{"_id":"6a4fe2966c75156f560a834f","slug":"politics-and-policy-minister-needs-acs-or-ps-level-officer-2026-07-09","type":"blog","status":"publish","title_hn":"राज और नीति : मंत्री को चाहिए एसीएस या पीएस स्तर का अधिकारी","category":{"title":"Blog","title_hn":"अभिमत","slug":"blog"}}
राज और नीति : मंत्री को चाहिए एसीएस या पीएस स्तर का अधिकारी
सार
प्रदेश की एक मंत्री ने मुख्यमंत्री से अपने विभाग की सचिव को हटाकर उनकी जगह अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी की नियुक्ति की मांग की है। बताया जा रहा है कि सचिव के साथ कार्यशैली और स्थानांतरण मामलों को लेकर मतभेद हैं। अब मुख्यमंत्री के निर्णय पर सभी की नजरें हैं।
विज्ञापन
राज और नीति : मप्र में सियासी और प्रशासनिक हलचल बताता कॉलम
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
प्रदेश में एक मंत्री ऐसी हैं, जिनके विभाग की प्रमुख फिलहाल सचिव स्तर की अधिकारी हैं। अब मंत्री ने मुख्यमंत्री से मिलकर यह मांग की है कि उनके विभाग में अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी को पदस्थ किया जाए। बताया गया है कि उनकी अपनी सचिव 2005 बैच की आईएएस अधिकारी से पट नहीं रही है। बताया तो यहां तक गया है कि अभी कुछ दिनों पूर्व विभाग में हुए स्थानांतर के मामलों को लेकर भी दोनों के बीच काफी मतभेद सामने आए थे। अब मंत्री ने मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत रूप से मिलकर सचिव को तत्काल हटाने की मांग की है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मुख्यमंत्री अपने मंत्री की बात को मानकर विभाग में अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी को पदस्थ करेंगे या विभाग में महिला मंत्री के साथ ही महिला सचिव लगातार बनी रहेंगी।
खजुराहो विमानतल पर कलेक्टर की उपस्थिति से छिड़ी नई सियासी बहस
जाने माने उद्योगपति अनंत अंबानी के आगमन पर खजुराहो विमानतल पर छतरपुर के कलेक्टर पार्थ जायसवाल की उपस्थिति का मामला सामने आने के बाद राज्य में वीआईपी संस्कृति को लेकर एक नई सियासी बहस छिड़ गई है। कांग्रेस पार्टी ने इस पर आपत्ति जताई है। कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री राजा पटेरिया ने प्रदेश के राज्यपाल और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कलेक्टर पार्थ जायसवाल की शिकायत की है। उनका आरोप है कि निजी दौरे पर आए एक व्यक्ति को सरकारी प्रोटोकॉल देना और सरकारी तंत्र का उपयोग करना अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 का उल्लंघन है। 2015 बैच के युवा अधिकारी पार्थ जायसवाल ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि वे किसी भी निजी स्वागत या अगवानी के लिए नहीं गए थे और तस्वीरों को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। इस मामले को लेकर एक तरफ जहां विपक्ष सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का आरोप लगा रहा है, दूसरी ओर कुछ लोगों का मानना है कि देश के प्रमुख उद्योगपतियों का स्वागत करना जिले के विकास और निवेश के लिए सही कदम है।
आईएएस आलोक सिंह के नाम दर्ज हुआ अनूठा रिकॉर्ड
भारतीय प्रशासनिक सेवा में 2008 बैच के अधिकारी आलोक सिंह को पिछले प्रशासनिक फेरबदल में महानिरीक्षक पंजीयन पदस्थ किया गया है। यह वह पद है जहां पिछले कोई 30-35 वर्षों से सीधी भर्ती के ही दिग्गज और अपने काम के जरिए विशिष्ट पहचान बनाने वाले जाने-माने आईएएस अधिकारी पदस्थ होते आए हैं। आलोक सिंह संभवतः पहले प्रमोटी अधिकारी हैं, जिन्हें इस महत्वपूर्ण पद पर पदस्थ किया गया है। आलोक सिंह के पहले केवल एक अपवाद और रहा है। 90 के दशक में स्व. मोती सिंह भी इस पद पर रहे थे। उनके बारे में बताया गया कि वे एकमात्र ऐसे आईएएस अधिकारी रहे, जो इस पद पर दो बार पदस्थ रहे। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि इस पद पर सीधी भर्ती वाले आईएएस अधिकारियों को पदस्थ करने की परंपरा को पहले मोती सिंह ने तोड़ा था और अब आलोक सिंह ने।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री से वरिष्ठ आईएएस की मुलाकात के मायने!
