सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   west-asia-peace-puzzle-iran-us-israel-hormuz-strait-lebanon-conflict

स्थायी शांति की पहेली: अमेरिका-ईरान समझौते से जगी उम्मीदें, दरकती नजर आ रही हैं

अमर उजाला Published by: Devesh Tripathi Updated Mon, 22 Jun 2026 06:29 AM IST
विज्ञापन
सार
अमेरिका इस्राइल को लेबनान पर हमले करने से रोक नहीं पा रहा है और दुनिया अनिश्चितता से जूझ रही है, जिससे स्थायी शांति की उम्मीद अभी धूमिल नजर आ रही है। इस जटिल संघर्ष में बड़बोलेपन से ज्यादा कूटनीतिक लचीलापन ही एकमात्र स्थायी समाधान हो सकता है।
loader
west-asia-peace-puzzle-iran-us-israel-hormuz-strait-lebanon-conflict
पश्चिम एशिया संघर्ष - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि एक तरफ दुनिया जहां अमेरिका और ईरान से स्थायी शांति की ओर बढ़ने की उम्मीद कर रही है, वहीं दूसरी तरफ इस्राइल द्वारा लेबनान में जारी हमलों के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है और ट्रंप बार-बार ईरान को चेतावनी दे रहे हैं, जिससे एक बार फिर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है। गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम शांति समझौते से पश्चिम एशिया में तनाव खत्म होने की उम्मीद जगी थी, लेकिन महज चौबीस घंटों में ही यह दरकती नजर आई। समझौते में ईरान ने एक शर्त रखी है कि इस्राइल उन इलाकों से पीछे हटने का वादा करे, जिन पर उसने युद्ध के दौरान दक्षिणी लेबनान में कब्जा किया था। लेबनान में इस्राइली सैन्य गतिविधियों पर रोक लगाने की जिम्मेदारी अमेरिका की है, जबकि समझौते को लेकर इस्राइल में गहरी नाराजगी है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा इस्राइल की कड़ी आलोचना और नसीहत ने दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों में दरार और अलग-अलग रणनीतिक प्राथमिकताओं को उजागर किया है। एक तरफ जहां ईरानी सेना ने दक्षिणी लेबनान पर इस्राइली हमलों के जवाब में फिर से होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का दावा किया है, वहीं दूसरी तरफ वार्ता सफल नहीं होने की स्थिति में ट्रंप द्वारा अमेरिकी टोल टैक्स की चेतावनी ने तेल आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं। इससे एक अलग तरह की होड़ शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं, जिसके लिए काफी हद तक अमेरिका ही जिम्मेदार है। ईरान और इस्राइल में दशकों से तनातनी और संघर्ष जारी रहा है, जिसमें अमेरिका इस बहाने से कूद पड़ा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से पश्चिम एशिया में हथियारों की होड़ शुरू हो सकती है। पर विडंबना यह है कि जिस युद्ध को शुरू करके अमेरिका हथियारों की होड़ को हमेशा के लिए खत्म करना चाहता था, उसी युद्ध ने ईरान को होर्मुज पर नियंत्रण जैसी रणनीतिक ताकत दे दी, जिसके बल पर वह अमेरिका से सौदेबाजी कर रहा है। अगर इसी तरह दुनिया के अन्य देश भी महत्वपूर्ण मार्गों पर टोल वसूलने लगे, तो इससे एक अलग तरह की होड़ शुरू हो जाएगी। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस बेशक कह रहे हैं कि वार्ता में काफी प्रगति हुई है और अमेरिका व ईरान मिलकर पश्चिम एशिया में बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इस बीच ट्रंप ने ईरान को जो चेतावनी दी है, कि वह वहां अपने प्रॉक्सी समूहों को अशांति फैलाने से तुरंत रोके, अन्यथा अमेरिका उस पर फिर से जोरदार हमला करेगा, कुछ और ही संकेत दे रही है। जाहिर है, इस तरह की बयानबाजियों से अनिश्चितता तो बढ़ेगी ही, स्थायी शांति की उम्मीद भी धूमिल नजर आ रही है। इस जटिल त्रिकोणीय संघर्ष में किसी भी पक्ष के लिए बड़बोलेपन से ज्यादा कूटनीतिक लचीलापन ही एकमात्र स्थायी समाधान हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed