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खाद्य आपूर्ति बाजार की नब्ज: पारंपरिक व्यापार की रीढ़ है स्थानीय फुटकर विक्रेताओं का नेटवर्क

Manish Sharma मनीष शर्मा
Updated Sun, 03 May 2026 11:18 AM IST
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सार

जनरल ट्रेड एक सरल लेकिन मजबूत स्ट्रक्चर पर चलता है। सबसे पहले कैरिंग एंड फॉरवर्डिंग एजेंट्स होते हैं, जो स्टॉक और लॉजिस्टिक्स संभालते हैं। उसके बाद डिस्ट्रीब्यूटर्स आते हैं, जो मार्केट में काम को आगे बढ़ाते हैं। 

how General Trade Still Drives Market Reach and Growth Key to Consistent Growth
फूड इंडस्ट्री - फोटो : Freepik.com
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विस्तार

फूड इंडस्ट्री में कई साल काम करने के बाद मैंने यह समझा है कि भले ही तेजी से मॉडर्न सिस्टम आ गए हों, लेकिन आज भी जनरल ट्रेड  ही डिस्ट्रीब्यूशन यानी वितरण प्रणाली की रीढ़ है। मॉडर्न ट्रेड और ई-कॉमर्स ब्रांड को दिखाने में मदद करते हैं, लेकिन असली पहुंच जनरल ट्रेड से ही बनती है, खासकर दूर-दराज के इलाकों में। यहां पर्सनल कस्टमर सर्विस और उधार पर बिक्री जैसी पारंपरिक तरीके आज भी बहुत मायने रखती हैं।

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मेरे अनुभव में जनरल ट्रेड एक सरल लेकिन मजबूत स्ट्रक्चर पर चलता है। सबसे पहले कैरिंग एंड फॉरवर्डिंग एजेंट्स होते हैं, जो स्टॉक और लॉजिस्टिक्स संभालते हैं। उसके बाद डिस्ट्रीब्यूटर्स आते हैं, जो मार्केट में काम को आगे बढ़ाते हैं।
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मैंने हमेशा देखा है कि डिस्ट्रीब्यूटर सिर्फ बीच का आदमी नहीं होता, बल्कि अपने एरिया में ब्रांड का चेहरा भी होता है। वह रिटेलर्स से रिश्ते बनाकर और उत्पाद को आगे बढ़ाकर सीधे बिजनेस पर असर डालता है। एक मजबूत डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क मुश्किल समय में भी ग्रोथ बनाए रख सकता है।

सही डिस्ट्रीब्यूटर, अच्छे मार्केट की नींव

मैंने यह भी सीखा है कि सही डिस्ट्रीब्यूटर चुनना बहुत जरूरी है। इसके लिए उसकी फाइनेंशियल स्थिति, इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजनेस में उसकी भागीदारी और आगे बढ़ने की सोच को समझना जरूरी होता है। इसके साथ ही इन रिश्तों को अच्छे से मैनेज करना भी जरूरी है। नियमित बातचीत, सही टारगेट, मोटिवेशन और सही इंसेंटिव से ही अच्छा तालमेल बनता है।

इसके बाद आती है सेल्स टीम, जो जमीन पर काम करती है और असली परिणाम देती है। ऑफिस में बैठकर आप कितनी भी अच्छी स्ट्रैटेजी बना लें, अगर आपकी सेल्स टीम सही तरीके से बनी और मैनेज नहीं है, तो रिजल्ट नहीं मिलेगा। सही टेरिटरी प्लानिंग से समय बचता है और काम बेहतर होता है। जब एरिया संभालने लायक होता है, तो सेल्स टीम अच्छे रिश्ते बना पाती है, काम में लगातार सुधार आता है और बिक्री बढ़ती है। अच्छा काम करने पर रिवार्ड और पहचान देने से टीम का मनोबल और काम करने की क्षमता दोनों बढ़ती हैं।

उत्पाद की उपलब्धता बेहद जरूरी

मैं हमेशा मानता हूं कि मार्केट में काम करने का तरीका (रूट टू मार्केट) लचीला होना चाहिए। हर मार्केट अलग होता है, इसलिए एक ही तरीका हर जगह लागू नहीं किया जा सकता। सफलता इस बात में है कि आप बदलाव के अनुसार खुद को ढालें। आखिर में सबसे जरूरी चीज है कि आपका प्रोडक्ट हर जगह उपलब्ध हो और जब ग्राहक को जरूरत हो, तब उसे मिल जाए।

रिटेल में काम करते समय प्राथमिकता तय करना जरूरी है। बड़े आउटलेट ज्यादा बिक्री देते हैं, लेकिन ज्यादा जगहों पर मौजूदगी  से ब्रांड की पहचान और उपलब्धता दोनों बढ़ती हैं। सही बैलेंस बनाने से ही ग्रोथ मिलती है।

