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TDS: टीडीएस कटौती से बचने का तरीका, ताकि रिटायरमेंट की खुशियां बनी रहें
पवन पांडेय, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Fri, 30 Jan 2026 07:46 AM IST
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सार
एफडी से होने वाली आय पर टीडीएस कट जाने से 70 वर्षीय राधेश्याम को घर का खर्च चलाने में मुश्किलें हो रही हैं। सेवानिवृत्ति के बाद आपकी जमापूंजी- जैसे, एफडी, आरडी आदि से होने वाली आय पर कोई कर न लगे, इसके लिए कुछ बातों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।
टीडीएस कटौती से कैसे बचें
- फोटो : Freepik.com
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विस्तार
70 वर्षीय सेवानिवृत्त राधेश्याम अपनी बचत को फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में रखकर थोड़ा-बहुत ब्याज कमाते हैं। लेकिन टीडीएस कटने से उनकी आमदनी कम हो जाती है, जिससे दवा और घर खर्च चलाना मुश्किल होता है। यह समस्या लाखों बुजुर्गों की है, जिन्हें बैंक एफडी या दूसरी जमा से ब्याज के रूप में आय होती है। ऐसे में, उनके मन में सवाल उठता है कि क्या टीडीएस कटौती से बचने का कोई तरीका है? तो जवाब है-फॉर्म 15एच।
ब्याज आय पर कब कटता है टीडीएस :
फॉर्म 15एच उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक वरदान की तरह है, जिनकी आमदनी कम है, लेकिन उन्हें फिक्स्ड डिपॉजिट से एक लाख रुपये से ज्यादा ब्याज मिलने की उम्मीद है। यह फॉर्म उन्हें किसी भी कर व्यवस्था के तहत टीडीएस कटौती से बचने में मदद कर सकता है। वरिष्ठजनों के मामले में टीडीएस तब काटा जाता है, जब एक वित्त वर्ष में ब्याज आय एक लाख रुपये से ज्यादा हो। आम नागरिकों के लिए यह सीमा 50 हजार रुपये है। अगर आपकी कई बैंकों में एफडी है, तो हर बैंक 10 फीसदी की दर से टैक्स (टीडीएस) काटकर सरकार के पास जमा करते हैं। वैध पैन नंबर नहीं होने की सूरत में यह दर 20 प्रतिशत हो सकती है।
क्या है फॉर्म 15एच
इस सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म का इस्तेमाल वरिष्ठ नागरिक अपनी ब्याज आय को कर कटौती (टीडीएस) से बचाने के लिए कर सकते हैं। यह मुख्य रूप से एफडी, रिकरिंग डिपॉजिट (आरडी) या ब्याज से होने वाली अन्य आय पर लागू होता है। अगर संबंधित वित्त वर्ष में कुल आय पर कटौती व 87ए की छूट के बाद कोई टैक्स नहीं बनता, तो आप इस फॉर्म को जमा कर टीडीएस कटौती रोक सकते हैं।
12 लाख रुपये तक की आय पर कर से राहत
वित्त वर्ष 2025-26 की नई कर व्यवस्था के तहत अगर किसी वरिष्ठ नागरिक की एफडी की ब्याज आय सहित कुल इनकम 12 लाख रुपये तक होगी, तो उन्हें कोई कर नहीं देना होगा।
टैक्स देनदारी शून्य पर भी टीडीएस कटेगा
भले ही आपकी कर देनदारी शून्य निकल रही हो, लेकिन अगर एफडी का ब्याज एक लाख रुपये से ज्यादा है, तो बैंक टीडीएस काट लेते हैं, क्योंकि आयकर कानूनों के हिसाब से ऐसा करना जरूरी है। उन्हें आपकी कर देनदारी के बारे में जानकारी नहीं होती है। ऐसे में, वरिष्ठ नागरिक फॉर्म 15एच भरकर बैंक को यह बताते हैं कि उनकी कर देनदारी शून्य है, इसलिए उनका टीडीएस नहीं काटा जाए। इस स्थिति में बैंक आपकी ब्याज आय पर किसी भी तरह का टैक्स नहीं काटते हैं। हालांकि, इसके लिए आपको हर उस बैंक या वित्तीय संस्थान में अलग-अलग फॉर्म जमा करना होगा, जहां से आपको जमा पर ब्याज मिलता है।
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ब्याज आय पर कब कटता है टीडीएस :
फॉर्म 15एच उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक वरदान की तरह है, जिनकी आमदनी कम है, लेकिन उन्हें फिक्स्ड डिपॉजिट से एक लाख रुपये से ज्यादा ब्याज मिलने की उम्मीद है। यह फॉर्म उन्हें किसी भी कर व्यवस्था के तहत टीडीएस कटौती से बचने में मदद कर सकता है। वरिष्ठजनों के मामले में टीडीएस तब काटा जाता है, जब एक वित्त वर्ष में ब्याज आय एक लाख रुपये से ज्यादा हो। आम नागरिकों के लिए यह सीमा 50 हजार रुपये है। अगर आपकी कई बैंकों में एफडी है, तो हर बैंक 10 फीसदी की दर से टैक्स (टीडीएस) काटकर सरकार के पास जमा करते हैं। वैध पैन नंबर नहीं होने की सूरत में यह दर 20 प्रतिशत हो सकती है।
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क्या है फॉर्म 15एच
इस सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म का इस्तेमाल वरिष्ठ नागरिक अपनी ब्याज आय को कर कटौती (टीडीएस) से बचाने के लिए कर सकते हैं। यह मुख्य रूप से एफडी, रिकरिंग डिपॉजिट (आरडी) या ब्याज से होने वाली अन्य आय पर लागू होता है। अगर संबंधित वित्त वर्ष में कुल आय पर कटौती व 87ए की छूट के बाद कोई टैक्स नहीं बनता, तो आप इस फॉर्म को जमा कर टीडीएस कटौती रोक सकते हैं।
12 लाख रुपये तक की आय पर कर से राहत
वित्त वर्ष 2025-26 की नई कर व्यवस्था के तहत अगर किसी वरिष्ठ नागरिक की एफडी की ब्याज आय सहित कुल इनकम 12 लाख रुपये तक होगी, तो उन्हें कोई कर नहीं देना होगा।
टैक्स देनदारी शून्य पर भी टीडीएस कटेगा
भले ही आपकी कर देनदारी शून्य निकल रही हो, लेकिन अगर एफडी का ब्याज एक लाख रुपये से ज्यादा है, तो बैंक टीडीएस काट लेते हैं, क्योंकि आयकर कानूनों के हिसाब से ऐसा करना जरूरी है। उन्हें आपकी कर देनदारी के बारे में जानकारी नहीं होती है। ऐसे में, वरिष्ठ नागरिक फॉर्म 15एच भरकर बैंक को यह बताते हैं कि उनकी कर देनदारी शून्य है, इसलिए उनका टीडीएस नहीं काटा जाए। इस स्थिति में बैंक आपकी ब्याज आय पर किसी भी तरह का टैक्स नहीं काटते हैं। हालांकि, इसके लिए आपको हर उस बैंक या वित्तीय संस्थान में अलग-अलग फॉर्म जमा करना होगा, जहां से आपको जमा पर ब्याज मिलता है।