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दूसरी पारी: घर की चीजों में फंसे बुजुर्ग दंपती, इस उम्र में चीजों का मोह स्वाभाविक है
अमर उजाला
Published by: Pavan
Updated Fri, 08 May 2026 08:07 AM IST
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सार
मेरी और मेरी पत्नी की सेहत ठीक नहीं रहती। हम अस्सी पार कर चुके हैं। हमें एक ऐसे घर की जरूरत है, जहां चिकित्सा सुविधाएं हों, पर वह सामान के कारण छोटे घर में जाना नहीं चाहतीं। मैं क्या करूं?
घर की चीजों के मोह में फंसे अस्सी पार बीमार दंपती को मनोवैज्ञानिक नीलकंठ ने कुछ यों सलाह दी...
दूसरी पारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिंदगी भर जुटाई गई चीजों का मोह स्वाभाविक है। लेकिन लगता है कि आपकी पत्नी को चीजें जमा करने की आदत है, जो जाहिर तौर पर एक मानसिक स्वास्थ्य समस्या है। इसका कोई आसान हल नहीं है, खासकर उनकी उम्र को देखते हुए।
पर, आप दोनों की बिगड़ती सेहत को देखते हुए, अब आप दोनों को सचमुच किसी देखभाल वाले आवास में रहने की जरूरत है, न कि किसी दूसरे घर में। वहां आप दोनों को वह देखभाल मिलेगी, जिसकी आपको जरूरत है। यही नहीं, आप लोगों से घुल-मिल पाएंगे, और आपको वह चिकित्सकीय मदद भी आसानी से मिल जाएगी, जिसकी जरूरत आपको अभी है और आगे भी रहेगी।
फिलहाल, आप अपनी पत्नी के इकट्ठा किए गए सामान को रखने के लिए पास में ही किराये पर अलग से स्टोरेज ले सकते हैं, ताकि उनको भी तसल्ली रहे कि उनका सामान सुरक्षित है। अगर आप उनका सारा सामान किसी स्टोरेज में रखवाने में कामयाब हो जाते हैं, तो पूरी संभावना है कि वह वहीं पड़ा रहेगा और जल्द ही आपकी पत्नी भी उसके बारे में भूल जाएंगी।
आमतौर पर, जो लोग चीजों को बहुत ज्यादा सहेजकर रखते हैं, उन्हें यह भी याद नहीं रहता कि उन्होंने क्या-क्या छिपाकर रखा है। यदि आपकी जगह मैं होता, तो कोशिश करता कि जितनी जल्दी हो सके, उन सारे सामान से छुटकारा पा लूं या फिर अपनी पत्नी को बिना बताए, जितना हो सके उसे दान कर दूं, अथवा परिवार के उन सदस्यों को दे दूं, जिन्हें उनकी ज्यादा जरूरत हो। आप सच में नहीं चाहेंगे कि आप दोनों के जाने के बाद, परिवार वालों को उन गैर-जरूरी सामानों से छुटकारा पाने के लिए किसी भी उलझन से निपटना पड़े। इसलिए बेहतर है कि आप अभी ही इससे निपट लें।
हो सकता है कि आपकी पत्नी को आपकी मर्जी के मुताबिक घर बदलना जरूरी न लग रहा हो। महिलाएं अक्सर पाई-पाई बचाकर घर-गृहस्थी का सामान जुटाती हैं, इसलिए सामान के प्रति उनका मोह स्वाभाविक है। संभव है कि आपके लंबे वैवाहिक जीवन में अक्सर ऐसा होता रहा हो, कि आपने थक-हारकर उनकी जिद मान ली हो और वह अब भी यही सोच रही हों कि अंततः आप हार मान लेंगे और उन्हें अपनी मर्जी का करने देंगे।