प्राइसिंग भी बहुत जरूरी है। पूरी चेन में हर किसी को सही मुनाफा मिलना चाहिए- चाहे वो डिस्ट्रीब्यूटर हो, रिटेलर हो या कंपनी। अगर किसी को फायदा नहीं मिलेगा, तो वह आपके प्रोडक्ट को आगे नहीं बढ़ाएगा, चाहे प्रोडक्ट कितना भी अच्छा क्यों न हो। इसी तरह उधार देना जरूरी है, लेकिन उसका सही कंट्रोल भी होना चाहिए, जैसे लिमिट तय करना और समय पर पैसे वसूलना।

पिछले कुछ वर्षों में सबसे बड़ा बदलाव सेकेंडरी सेल्स को ट्रैक करने में आया है। पहले फैसले अंदाजे पर होते थे, लेकिन अब डिस्ट्रीब्यूटर मैनेजमेंट सिस्टम जैसे सिस्टम से काफी पारदर्शिता आ गई है। अब आप देख सकते हैं कि प्रोडक्ट रिटेल तक कैसे जा रहा है, कहां कमी है और जल्दी सुधार कर सकते हैं। इससे काम ज्यादा प्रभावी हो गया है, जबकि मानवीय संबंध भी बने रहते हैं।

ट्रेड स्कीम और प्रमोशन आज भी जरूरी हैं, लेकिन इन्हें सही तरीके से चलाना चाहिए। एक अच्छी स्कीम पूरे चैनल में ऊर्जा भर सकती है, जबकि खराब स्कीम कन्फ्यूजन पैदा कर सकती है। फोकस हमेशा असली बिक्री बढ़ाने पर होना चाहिए, सिर्फ स्टॉक आगे धकेलने पर नहीं। इसके साथ ही दुकान के अंदर प्रोडक्ट की विजिबिलिटी यानी वस्तु का दिखना भी ग्राहक के फैसले को प्रभावित करती है।

ग्रामीण बाजार तक कैसे बनाएं पहुंच?

ग्रामीण बाजार पर खास ध्यान देना जरूरी है। यह सिर्फ शहरों की रणनीति का विस्तार नहीं है, बल्कि इसके लिए अलग सोच चाहिए। यहां तक पहुंचने में लॉजिस्टिक्स की दिक्कतें होती हैं, लोकल पसंद को समझना पड़ता है और छोटे नेटवर्क के साथ काम करना होता है। लेकिन लंबी अवधि में यहां बहुत संभावनाएं हैं। सही तरीके और धैर्य से गांव भी बड़ी ग्रोथ दे सकते हैं।

अंत में, इन सब चीजों के लिए सही मॉनिटरिंग जरूरी है। आपको सेल्स, कवरेज, स्टॉक और कलेक्शन जैसे आंकड़ों पर नजर रखनी चाहिए। लेकिन उससे भी जरूरी है उन आंकड़ों को सही तरीके से समझना। डेटा जरूरी है, लेकिन अनुभव आपको उसे सही समझने में मदद करता है। नियमित समीक्षा, टीम से ईमानदार बातचीत और समय पर सुधार ही सफलता दिलाते हैं।

कुल मिलाकर, मेरे अनुसार जनरल ट्रेड एक ऐसा सिस्टम है जो मजबूत भी है और समय के साथ बदल भी सकता है। अगर इसे सही तरीके से चलाया जाए, तो यह सिर्फ प्रोडक्ट बेचने का काम नहीं करता, बल्कि भरोसा बनाता है, ब्रांड को मजबूत करता है और लंबे समय तक बिजनेस को टिकाऊ बनाता है।

किसी भी फूड कंपनी के लिए जो लगातार ग्रोथ चाहती है, इस सिस्टम में निवेश करना और इसे समझना बहुत जरूरी है।


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(परिचय: 21 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ मनीष शर्मा एक अनुभवी सेल्स और डिस्ट्रीब्यूशन लीडर हैं। उन्होंने उत्तर भारत में एफएमसीजी, टेलीकॉम और परिधान जैसे अलग-अलग उद्योगों में काम किया है। वर्तमान में मनीष शर्मा पारले एग्रो प्राइवेट लिमिटेड में जनरल मैनेजर– सेल्स के पद पर कार्यरत हैं। अपने करियर में उन्होंने लगातार बिक्री बढ़ाने, डीलर नेटवर्क का विस्तार करने और बड़ी टीमों को सफलतापूर्वक संभालने का मजबूत रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने कोलगेट-पामोलिव, लिवाइस, भारती एयरटेल एंड आइडिया सेल्युलर जैसी प्रमुख कंपनियों में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं।)


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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