सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   Jeevan Dhara: Start the change today, learn and keep moving forward, important formula

जीवन धारा: बदलाव की शुरुआत आज से ही करें, सीखें और आगे बढ़ते रहना अहम सूत्र

टोनी हसीह Published by: पवन पांडेय Updated Thu, 29 Jan 2026 07:57 AM IST
विज्ञापन
सार

प्रतिदिन अपने डर को परास्त करते हुए एक छोटा कदम बढ़ाना ही अंततः मंजिल तक पहुंचाता है। नियति केवल उन्हीं का मार्ग प्रशस्त करती है, जो गतिमान हैं, और जो खुद को चुनौती देने का साहस रखते हैं।

Jeevan Dhara: Start the change today, learn and keep moving forward, important formula
जीवन धारा: बदलाव की शुरुआत आज से ही करें - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

जीवन का वास्तविक मर्म मात्र सुरक्षा और सुख-सुविधाओं के घेरे में सिमटे रहना नहीं है, अपितु स्वयं को निरंतर चुनौतियों की अग्नि में तपाना और प्रतिपल स्वयं को श्रेष्ठ बनाने की ओर अग्रसर होना है। यदि हम ऐसे परिवेश, व्यवसाय अथवा परिस्थितियों की बेड़ियों में जकड़े रहे, जहां न नवीन ज्ञान का प्रकाश हो और न ही उन्नति का कोई द्वार, तो शनैः शनैः हमारा उत्साह क्षीण होने लगता है, जिज्ञासा की लौ बुझ जाती है और आत्मविश्वास का स्तंभ डगमगाने लगता है।
Trending Videos


मानवीय प्रकृति का मूल स्वभाव ही अनंत विस्तार, निरंतर अधिगम और अपनी परिधियों को लांघना है। इसके लिए यह आत्म-चिंतन जरूरी है कि क्या आज हमने कुछ नया आत्मसात किया और क्या हम बीते हुए कल से अधिक प्रखर बन पाए हैं? जिस प्रकार मार्ग अवरुद्ध होने पर एक वेगवती नदी भी दूषित हो जाती है, ठीक उसी प्रकार प्रगति का मार्ग त्याग देने पर मनुष्य का अंतर्मन क्लांत और कुंठित हो जाता है, इसलिए स्वयं की गति को कभी मंद न होने दें। जिंदगी का सबसे कटु सत्य यह है कि जीवन में सबसे बड़ा जोखिम कोई जोखिम न लेना ही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यदि हम मात्र सुरक्षा के छलावे में अपने सपनों की बलि चढ़ा देते हैं, तो यह अपनी आत्मा के साथ किया गया सबसे बड़ा अन्याय है, क्योंकि व्यक्तिगत विकास की पुष्पलता हमेशा संघर्ष और असहजता की भूमि पर ही पल्लवित होती है। जब हम स्वयं को कठिन चुनौतियों के सामने खड़ा करते हैं, तभी हमारी सुप्त शक्तियां जागृत होती हैं और हमारी असली क्षमता प्रकट होती है। सीखने की यह प्रक्रिया जीवन के अंतिम क्षण तक अनवरत चलती रहनी चाहिए, क्योंकि आयु और अनुभव के किसी भी पड़ाव पर नवीन कौशल, मौलिक विचार और अभिनव दृष्टिकोण ही हमें जीवंतता का बोध कराते हैं। स्वयं को शिक्षित और दीक्षित करना ही सर्वश्रेष्ठ निवेश है, जिसका लाभांश अटूट शक्ति के रूप में प्राप्त होता है।

आपका कर्म केवल धनार्जन का माध्यम मात्र नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें आपके जुनून की सुगंध और जीवन के उच्च उद्देश्यों की गूंज भी होनी चाहिए। जब आप किसी ऐसे लक्ष्य के प्रति समर्पित होते हैं, जहां आपकी बुद्धि का विस्तार हो और आपको चुनौतियां मिलें, तो कठिन परिश्रम भी आनंद का पर्याय बन जाता है; वहां थकावट तो होती है, पर मानसिक टूटन नहीं, क्योंकि आप जानते हैं कि आपकी यात्रा अर्थपूर्ण है। प्रतिदिन अपने डर को परास्त करते हुए एक छोटा कदम बढ़ाना ही अंततः आपको आपकी मंजिल तक पहुंचाता है। स्मरण रहे, नियति केवल उन्हीं का मार्ग प्रशस्त करती है, जो गतिमान हैं, और जो स्वयं को चुनौती देने का साहस रखते हैं। ऐसा इन्सान ही स्वयं के वास्तविक स्वरूप को खोज पाता है। इसलिए, वर्तमान की संतुष्टि में बंधकर रुकिए मत; सपने देखते रहिए, प्रश्न पूछते रहिए और निरंतर आगे बढ़ते रहिए, क्योंकि आपकी वास्तविक क्षमता आपकी वर्तमान हिम्मत की सीमाओं से कहीं अधिक विशाल और असीमित है।

सूत्र- सीखें और आगे बढ़ें
जिंदगी निरंतर आगे बढ़ने वालों का पथ स्वयं प्रशस्त करती है। जो व्यक्ति स्वयं को चुनौती देने का साहस रखता है, वही अपने वास्तविक स्वरूप व सामर्थ्य को पहचान पाता है। इसलिए जहां हैं, संतोष करके वहीं रुक मत जाइए। बड़े सपने देखिए, प्रश्न पूछिए, सीखने की जिज्ञासा बनाए रखिए और पूरे आत्मविश्वास के साथ निरंतर आगे बढ़ते रहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed