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ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर: भारत में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की तैयारी, तेल आयात घटाने की बड़ी पहल
अमर उजाला
Published by: Devesh Tripathi
Updated Fri, 01 May 2026 07:15 AM IST
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने मंगलवार देर रात वाहनों के ईंधन में इथेनॉल मिश्रण की सीमा 85 फीसदी या पूरे सौ फीसदी करने संबंधी जो मसौदा जारी किया है, उससे न केवल देश ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि आयातित तेल पर निर्भरता भी घटेगी।
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सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने मंगलवार देर रात वाहनों के ईंधन में इथेनॉल मिश्रण की सीमा 85 फीसदी या पूरे सौ फीसदी करने संबंधी जो मसौदा जारी किया है, उससे न केवल देश ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि आयातित तेल पर निर्भरता भी घटेगी। गौरतलब है कि यह मसौदा ऐसे समय में आया है, जब वैश्विक ऊर्जा बाजार पश्चिम एशिया में चल रहे लंबे संघर्ष से जूझ रहा है, जिसने पारंपरिक तेल आपूर्ति शृंखला को बहुत हद तक बाधित करने के साथ आयात बिलों को बढ़ा दिया है। असल में, पिछले ही हफ्ते केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने संकेत दिया था कि भारत को जल्द ही 100 फीसदी इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य रखना चाहिए। वास्तव में, भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी तेल आयात करता है, जिससे आर्थिक बोझ और प्रदूषण बढ़ता है। एक अप्रैल से पूरे देश में 20 फीसदी इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (ई-20) को लागू करने के बाद इस मसौदे को जारी करने से यह संकेत मिलता है कि सरकार अब अगले लक्ष्य की ओर देख रही है। पर, जहां ई-20 का उपयोग मौजूदा इंटरनल कम्बशन इंजन में मामूली बदलावों के साथ किया जा सकता है, वहीं ई-85 या ई-100 की ओर बढ़ने के लिए फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल की तरफ एक मजबूत बदलाव की आवश्यकता होगी। वैसे, 20 फीसदी इथेनॉल मिले पेट्रोल का इस्तेमाल करने वाले लोग माइलेज में गिरावट, इंजन की खड़खड़ाहट, धीमा पिकअप, और गाड़ी की सामान्य गति पर बुरा असर पड़ने की शिकायत करते हैं। लिहाजा, 85 या 100 फीसदी इथेनॉल इस्तेमाल करने के लिए वाहनों में तकनीकी बदलाव की जरूरत होगी, जिसके लिए वाहन निर्माता कंपनियों को निवेश बढ़ाना होगा। साथ ही, इथेनॉल हवा से नमी खींचता है, जिससे ईंधन टैंक में जंग लगने और कई पार्ट्स के तेजी से खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। बेशक 85 फीसदी या सौ फीसदी इथेनॉल मॉडल को अपनाकर देश के विशाल कृषि अधिशेष का लाभ उठाया जा सकता है, पर इसके लिए गन्ने की खेती को बढ़ावा देना होगा, जिसके उत्पादन में पानी की खपत ज्यादा होती है। अलबत्ता, यदि ब्राजील की तरह इसे सफलतापूर्वक लागू करना संभव हो पाया, तो किसानों को भी फायदा होगा। वैसे मसौदा जारी करने का मतलब यह नहीं है कि ज्यादा इथेनॉल वाले ईंधन को तुरंत लागू कर दिया जाएगा; इस पर विचार-विमर्श होगा, फिर परीक्षण एवं मूल्यांकन के नियम बनाए जाएंगे। यदि ऐसा संभव होता है, तो इससे न केवल पर्यावरण स्वच्छ होगा, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि आयात बिल भी नियंत्रित होगा।
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