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मुड़-मुड़ के देख: यह खोज का समय है; वृद्धावस्था खुद को अपने ही अनुभवों से जानने का भी समय
फ्लोरिडा स्कॉट-मैक्सवेल
Published by: Shubham Kumar
Updated Fri, 06 Mar 2026 08:13 AM IST
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सार
जो लोग वृद्धावस्था से डरते हैं, उन्हें समझना चाहिए कि यह खोज का समय है। यह जानने का समय है कि हम वास्तव में कौन हैं। यदि कोई पूछे कि इस उम्र में क्या खोजा जा सकता है, तो उत्तर है कि खुद को अपने ही अनुभवों से जानना।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
याद रखें, वृद्धावस्था में किसी और की खातिर खुद को बदलने की जरूरत नहीं, बल्कि आप जो हैं, वही सच्चाई का एक अंश है। आप उन लंबे वर्षों से गुजरे हैं, जब अकेलापन एक दर्द था, पर अब आप उस कठोर तपस्या के अच्छे पक्ष, यानी सुकून में आ गए हैं। अकेले आप दिन भर अपनी राह खुद चुनते हैं, और बहुत सहज हो जाते हैं। शायद यह सहजता उन गहराइयों और ऊंचाइयों तक जाती है, जो हम जानते भी नहीं। चूंकि, हम इसे शब्दों में बयां नहीं कर सकते, इसलिए हमें इसे उस जीवन के रूप में संजोना चाहिए, जो हमारे दिनों को समृद्ध करता है। शायद यही अकेले रहने का अभ्यास हमें वृद्धावस्था के लिए तैयार करता है।
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वृद्धावस्था जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण समय है। यह संतुलन का समय है, जैसे कोई रस्सी पर चल रहा हो। हमें अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना होता है, साहस बनाए रखना होता है, प्रसन्न और उत्सुक बने रहना होता है, और सबसे बढ़कर अपने प्रति ईमानदार रहना होता है। यही संतुलन हमें अंत तक सचेत और संवेदनशील मनुष्य बनाए रखता है। जब वृद्धावस्था में कोई नई बीमारी या कमजोरी आती है, तो ऐसा लगता है, मानो मृत्यु पास आ गई हो। तब मन में प्रश्न उठता है, क्या यही अंत है, पर अक्सर वह मृत्यु नहीं, बल्कि शरीर की एक नई सीमा होती है, जो हमें जीवन की नश्वरता का स्मरण कराती है।
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वृद्धावस्था खोज का समय है। यह जानने का कि हम वास्तव में कौन हैं। यदि कोई पूछे कि इस उम्र में क्या खोजा जा सकता है, तो उत्तर है कि खुद को अपने ही अनुभवों से जानना। यही खोज जीवन को अर्थ देती है।
जीवन के अंत में भी मनुष्य पूरी तरह अकेला नहीं होता। हम उन लोगों से जुड़े रहते हैं, जिन्हें हम प्रेम करते हैं या जो हमसे प्रेम करते हैं। वृद्धावस्था आत्मबोध, संतुलन, और आंतरिक शांति का समय है। यह जीवन का एक गंभीर, परंतु अत्यंत सुंदर चरण है, जिसे समझकर और स्वीकार करके ही हम उसकी सच्ची गरिमा को पहचान सकते हैं।
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