‘क्लोन’ बनाए। हकीकत से प्रेरित होकर उन्होंने ऐसे किरदार बनाए, जो वास्तविक दुनिया के चुनौतीपूर्ण रिश्तों को दर्शाते हैं, जैसे कुटिल दोस्त, परेशान करने वाली बहन आदि। हमने उन सात विशिष्ट किरदारों के पैटर्न का भी विश्लेषण किया, जिन्हें युवा बना रहे थे और जिन पर चर्चा कर रहे थे। ये थे-भावनात्मक सहारा देने वाले किरदार, मजाक उड़ाने, चुनौती देने और बे-सिर पैर की बातें करने वाले किरदार, भावनात्मक रूप से जटिल पात्र, वास्तविक लोगों पर आधारित किरदार आदि। युवा जानबूझकर ऐसे किरदार बना रहे थे, जो व्यथित, सीमा से परे, चंचल, रचनात्मक और चिंतनशील हैं।
यह दर्शाता है कि हमें ‘साथी एआई’ को एक सजातीय वस्तु की तरह मानना बंद करना होगा। एआई चैटबॉट्स को एक जैसा मानना वैसा ही है, जैसे हर तरह के स्क्रीन टाइम को एक ही अनुभव समझ लेना। जबकि इसमें फर्क होता है कि बच्चा परिवार के साथ कोई एनिमेशन सीरीज देख रहा है या फिर रात में सोने के बजाय अकेले फोन पर रील्स स्क्रॉल कर रहा है। युवाओं के अनुभव, प्रयोग और विचार मायने रखते हैं। प्रतिबंध लगाने जैसे कदम से तो किशोरों के लिए बेहतर और सुरक्षित एआई उत्पाद बन ही नहीं पाएंगे।
इसका समाधान युवाओं को एआई से दूर रखना नहीं, बल्कि ऐसा एआई बनाना है, जो उनके भरोसे के लायक हो, उनकी रचनात्मकता को और बढ़ावा दे तथा उन्हें परिवार, मित्रता व समुदाय के साथ भौतिक दुनिया से भी जोड़े रखे। -साथ में एदुआर्दो वेल्लोसो और मार्कस कार्टर
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हमने युवाओं के एआई के साथ किए जा रहे नए प्रयोगों पर शोध किया, ताकि बेहतर भविष्य की दिशा में बढ़ा जा सके। शोध के मुताबिक, 2026 में अमेरिका के दस में से तीन किशोर रोजाना एआई का उपयोग करेंगे। यह दो बड़ी आशंकाओं को उजागर करता है। पहली, युवा असली मानवीय दोस्ती को एआई से बदल देंगे। दूसरी, वास्तविक लोगों के बजाय चापलूस चैटबॉट से बातचीत करने से किशोरों के सामाजिक विकास और कौशल में कमी आने लगेगी। ये चिंताएं अपनी जगह वाजिब भी हैं। प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे के अनुसार, 57 फीसदी किशोर एआई का इस्तेमाल सूचना पाने, 54 फीसदी होमवर्क, 47 फीसदी मनोरंजन, 12 फीसदी भावनात्मक समर्थन या सलाह और 8-11 फीसदी अकेलेपन से राहत पाने के लिए करते हैं।
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हमारी टीम ने जुलाई 2024 से मार्च 2025 के बीच आठ महीने से अधिक समय कैरक्टर.एआई के आधिकारिक ऑनलाइन चैट प्लेटफॉर्म ‘डिस्कॉर्ड’ समुदाय में बिताया, जिसके पांच लाख से ज्यादा सदस्य हैं। हमने 13 से 17 वर्ष के युवाओं द्वारा किए गए 2,236 पोस्ट का विश्लेषण किया। इन किशोरों से चर्चा के विश्लेषण के आधार पर हमने कैरक्टर.