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घबराहट नहीं संयम जरूरी: ऊर्जा संकट के बीच अफवाहों की भाषा में बात न करें

अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Fri, 13 Mar 2026 06:49 AM IST
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सार
हमें अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में सोचने की जरूरत है। रिफाइनरियों की क्षमता का विस्तार, नए गैस क्षेत्रों का दोहन और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देकर एलपीजी पर निर्भरता कम की जा सकती है।
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एलपीजी गैस की बुकिंग में आई तेजी - फोटो : ANI

विस्तार

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गहराते संकट और इससे जुड़ी तमाम आशंकाओं के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री का यह कहना कि देश में कच्चे तेल की आपूर्ति की स्थिति सुरक्षित है, आश्वस्त करने वाला है। हालांकि, ऐसे माहौल में अफवाहें फैलना स्वाभाविक है, लेकिन लोगों को यह समझना होगा कि उनकी अनावश्यक घबराहट और काल्पनिक भय कई बार कालाबाजारियों को एक खास तरह की लूट का अवसर देता है, जैसा कोरोना काल में भी देखा गया था। लिहाजा, पेट्रोलियम मंत्री का यह स्पष्ट करना भी सुकूनदेह है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के मार्ग में बाधा के चलते मात्र 20 फीसदी आवाजाही ही प्रभावित हुई है, 40 फीसदी कच्चा तेल कनाडा, नार्वे और रूस जैसे दूसरे देशों से आ रहा है। इस बीच, एलपीजी का उत्पादन भी 28 फीसदी बढ़ा है। सीएनजी की आपूर्ति 100 प्रतिशत जारी है, इसलिए लोगों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष से भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए बातचीत की है। इस बीच ईरान द्वारा भारतीय जहाजों को होर्मुज का रास्ता खोलने की खबरें भी मिली हैं, जिनकी पुष्टि होनी है। सरकार ने निस्संदेह इस अभूतपूर्व वैश्विक संकट से निपटने के लिए त्वरित कदम उठाए हैं, लेकिन इसने कुछ सबक भी दिए हैं। हमें अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में सोचने की जरूरत है। रिफाइनरियों की क्षमता का विस्तार, नए गैस क्षेत्रों का दोहन और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देकर एलपीजी पर निर्भरता कम की जा सकती है। आयात स्रोतों में विविधता लाने से भारत इस संकट का सामना कामयाबी से कर पा रहा है, पर इस दिशा में और कदम बढ़ाने की जरूरत है। वर्तमान संकट से निपटने के लिए राज्य सरकारों से भी जरूरतमंद लाभार्थियों की सूची तैयार करने को कहा गया है, ताकि प्राथमिकता के आधार पर घरेलू व वाणिज्यिक सिलेंडरों की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। जब इस स्तर के वैश्विक संकट सामने हों, तब सरकारें तो अपना काम करती ही हैं, जनता को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहों पर ध्यान देने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे उपजी घबराहट संकट पैदा करती है। सनद रहे, घबराहट में बुकिंग कर हम अपनी ही आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ा देते हैं। सरकार की कोशिशों पर भरोसा और व्यक्तिगत स्तर पर संयम बरतने पर ही हम ऐसी चुनौतियों से मजबूत होकर उभर सकते हैं।
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