मध्य प्रदेश में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों में गत दिनों हुए फेरबदल के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से हाल ही में अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने मुलाकात की। इस वन टू वन मुलाकात में दोनों के बीच क्या चर्चा हुई यह जानकारी तो प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन कहा जा रहा है कि आगामी प्रशासनिक फेरबदल में वर्णवाल को फिर महत्वपूर्ण जवाबदारी मिल सकती है। बता दें, भारतीय प्रशासनिक सेवा में 1991 बैच के वरिष्ठ अधिकारी अशोक वर्णवाल जनवरी 2027 में रिटायर हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार रिटायरमेंट के पहले या रिटायरमेंट के वक्त उन्हें कोई महत्वपूर्ण जवाबदारी भी सौंपी जा सकती है, हो सकता है इस बारे में भी मुख्यमंत्री और वर्णवाल के बीच कोई चर्चा हुई हो?
अस्वीकरण: यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
विज्ञापन
खजुराहो विमानतल पर कलेक्टर की उपस्थिति से छिड़ी नई सियासी बहस
जाने माने उद्योगपति अनंत अंबानी के आगमन पर खजुराहो विमानतल पर छतरपुर के कलेक्टर पार्थ जायसवाल की उपस्थिति का मामला सामने आने के बाद राज्य में वीआईपी संस्कृति को लेकर एक नई सियासी बहस छिड़ गई है। कांग्रेस पार्टी ने इस पर आपत्ति जताई है। कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री राजा पटेरिया ने प्रदेश के राज्यपाल और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कलेक्टर पार्थ जायसवाल की शिकायत की है। उनका आरोप है कि निजी दौरे पर आए एक व्यक्ति को सरकारी प्रोटोकॉल देना और सरकारी तंत्र का उपयोग करना अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 का उल्लंघन है। 2015 बैच के युवा अधिकारी पार्थ जायसवाल ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि वे किसी भी निजी स्वागत या अगवानी के लिए नहीं गए थे और तस्वीरों को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। इस मामले को लेकर एक तरफ जहां विपक्ष सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का आरोप लगा रहा है, दूसरी ओर कुछ लोगों का मानना है कि देश के प्रमुख उद्योगपतियों का स्वागत करना जिले के विकास और निवेश के लिए सही कदम है।
विज्ञापन
आईएएस आलोक सिंह के नाम दर्ज हुआ अनूठा रिकॉर्ड
भारतीय प्रशासनिक सेवा में 2008 बैच के अधिकारी आलोक सिंह को पिछले प्रशासनिक फेरबदल में महानिरीक्षक पंजीयन पदस्थ किया गया है। यह वह पद है जहां पिछले कोई 30-35 वर्षों से सीधी भर्ती के ही दिग्गज और अपने काम के जरिए विशिष्ट पहचान बनाने वाले जाने-माने आईएएस अधिकारी पदस्थ होते आए हैं। आलोक सिंह संभवतः पहले प्रमोटी अधिकारी हैं, जिन्हें इस महत्वपूर्ण पद पर पदस्थ किया गया है। आलोक सिंह के पहले केवल एक अपवाद और रहा है। 90 के दशक में स्व. मोती सिंह भी इस पद पर रहे थे। उनके बारे में बताया गया कि वे एकमात्र ऐसे आईएएस अधिकारी रहे, जो इस पद पर दो बार पदस्थ रहे। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि इस पद पर सीधी भर्ती वाले आईएएस अधिकारियों को पदस्थ करने की परंपरा को पहले मोती सिंह ने तोड़ा था और अब आलोक सिंह ने।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री से वरिष्ठ आईएएस की मुलाकात के मायने!
मध्य प्रदेश में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों में गत दिनों हुए फेरबदल के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से हाल ही में अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने मुलाकात की। इस वन टू वन मुलाकात में दोनों के बीच क्या चर्चा हुई यह जानकारी तो प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन कहा जा रहा है कि आगामी प्रशासनिक फेरबदल में वर्णवाल को फिर महत्वपूर्ण जवाबदारी मिल सकती है। बता दें, भारतीय प्रशासनिक सेवा में 1991 बैच के वरिष्ठ अधिकारी अशोक वर्णवाल जनवरी 2027 में रिटायर हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार रिटायरमेंट के पहले या रिटायरमेंट के वक्त उन्हें कोई महत्वपूर्ण जवाबदारी भी सौंपी जा सकती है, हो सकता है इस बारे में भी मुख्यमंत्री और वर्णवाल के बीच कोई चर्चा हुई हो?
अस्वीकरण: यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।