एआई के साथ जुड़ने के तीन मुख्य उद्देश्य पहचाने। हमने पाया कि युवा लोग भावनात्मक सुकून, मन की भड़ास निकालने, तनाव से मुक्ति पाने और मनोदशा को नियंत्रित करने के लिए किरदारों का उपयोग करते थे। औपचारिक नैदानिक अभ्यास की नकल करने के बजाय हमने युवाओं को ‘कंफर्ट बॉट्स’ पर चर्चा करते हुए देखा। युवाओं ने सीमाओं का पता लगाया, रचनात्मक दुनिया बनाई और अपने पसंदीदा किरदारों के प्रति प्रेम बढ़ाया। एक किशोर ने किरदारों की आपसी बातचीत के जरिये तीन पुस्तकें लिख डालीं। दूसरे ने रंगमंच के प्रति अपने प्रेम से प्रेरित होकर यात्रा करने वाले थिएटर किरदारों का एक समूह बनाया। उन्होंने बताया कि इससे उनके कौशल दुनिया के सामने आए, उनकी रचनात्मकता बढ़ी और लेखन में भी सुधार हुआ।
कई युवाओं ने एआई का उपयोग करके वास्तविक जीवन के रिश्तों को समझा और वास्तविक जीवन की कठिन परिस्थितियों को नए सिरे से गढ़ा। कुछ लोगों ने अपने ही ‘क्लोन’ बनाए। हकीकत से प्रेरित होकर उन्होंने ऐसे किरदार बनाए, जो वास्तविक दुनिया के चुनौतीपूर्ण रिश्तों को दर्शाते हैं, जैसे कुटिल दोस्त, परेशान करने वाली बहन आदि। हमने उन सात विशिष्ट किरदारों के पैटर्न का भी विश्लेषण किया, जिन्हें युवा बना रहे थे और जिन पर चर्चा कर रहे थे। ये थे-भावनात्मक सहारा देने वाले किरदार, मजाक उड़ाने, चुनौती देने और बे-सिर पैर की बातें करने वाले किरदार, भावनात्मक रूप से जटिल पात्र, वास्तविक लोगों पर आधारित किरदार आदि। युवा जानबूझकर ऐसे किरदार बना रहे थे, जो व्यथित, सीमा से परे, चंचल, रचनात्मक और चिंतनशील हैं।
यह दर्शाता है कि हमें ‘साथी एआई’ को एक सजातीय वस्तु की तरह मानना बंद करना होगा। एआई चैटबॉट्स को एक जैसा मानना वैसा ही है, जैसे हर तरह के स्क्रीन टाइम को एक ही अनुभव समझ लेना। जबकि इसमें फर्क होता है कि बच्चा परिवार के साथ कोई एनिमेशन सीरीज देख रहा है या फिर रात में सोने के बजाय अकेले फोन पर रील्स स्क्रॉल कर रहा है। युवाओं के अनुभव, प्रयोग और विचार मायने रखते हैं। प्रतिबंध लगाने जैसे कदम से तो किशोरों के लिए बेहतर और सुरक्षित एआई उत्पाद बन ही नहीं पाएंगे।
इसका समाधान युवाओं को एआई से दूर रखना नहीं, बल्कि ऐसा एआई बनाना है, जो उनके भरोसे के लायक हो, उनकी रचनात्मकता को और बढ़ावा दे तथा उन्हें परिवार, मित्रता व समुदाय के साथ भौतिक दुनिया से भी जोड़े रखे। -साथ में एदुआर्दो वेल्लोसो और मार्कस कार्टर
सुपरह्यूमन- यह अत्याधुनिक एआई-आधारित ई-मेल और उत्पादकता टूल है, जिसे खासतौर पर उन लोगों के लिए बनाया गया है, जिन्हें हर दिन बड़ी संख्या में ई-मेल भेजना या देखना होता है। यह टूल एआई की मदद से ई-मेल लिखने, जवाब देने, सारांश तैयार करने और इनबॉक्स व्यवस्थित करने का काम बेहद तेज बना देता है। इसमें एआई ड्राफ्ट्स फीचर है, जो केवल कुछ शब्दों या बुलेट पॉइंट्स से पूरा ई-मेल तैयार कर देता है। इंस्टैंट फीचर आने वाले ई-मेल के लिए स्वतः ड्राफ्ट जवाब बनाता है, जबकि ऑटो समराइज फीचर लंबे ई-मेल थ्रेड का छोटा सारांश दिखाता है।