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राज औऱ नीति: प्रदेश मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें
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सार
मोहन यादव सरकार में मंत्रिमंडल फेरबदल और विस्तार की अटकलें तेज हैं। नवरात्रि तक फैसला संभव है। करीब पांच मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। मुख्यमंत्री की अमित शाह और नितिन नवीन से चर्चा के बाद किसी बड़े आदिवासी नेता को मंत्री बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है।
राज और नीति : मप्र में सियासी और प्रशासनिक हलचल बताता कॉलम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रदेश में इन दिनों मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार की अटकलें जोरों पर हैं। जानकारों का कहना है कि नवरात्रि में इसे मूर्त रूप दिया जा सकता है। इस फेरबदल में पांच मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, जिनमें कुछ बड़े नाम भी शामिल हैं। इस फेरबदल में किसी बड़े आदिवासी नेता को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाना तय माना जा रहा है।दरअसल, दिल्ली में हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अमित शाह से सीक्रेट मीटिंग हुई। माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर इन दोनों नेताओं से प्रारंभिक चर्चा हो चुकी है और अब चैत्र नवरात्रि तक इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है।
विशेषाधिकार समिति में मध्य प्रदेश से कोई सांसद नहीं
संसद की सबसे महत्वपूर्ण समिति 'विशेषाधिकार समिति' में मध्य प्रदेश से किसी सांसद का नाम नहीं होना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा पूर्व मंत्री रवि शंकर प्रसाद की अध्यक्षता में बनाई गई इस समिति में कई राज्यों के सांसद शामिल हैं, लेकिन क्या यह माना जाए कि लोकसभा अध्यक्ष ने मध्य प्रदेश से एक भी सांसद को इस समिति में शामिल करना उचित नहीं समझा या योग्य नहीं पाया?
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के आदेश का बेसब्री से इंतजार
भारतीय प्रशासनिक सेवा में 2001 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पी. नरहरि को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए केंद्र सरकार के आदेश का बेसब्री से इंतजार है। उन्होंने करीब छह माह पहले केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए आवेदन दिया था। पता चला है कि केंद्र सरकार ने अपनी सहमति दे दी है। राज्य सरकार की एनओसी भी चली गई है। अब नरहरि केंद्र सरकार (डीओपीटी) के आदेश का इंतजार कर रहे हैं।
फिर रुक गई निगम मंडलों की सूची
गत सप्ताह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की दिल्ली यात्रा से लौटने पर जिन भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के चेहरे खुश नजर आ रहे थे, उनमें अब फिर से निराशा नजर आ रही है। दरअसल मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की दिल्ली में शीर्ष नेताओं से मुलाकात के बाद यह माना जा रहा था कि निगम-मंडल और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियों को हरी झंडी मिल गई है। यहां तक कहा गया था कि दोनों के भोपाल लौटते ही अगले कुछ दिनों में सूची जारी हो जाएगी, लेकिन ऐसा लगता है कि एक दो नाम को लेकर मामला फिर से अटक गया है। सूत्रों के अनुसार कुछ नामों पर दिल्ली में प्रभाव रखने वाले प्रदेश के एक बड़े नेता ने वीटो लगा दिया। इस वजह से फिलहाल यह सूची पुनर्विचार में जा अटकी है। अब माना जा रहा है कि, अगर सब कुछ ठीक रहा तो अगले पखवाड़े शुरू होने वाली नवरात्रि तक यह सूची जारी हो सकती है।
अस्वीकरण: यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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संसद की सबसे महत्वपूर्ण समिति 'विशेषाधिकार समिति' में मध्य प्रदेश से किसी सांसद का नाम नहीं होना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा पूर्व मंत्री रवि शंकर प्रसाद की अध्यक्षता में बनाई गई इस समिति में कई राज्यों के सांसद शामिल हैं, लेकिन क्या यह माना जाए कि लोकसभा अध्यक्ष ने मध्य प्रदेश से एक भी सांसद को इस समिति में शामिल करना उचित नहीं समझा या योग्य नहीं पाया?
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केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के आदेश का बेसब्री से इंतजार
भारतीय प्रशासनिक सेवा में 2001 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पी. नरहरि को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए केंद्र सरकार के आदेश का बेसब्री से इंतजार है। उन्होंने करीब छह माह पहले केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए आवेदन दिया था। पता चला है कि केंद्र सरकार ने अपनी सहमति दे दी है। राज्य सरकार की एनओसी भी चली गई है। अब नरहरि केंद्र सरकार (डीओपीटी) के आदेश का इंतजार कर रहे हैं।
फिर रुक गई निगम मंडलों की सूची
गत सप्ताह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की दिल्ली यात्रा से लौटने पर जिन भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के चेहरे खुश नजर आ रहे थे, उनमें अब फिर से निराशा नजर आ रही है। दरअसल मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की दिल्ली में शीर्ष नेताओं से मुलाकात के बाद यह माना जा रहा था कि निगम-मंडल और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियों को हरी झंडी मिल गई है। यहां तक कहा गया था कि दोनों के भोपाल लौटते ही अगले कुछ दिनों में सूची जारी हो जाएगी, लेकिन ऐसा लगता है कि एक दो नाम को लेकर मामला फिर से अटक गया है। सूत्रों के अनुसार कुछ नामों पर दिल्ली में प्रभाव रखने वाले प्रदेश के एक बड़े नेता ने वीटो लगा दिया। इस वजह से फिलहाल यह सूची पुनर्विचार में जा अटकी है। अब माना जा रहा है कि, अगर सब कुछ ठीक रहा तो अगले पखवाड़े शुरू होने वाली नवरात्रि तक यह सूची जारी हो सकती है।
अस्वीकरण: यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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