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विश्व साहित्य का आकाश: गैब्रिएला मिस्त्राल- शिक्षा एवं साहित्य में सर्वोच्च स्थान
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सार
गैब्रिएल मिस्त्राल की कविता के कई संग्रह ‘सलैक्टेड पोयम्स ऑफ गैब्रिएला मिस्त्राल’ के नाम से इंग्लिश में उपलब्ध हैं, इसके अलावा ‘वीमेन’, ‘मैडवीमेन’ एवं ‘ए गैब्रिएला मिस्त्राल रीडर’ शीर्षक से भी उनकी कविताएं प्रकाशित हैं।
साहित्य की दुनिया
- फोटो : adobestock
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विस्तार
विश्वास नहीं होता जिस बच्ची को शिक्षा के लिए अयोग्य मान कर स्कूल से निकाल दिया गया, वह आगे चल कर शिक्षा विभाग की डॉयरेक्टर बनी। न केवल शिक्षा विभाग में उच्च पद पर पहुंची वरन साहित्य के भी सर्वोच्च मंच पर चढ़ी।
7 अप्रैल 1889 को चिली में जन्मी इस स्त्री का नाम है, गैब्रिएला मिस्त्राल (जन्म का नाम लुसिया गोडोय एल्कयागा)। स्कूल टीचर, कवि एवं कला प्रेमी पिता गोडोय दो साल की छोटी बेटी और खूबसूरत पत्नी को छोड़ कर पता नहीं कहां चले गए।
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मां एक्लयागा के अनुसार बिटिया अपने पिता के बनाए बागीचे में अकेली बैठी, कभी चिड़ियों से तो कभी फूलों से बात करती रहती। कोई आश्चर्य नहीं ऐसी लड़की आगे चल कर कवयित्री बन गई। इस स्त्री ने अपने जन्म के नाम को बदल लिया। कहा जाता है, अपने प्रिय दो कवियों- ‘गैब्रिएल डेनुंजिओ एवं फेडेरिक मिस्त्राल के नाम से मिला कर अपना नाम बनाया।
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कुछ और लोगों का कहना है, उन्होंने अपना नाम यहूदी-ईसाई देवदूत गैब्रिएल एवं अफ्रीकी रोडानो घाटी की ओर बहने वाली भूमध्यसागरीय हवा (मिस्त्राल) को मिला कर अपना नाम गढ़ा। निरंतर यात्रा में रहने वाली केलिए यह नाम उचित लगता है।
विडम्बना है, नाम नॉर्मल है लेकिन उन दिनों चिली के ‘नॉर्मल स्कूल’ में शिक्षा प्राप्त करने केलिए राजनैतिक संबंध और सामाजिक स्थिति मजबूत होना एक शर्त हुआ करती। लुसिया इन शर्तों पर खरी नहीं उतरती थी अत: दस-ग्यारह साल की लड़की को स्कूल से निकाल दिया गया। आगे चल कर देश में शिक्षकों की कमी हुई। तब तक गैब्रिएला लेखन में नाम कमा चुकी थीं और उन्हें कहीं भी जाकर पढ़ाने में आपत्ति न थी, सो उन्हें शिक्षिका की नौकरी मिल गई।
उनका अंतिम स्कूल एक रेगिस्तान में था। 1918 में चिली के शिक्षा मंत्री और भविष्य के राष्ट्रपति पेड्रो एगुएरे सेंड्रा ने उन्हें शिक्षा नीति निर्धारण विभाग में शामिल किया। बाद में वे लड़कियों के सर्वाधिक प्रसिद्ध स्कूल की डॉयरेक्टर बनीं।
साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित
मगर वे दुनिया में शिक्षिका के रूप में नहीं वरन एक कवियित्री एवं कई रचनाकारों की प्रेरणा के रूप में जानी जाती हैं। 1945 में जब उन्हें साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला, साहित्य का नोबेल पाने वाली वे लैटिन अमेरिका की पहली रचनाकर थीं। फिर तो पाब्लो नेरुदा, गैब्रियल गार्षा मार्केस, ऑक्टोविओ पॉज़, मारियो वर्गास लोसा कई लैटिन अमेरिका के रचनाकारों को यह प्राप्त हुआ। मगर पहला तो पहला होता है।
पहले उन्होंने फ्रेंच भाषा में कविता लिखी, तो उनकी मां रोने लगीं क्योंकि इस भाषा का एक शब्द वे नहीं जानती थीं। तब उन्होंने स्पैनिश भाषा में कविताएं लिखीं और नोबेल पाया। उन्होंने नोबेल भाषण नहीं दिया मगर प्रीति भोज के अवसर पर पुरस्कार ग्रहण हेतु आभार व्यक्त किया।
इसी अवसर पर उनकी प्रशंसा में कहा गया, इस बार ऐसी कवयित्री को नोबेल पुरस्कार दे कर हम प्रसन्न हैं, जिसने भव्य कला का गहराई और श्रेष्ठ उदेश्यों का मिश्रण किया है।
गैब्रिएल मिस्त्राल की कविता के कई संग्रह ‘सलैक्टेड पोयम्स ऑफ गैब्रिएला मिस्त्राल’ के नाम से इंग्लिश में उपलब्ध हैं, इसके अलावा ‘वीमेन’, ‘मैडवीमेन’ एवं ‘ए गैब्रिएला मिस्त्राल रीडर’ शीर्षक से भी उनकी कविताएं प्रकाशित हैं। ‘दिस अमेरिका ऑफ आवर्स’ के रूप में उनके पत्र मिलते हैं।
प्रारंभ में आलोचकों द्वारा नकारी गई मिस्त्राल बाद में विश्व आदर की हकदार बनीं। बचपन से अकेली रहने वाली ने अपनी एक कविता में लिखा, ‘मैं कहां अकेली।’ इस कवियित्री का 10 जनवरी 1957 में देहावसान हुआ।
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