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जीवन धारा: स्वार्थ और सुख एक साथ नहीं रह सकते
ओरिसन स्वेट मार्डेन
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 12 May 2026 08:10 AM IST
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सार
बहुत-से लोग धन तो कमा लेते हैं, परंतु उस प्रक्रिया में आनंद लेने की अपनी क्षमता खो देते हैं। जो व्यक्ति केवल अपने लिए सुख खोजता है, वह कभी भी सच्चा संतोष नहीं पा सकता।
जीवन धारा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
संसार के अधिकांश लोगों से उनके जीवन की तीन सबसे बड़ी इच्छाएं पूछी जाएं, तो वे स्वास्थ्य, धन और सुख का ही नाम लेंगे। यदि किसी से उसकी सर्वोच्च अभिलाषा पूछी जाए, तो वह निस्संदेह कहेगा, ‘मैं सुख चाहता हूं।’ वास्तव में हर मनुष्य निरंतर सुख की खोज में लगा हुआ है। चाहे वह स्वयं इस बात को स्पष्ट रूप से न समझे, फिर भी यह उसके जीवन का एक शक्तिशाली प्रेरक तत्व है। हम सब अपने जीवन को थोड़ा बेहतर, थोड़ा अधिक सहज और अधिक संतोषजनक बनाने का प्रयास करते रहते हैं। हम कठिनाइयों, परिश्रम और तनावपूर्ण परिस्थितियों से धीरे-धीरे मुक्ति पाने की चाह रखते हैं। किन्तु आश्चर्य की बात है कि जब से मानव सभ्यता का आरंभ हुआ है, तब से लेकर आज तक सुख की खोज जारी है, फिर भी बहुत कम लोग वास्तव में इसे प्राप्त कर पाए हैं या इसकी सही परिभाषा समझ पाए हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि लोग सुख को गलत स्थानों पर खोजते हैं। सुख किसी शिकार की तरह नहीं है, जिसे दौड़ कर पकड़ा जा सके; यह तो हमारे कर्मों का परिणाम होता है। सच्चा सुख अत्यंत सरल होता है, इतना सरल कि अधिकांश लोग उसे पहचान ही नहीं पाते। यह जीवन की छोटी-छोटी, शांत, साधारण और विनम्र बातों में छिपा होता है। सुख कभी भी नीच विचारों, स्वार्थ, आलस्य या कलह में नहीं रहता। वह सत्य, सौंदर्य, प्रेम, सामंजस्य और सरलता का साथी है। बहुत से लोग धन तो कमा लेते हैं, परंतु उस प्रक्रिया में आनंद लेने की अपनी क्षमता खो देते हैं। अक्सर हम सुनते हैं, ‘उसके पास पैसा तो है, लेकिन वह उसका आनंद नहीं ले सकता।’ जो व्यक्ति केवल अपने लिए सुख खोजता है, वह कभी भी सच्चा संतोष नहीं पा सकता। स्वार्थ और सुख एक साथ नहीं रह सकते। सुख का वास्तविक स्रोत दूसरों के कल्याण में निहित है। जो व्यक्ति दूसरों की खुशी में अपनी खुशी खोजता है, वही सच्चे आनंद का अनुभव करता है। जो लोग केवल अपनी इच्छाओं और सुविधाओं के बारे में सोचते रहते हैं, वे अंततः निराश ही होते हैं। सुख मानो जुड़वां के समान है-दूसरों का भला चाहने वाला ही उसे पा सकता है।
यह एक भ्रम है कि कोई व्यक्ति अपने जीवन के श्रेष्ठ वर्ष केवल धन कमाने में लगा दे, संबंधों, आत्मविकास और जीवन के वास्तविक मूल्यों की उपेक्षा करे, और फिर अंत में सुख की अपेक्षा रखे। यदि उसने अपने भीतर सुंदरता, सत्य और अच्छाई को महसूस करने की क्षमता को जीवित नहीं रखा, तो बाद में वह उसे पुनः प्राप्त नहीं कर सकता। जो व्यक्ति ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध या बदले की भावना रखता है, वह कभी भी वास्तव में सुखी नहीं हो सकता। सच्चा सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि हमारे विचारों, कर्मों और दूसरों के प्रति हमारे व्यवहार में छिपा होता है। जब हम सही कार्य करते हैं, सच्चाई का पालन करते हैं और दूसरों के जीवन में आनंद लाते हैं, तभी हम स्वयं भी गहरे और स्थायी सुख का अनुभव करते हैं। -द जॉय ऑफ लिविंग के अनूदित अंश
सूत्र- अपने विचारों को मजबूत करें
सच्चा सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि हमारे विचारों, कर्मों और दूसरों के प्रति हमारे व्यवहार में छिपा होता है, जब हम स्वार्थ त्यागकर सत्य, प्रेम और सद्भावना के साथ दूसरों के जीवन में खुशी लाते हैं, तभी हमारे भीतर स्थायी आनंद जन्म लेता है, और यही वह सच्ची संतुष्टि है जो जीवन को सार्थक, शांत और वास्तव में पूर्ण बनाती है।
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यह एक भ्रम है कि कोई व्यक्ति अपने जीवन के श्रेष्ठ वर्ष केवल धन कमाने में लगा दे, संबंधों, आत्मविकास और जीवन के वास्तविक मूल्यों की उपेक्षा करे, और फिर अंत में सुख की अपेक्षा रखे। यदि उसने अपने भीतर सुंदरता, सत्य और अच्छाई को महसूस करने की क्षमता को जीवित नहीं रखा, तो बाद में वह उसे पुनः प्राप्त नहीं कर सकता। जो व्यक्ति ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध या बदले की भावना रखता है, वह कभी भी वास्तव में सुखी नहीं हो सकता। सच्चा सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि हमारे विचारों, कर्मों और दूसरों के प्रति हमारे व्यवहार में छिपा होता है। जब हम सही कार्य करते हैं, सच्चाई का पालन करते हैं और दूसरों के जीवन में आनंद लाते हैं, तभी हम स्वयं भी गहरे और स्थायी सुख का अनुभव करते हैं। -द जॉय ऑफ लिविंग के अनूदित अंश
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सूत्र- अपने विचारों को मजबूत करें
सच्चा सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि हमारे विचारों, कर्मों और दूसरों के प्रति हमारे व्यवहार में छिपा होता है, जब हम स्वार्थ त्यागकर सत्य, प्रेम और सद्भावना के साथ दूसरों के जीवन में खुशी लाते हैं, तभी हमारे भीतर स्थायी आनंद जन्म लेता है, और यही वह सच्ची संतुष्टि है जो जीवन को सार्थक, शांत और वास्तव में पूर्ण बनाती है।