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370 और जम्मू-कश्मीर : शाह ने नेहरू को पाक अधिकृत कश्मीर पाकिस्तान को सौंपने का जिम्मेदार ठहरायाा

के एस तोमर Published by: Raman Singh Updated Thu, 04 Jul 2019 12:57 AM IST
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Article 370 and Jammu and Kashmir
Article 370

आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद के नजरिये को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जवाहर लाल नेहरू को पाक अधिकृत कश्मीर पाकिस्तान को सौंपने का जिम्मेदार ठहरायाा। इससे संविधान के अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने का रास्ता साफ हो सकता है, जिसके कारण जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्राप्त है। राम मंदिर का मुद्दा जिस तरह से उलझा हुआ है, उसे देखते हुए भाजपा अनुच्छेद 370 को हटाने की उम्मीद कर रही है, जिसका देशवासी स्वागत कर सकते हैं, लेकिन इससे घाटी में उथल-पुथल मच सकती है, जहां अल्पसंख्यक समुदाय का प्रभुत्व है।


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अनुच्छेद 370 छब्बीस नवंबर, 1949 को अस्तित्व में आया था, जिसे संविधान सभा ने संविधान का हिस्सा बनाया था। अनुच्छेद 35 ए भी इससे जुड़ा हुआ है और यह जम्मू-कश्मीर राज्य में इसके नियत सांविधानिक रूप के तहत जनसांख्यिकी को संरक्षित करता है। जम्मू-कश्मीर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ अमिताभ मट्टू कहते हैं, संविधान में अनुच्छेद 370 को क्यों जोड़ा गया? महान कवि और विचारक मौलाना हसरत मोहानी ने 17 अक्तूबर, 1949 को संविधान सभा में पूछा था, यह भेदभाव क्यों? इसका जवाब नेहरू के एक ऐसे विश्वस्त ने दिया जो कि बुद्धिमान थे, लेकिन जिन्हें ठीक से समझा नहीं गया।

यह थे तंजावुर ब्राह्मण गोपालस्वामी आयंगर, जो कि जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह के पूर्व दीवान थे और पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल में बिना विभाग वाले मंत्री थे। 370 का मसौदा तैयार करने में उनकी अहम भूमिका थी। आयंगर ने तर्क दिया कि विभिन्न कारणों से जम्मू-कश्मीर अन्य रियासतों की तरह एकीकरण के लिए तैयार नहीं है। जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत की पाकिस्तान से जंग हुई थी और वहां संघर्ष विराम जरूर हो गया था, लेकिन अब भी राज्य का कुछ हिस्सा 'विद्रोहियों और शत्रुओं' के कब्जे में था।

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