सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   history of world literature To the Lighthouse Novel by Virginia Woolf

विश्व साहित्य का आकाश: वर्जीनिया वुल्फ की नॉवेल- 'टू द लाइटहाउस'

Dr. Vijay Sharma डॉ. विजय शर्मा
Updated Tue, 17 Mar 2026 06:00 PM IST
विज्ञापन
सार

 तीनों भाग में वुल्फ स्ट्रीम ऑफ कॉन्सेसनेस की तकनीक का प्रयोग करती हैं, ताकि पात्रों के आंतरिक विचार एवं उनकी भावनाएं पाठक तक बखूबी पहुंच सकें, इसमें वे खूब सफल होती हैं।
 

history of world literature To the Lighthouse Novel by Virginia Woolf
नॉवेल की दुनिया- टू द वर्जीनिया वुल्फ - फोटो : freepik.com
विज्ञापन

विस्तार

इंग्लिश लेखिका वर्जीनिया (जन्म का नाम वर्जीनिया स्टीफन) वुल्फ किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। 25 जनवरी 1882 को लंदन में जन्मी इस उपन्यासकार ने अपनी नॉन लीनियर लेखन शैली से उपन्यास की दिशा/दशा बदल दी। वैसे तो वे ‘मिसेज डैलोवे’ एवं ‘टू द लाइटहाउस’ केलिए ही अधिक प्रसिद्ध हैं। मगर उन्होंने पत्र, डायरी, निबंध और बहुत कुछ लिखा।

Trending Videos


वे कलात्मक सिद्धांत, साहित्यिक इतिहास, स्त्री लेखन तथा अपने राजनैतिक निबंधों केलिए भी ख्यात हैं। बार-बार अवसाद में जाती और लेखन द्वारा उससे उबरने की कोशिश करती वर्जीनिया वुल्फ ने प्रयोगात्मक जीवनी लेखन के अलावा चित्रात्मक लघु कथाएं भी रचीं। आज उनके ‘टू द लाइटहाउस’ पर बात करती हूं।
विज्ञापन
विज्ञापन


कालजयी रचना  ‘टू द लाइटहाउस’

5 मई 1927 को प्रकाशित ‘टू द लाइटहाउस’ एक शोक-गीत है। इसे उन्होंने अपनी मां जूलिया जैक्सन स्टीफन की स्मृति में रचा है। उनकी मां अत्यंत खूबसूरत महिला अपने त्याग एवं सामाजिक कार्यों केलिए प्रसिद्ध थीं। उन्हीं की मृत्यु की 32वीं वर्षगांठ पर उन्होंने इसकी रचना की। इसमें वे अपने बचपन की गर्मियों में बिताई यादों को फिर-फिर से जीतीं हैं।

करीब 200 पन्नों का यह उपन्यास तीन भागों- ‘द विंडो’, ‘समय बीतता है’ तथा ‘द लाइटहाउस’ में विभक्त है। तीनों भाग में वुल्फ स्ट्रीम ऑफ कॉन्सेसनेस की तकनीक का प्रयोग करती हैं, ताकि पात्रों के आंतरिक विचार एवं उनकी भावनाएं पाठक तक बखूबी पहुंच सकें, इसमें वे खूब सफल होती हैं।

पूरी कहानी स्मृति, हानि और समय को दिखाती है। रैमसे परिवार प्रत्येक गर्मी की छुट्टियों में अपने स्कॉटलैंड स्थित घर जाते हैं। वे सोचते हैं, वे लोग सदा ही ऐसा करेंगे। मगर प्रथम विश्वयुद्ध का खतरा सिर पर मंडरा रहा है। युद्ध के इस संभावित खतरे से पारीवारिक एवं सामाजिक जीवन प्रभावित है।

पहला भाग ‘द विंडो’

पहला भाग ‘द विंडो’ का स्थान उन लोगों का ग्रीष्मकालीन घर है। जहां मिसेज रैमसे और उनके 6 साल के सबसे छोटे बेटे जेम्स रैमसे के फ्रैंच खिड़की के पास बैठे होने से उपन्यास का प्रारंभ होता है। जेम्स नजदीकी लाउटहाउस में जाना चाहता है, वह जाने की जिद करता है। मगर मिस्टर रैमसे इसे असंभव करार देते हैं। जिससे तनाव पैदा हो जाता है। उनके यहां मेहमान आते हैं।

मिसेज रैमसे घर और मेहमानों की देखभाल करती हैं। लिली ब्रिस्को पेंटिंग करती है, मगर संतुष्ट नहीं है। यहीं पाठक मिस्टर रैमसे, मिसेज रैमसे की खूबियों-खामियों से परिचित होता चलता है। पति के लिए जीवन की उपलब्धियां महत्वपूर्ण हैं, जबकि मिसेज रैमसे तर्क से अधिक लोगों की भावनाओं को जानती-समझती हैं। लाइटहाउस जाने की बात टलती जाती है।

दूसरा भाग

आधुनिक साहित्य के मील के पत्थर, ‘टू द लाइटहाउस’ का दूसरा भाग ‘समय बीतता है’, दस साल बाद प्रारंभ होता है। रैमसे परिवार गर्मियों में इस घर में लौटने वाला है अत: घर की साफ-सफाई, मरम्मत चल रही है। चारो ओर घास-फस, फफूंद, गर्द छाया हुआ है। इन दस वर्षों में काफी उथल-पुथल हुई है। मिसेज रैमसे और उनके दो बच्चों की मृत्यु हो चुकी है।

उपन्यासकार इसकी सूचना मात्र देती है। पहले भाग के कई पात्र वापस इस घर में लौटते हैं। वुल्फ थोड़े में बहुत कह देती हैं। परिवार के सदस्यों के रिश्तों की बारीकियों को प्रकट करने में वे माहिर हैं। पढ़ते हुए पाठक अपने आस-पास के तमाम लोगों को देखता चलता है। वे दैनंदिन जीवन को खूबसूरती से भाषा में बांधती हैं, जिसकी प्रशंसा उनके आलोचक भी करते हैं।

तीसरा भाग

कई साल बाद उपन्यास का तीसरा भाग, ‘द लाइटहाउस’ शुरू होता है। एक बार फिर से मिस्टर रैमसे, उनके बच्चे जेम्स और कैम, लिली ब्रिस्को एवं कई अन्य पात्र गर्मियों में इस घर में वापस आते हैं। बच्चे अब बड़े हो चुके हैं। इस बार लाइटहाउस की यात्रा संभव होती है। वे लोग लाइटहाउस जाते हैं। परिवार के सदस्य एक-दूसरे के करीब आ चुके हैं। लिली की पेंटिंग अब पूरी होती है। वह भावपूर्ण तरीके से कला की वकालत करती है।

वुल्फ परिवार की छुट्टियों का चित्रात्मक वर्णन तरीके से करती हैं। उपन्यास विवाह, अभिभावकत्व, बचपन, कटुता, पीड़ा का सघन चित्रण करता है। काव्यात्मक गद्य में लिखा गया उपन्यास, ‘टू द लाइटहाउस’ समाप्त करने के बाद भी काफी समय तक पाठक के साथ चलता रहता है। उस समय के प्रचलित विक्टोरियन एवं एडवर्डियन साहित्यिक मूल्यों को वुल्फ पूरी तरह से खारिज करती हैं।

लियोनार्ड वुल्फ तथा वर्जीनिया ने 1912 अगस्त में शादी की। इसीलिए वे वर्जीनिया वुल्फ कहलाईं। डायरी लेखन केलिए जाने जानी वाली वर्जीनिया वुल्फ ने इस उपन्यास के विषय में अपनी डायरी में लिखा: ‘मैं उन्हें (पिता) और मां के बारे में प्रतिदिन सोचती थी, लेकिन ‘द लाइटहाउस’ लिखने के बाद मेरा मन शांत हो गया।’

परिवार में माता-पिता तथा ढेर सारे और लोगों की मृत्यु हो चुकी थी, हर मौत उन्हें तोड़ जाती। देश और समाज की हालत भी अच्छी नहीं थीं। वर्जीनिया वुल्फ ने खूब लिखा, लेकिन अब लिखना उनके लिए कठिन होता जा रहा था। इस बेचैन आत्मा ने कई बार जीवन समाप्त करना चाहा और अंतत: 28 मार्च 1941 अपने घर मोंक्स हाउस के पास की नदी तक जा कर, जेबों में पत्थर भर लिए तथा नदी में उतर गईं। ‘बिटवीन द एक्ट्स’ उसी साल उनकी मृत्योपरांत प्रकाशित हुआ।


---------------
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed