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राज और नीति: नड्डा से नवीन के फेर में अटकी निगम-मंडलों की नियुक्तियां

Suresh Tiwari सुरेश तिवारी
Updated Fri, 30 Jan 2026 06:16 AM IST
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सार

राज और नीति: मध्य प्रदेश की सियासत और प्रशासन में हलचल तेज है। निगम नियुक्तियों पर ब्रेक, आईपीएस-आईएएस खींचतान, झाबुआ का संवेदनशील गौकशी मामला, कैलाश विजयवर्गीय की छुट्टी और बैतूल कलेक्टर की मिसाल सब मिलकर सत्ता और सिस्टम की तस्वीर दिखाते हैं। पढ़ें ये ब्लॉग

Raj Aur Niti: List of corporations and boards on hold
राज और नीति - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेश में पिछले कई दिनों से निगम मंडलों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की नियुक्तियों की चर्चा चल रही है। लेकिन, भाजपा  हाई कमान ने फिलहाल इस पर ब्रेक लगा दिया है। प्रदेश भाजपा द्वारा इस संबंध में पिछले दिनों जो सूची दी गई थी, उसे होल्ड कर दिया गया है। दरअसल, सूची दिल्ली भेजी गई तब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा थे, लेकिन, जब तक यह सूची घोषित की जाती, नड्डा ही हट गए और नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन बन गए। अब नवीन ने सारी सूचियों को होल्ड पर रख दिया है। इससे प्रदेश के भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं में निराशा जरूर है, लेकिन आस भी बरकरार है। 
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आईपीएस अधिकारी ही रहेंगे ट्रांसपोर्ट कमिश्नर 
देश में शायद मध्य प्रदेश ही ऐसा बिरला राज्य है जहां राज्य सरकार द्वारा आईपीएस अधिकारी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर बनाए जाते हैं। यह परंपरा पिछले कई वर्षों से चली आ रही है। कुछ दिनों से यह चर्चा थी कि अब यहां पर भी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर आईएएस अधिकारी होगा, लेकिन एक बार फिर ऐसा हो नहीं पाया। बताया जाता है कि आईएएस लॉबी ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को सहमत करवाने की कोशिश भी की थी, लेकिन शायद मुख्यमंत्री राजी नहीं हुए। गुरुवार को जारी तबादला सूची में इस बात की पुष्टि भी हो गई कि उज्जैन के एडीजी और मुख्यमंत्री के विश्वसनीय अधिकारी उमेश जोगा को प्रदेश का नया ट्रांसपोर्ट कमिश्नर बनाया गया। जाहिर है प्रदेश में अब आईपीएस अधिकारी ही ट्रांसपोर्ट कमिश्नर बने रहेंगे।
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आदिवासी क्षेत्र का गौकशी कांड बना बहस का मुद्दा!
प्रदेश के आदिवासी बहुल झाबुआ जिले के मेघनगर क्षेत्र की वन विभाग का गौकशी कांड अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह मध्य प्रदेश की कानून व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और शासन की संवेदनशीलता पर सीधा सवाल बन चुका है। 6 दिसंबर 2025 को मेघनगर क्षेत्र की वन बीट में गोवंश के अवशेष मिलने से मामले का खुलासा हुआ। 7 दिसंबर को पुलिस और वन विभाग ने संयुक्त कार्रवाई कर अवशेष जब्त किए और प्रकरण दर्ज किया। 8 से 10 दिसंबर के बीच कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, जबकि कुछ आरोपी फरार हो गए।

मध्य दिसंबर में फरार आरोपियों पर इनाम और जिला बदर की कार्रवाई की गई। इसी दौरान बीट क्षेत्र के कर्मचारी को हटाया गया और प्रभारी एसडीओ तथा प्रभारी डीएफओ की जिम्मेदारियां भी बदली गईं। इसके बाद आंदोलन तेज हुए और जनवरी 2026 तक यह मामला प्रदेश स्तर की बहस का मुद्दा बन गया। घने जंगल क्षेत्र में गोवंश के अवशेष मिलना इस बात की ओर इशारा करता है कि अवैध गतिविधियां लंबे समय से संगठित तरीके से चल रही थीं, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे रहे। पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारियां और फरार आरोपियों पर इनाम घोषित होना इस नेटवर्क की गहराई को दर्शाता है।

कैलाश विजयवर्गीय की छुट्टी के मायने 
प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की छुट्टी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही है। यह छुट्टी भी ऐसे समय ली गई, जब इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल से लगातार मौतों का सिलसिला अभी भी जारी है। इतना ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण धार, जहां के वे प्रभारी मंत्री हैं, भोजशाला मुद्दा भी इन्हीं दिनों रहा। कैलाश विजयवर्गीय अपने निकटतम परम मित्र के दुख में सहभागी होने से 28 जनवरी तक अवकाश पर थे। इसी बीच पता चला है कि कैलाश ने संघ के ऑफिस में दस्तक दी। बहरहाल विजयवर्गीय की छुट्टियां खत्म हो गई हैं और वे छुट्टी से लौट कर इंदौर में फिर से सक्रिय होते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने इंदौर में एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर एक बड़ी बैठक भी ली। सबकी निगाहें अभी भी विजयवर्गीय की तरफ हैं कि उनका अगला कदम क्या होगा?

बैतूल कलेक्टर की हो रही सराहना 
बैतूल के कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी कि इस बात को लेकर सराहना हो रही है कि जब उन्हें दिल का दर्द हुआ तो वह बजाए प्राइवेट अस्पताल के सीधे सरकारी अस्पताल में पहुंचे और अपना इलाज करवाया। दरअसल, गत शनिवार को नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी को अचानक सीने में दर्द होने की शिकायत हुई। स्थिति गंभीर दिखाई दे रही थी। वे तुरंत इलाज के लिए सरकारी जिला चिकित्सालय में पहुंचे। चिकित्सकों की टीम ने तत्परता से उनका इलाज किया और टेस्ट नॉर्मल होने पर उन्हें छुट्टी दे दी गई। इसी बहाने कलेक्टर ने जनता को एक बड़ा संदेश भी दे दिया कि आम जनता को सरकारी चिकित्सा सेवाओं पर भरोसा करना चाहिए, वहां मरीजों का बेहतर इलाज होता है।

अस्वीकरण: यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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