आप उन्हें परिवार के अन्य लोगों के माध्यम से यह समझाने का प्रयास करें कि उम्र के इस पड़ाव पर संपत्ति नहीं, स्वास्थ्य आप दोनों की प्राथमिकता होनी चाहिए। अगर वह फिर भी नहीं मानती हैं, तो उन्हें धमकी दें कि आप उनसे अलग होकर कहीं दूसरी जगह रहने चले जाएंगे। मेरे कहने का मतलब यह नहीं है कि सचमुच आप उनसे अलग हो जाएं, बस यह कहना चाह रहा हूं कि आप अलग होकर कहीं चले जाने का दिखावा तो कर ही सकते हैं, ताकि वह आपको गंभीरता से लें। उम्मीद है कि इस हालात में वह भी समझदारी से काम लेंगी।
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पर, आप दोनों की बिगड़ती सेहत को देखते हुए, अब आप दोनों को सचमुच किसी देखभाल वाले आवास में रहने की जरूरत है, न कि किसी दूसरे घर में। वहां आप दोनों को वह देखभाल मिलेगी, जिसकी आपको जरूरत है। यही नहीं, आप लोगों से घुल-मिल पाएंगे, और आपको वह चिकित्सकीय मदद भी आसानी से मिल जाएगी, जिसकी जरूरत आपको अभी है और आगे भी रहेगी।
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फिलहाल, आप अपनी पत्नी के इकट्ठा किए गए सामान को रखने के लिए पास में ही किराये पर अलग से स्टोरेज ले सकते हैं, ताकि उनको भी तसल्ली रहे कि उनका सामान सुरक्षित है। अगर आप उनका सारा सामान किसी स्टोरेज में रखवाने में कामयाब हो जाते हैं, तो पूरी संभावना है कि वह वहीं पड़ा रहेगा और जल्द ही आपकी पत्नी भी उसके बारे में भूल जाएंगी।
आमतौर पर, जो लोग चीजों को बहुत ज्यादा सहेजकर रखते हैं, उन्हें यह भी याद नहीं रहता कि उन्होंने क्या-क्या छिपाकर रखा है। यदि आपकी जगह मैं होता, तो कोशिश करता कि जितनी जल्दी हो सके, उन सारे सामान से छुटकारा पा लूं या फिर अपनी पत्नी को बिना बताए, जितना हो सके उसे दान कर दूं, अथवा परिवार के उन सदस्यों को दे दूं, जिन्हें उनकी ज्यादा जरूरत हो। आप सच में नहीं चाहेंगे कि आप दोनों के जाने के बाद, परिवार वालों को उन गैर-जरूरी सामानों से छुटकारा पाने के लिए किसी भी उलझन से निपटना पड़े। इसलिए बेहतर है कि आप अभी ही इससे निपट लें।
हो सकता है कि आपकी पत्नी को आपकी मर्जी के मुताबिक घर बदलना जरूरी न लग रहा हो। महिलाएं अक्सर पाई-पाई बचाकर घर-गृहस्थी का सामान जुटाती हैं, इसलिए सामान के प्रति उनका मोह स्वाभाविक है। संभव है कि आपके लंबे वैवाहिक जीवन में अक्सर ऐसा होता रहा हो, कि आपने थक-हारकर उनकी जिद मान ली हो और वह अब भी यही सोच रही हों कि अंततः आप हार मान लेंगे और उन्हें अपनी मर्जी का करने देंगे।
आप उन्हें परिवार के अन्य लोगों के माध्यम से यह समझाने का प्रयास करें कि उम्र के इस पड़ाव पर संपत्ति नहीं, स्वास्थ्य आप दोनों की प्राथमिकता होनी चाहिए। अगर वह फिर भी नहीं मानती हैं, तो उन्हें धमकी दें कि आप उनसे अलग होकर कहीं दूसरी जगह रहने चले जाएंगे। मेरे कहने का मतलब यह नहीं है कि सचमुच आप उनसे अलग हो जाएं, बस यह कहना चाह रहा हूं कि आप अलग होकर कहीं चले जाने का दिखावा तो कर ही सकते हैं, ताकि वह आपको गंभीरता से लें। उम्मीद है कि इस हालात में वह भी समझदारी से काम लेंगी।
जिंदगी की दूसरी पारी बहुत महत्वपूर्ण होती है। हर शुक्रवार इस पर आपको नया पढ़ने को मिलेगा। आप अपने विचार, अनुभव या समस्याएं edit@amarujala.com पर भेज सकते हैं, विशेषज्ञों की मदद से हम कोशिश करेंगे कि संवाद का पुल बन सके।