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बीमा, सुधार और चुनौती: प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को सौ फीसदी की अनुमति, अहम नीतिगत मोड़

अमर उजाला Published by: Devesh Tripathi Updated Mon, 04 May 2026 07:20 AM IST
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सार
यह देखते हुए कि बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा पहले से 74 फीसदी थी, और बीमा बाजार इसे लेकर खुद को ढाल भी चुका था, इसे बढ़ाकर 100 फीसदी करने का फैसला भले प्रतीकात्मक हो, फिर भी अर्थव्यवस्था के लिए एक अहम नीतिगत मोड़ तो है ही।
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बीमा क्षेत्र में एफडीआई - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

केंद्र सरकार द्वारा बीमा क्षेत्र में बड़ा सुधार करते हुए सौ फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को अनुमति देने की अधिसूचना जारी करना सैद्धांतिक तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक अहम नीतिगत मोड़ है, लेकिन यह देखते हुए कि बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा पहले से ही 74 फीसदी थी, और बीमा बाजार इसे लेकर खुद को ढाल भी चुका था, ताजा फैसला प्रतीकात्मक ही है। उल्लेखनीय है कि यह बदलाव सबका बीमा, सबकी रक्षा विधेयक, 2025 के तहत किया गया है, जिसे संसद और राष्ट्रपति की मंजूरी पहले ही मिल चुकी थी, बस अब सरकार ने इसे लागू किए जाने का आधिकारिक एलान किया है। गौरतलब है कि यह निवेश स्वचालित मार्ग के तहत होगा, यानी कंपनियों को पहले से सरकारी मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी। सरल शब्दों में कहें, तो अब विदेशी कंपनियां भारतीय बीमा कंपनियों में पूरी हिस्सेदारी रख सकती हैं। हालांकि इसके लिए भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) की स्वीकृति और जांच जरूरी होगी। जाहिर है कि यह बदलाव केवल पूंजी जुटाने का उपाय नहीं, बल्कि बीमा क्षेत्र की संरचना, प्रतिस्पर्धा और पहुंच को बदलने वाला निर्णय है। हालांकि भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को इससे अलग रखते हुए उसमें विदेशी निवेश की सीमा 20 फीसदी ही बनाए रखना बताता है कि सरकार उदारीकरण और रणनीतिक नियंत्रण के बीच संतुलन साधना चाहती है। साथ ही, सरकार ने यह शर्त भी जोड़ी है कि विदेशी निवेश वाली बीमा कंपनियों में कम से कम एक शीर्ष पद पर भारतीय नागरिक का होना जरूरी होगा। उल्लेखनीय है कि भारत वैश्विक स्तर पर 10वां सबसे बड़ा बीमा बाजार है और उभरते बाजारों में यह दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। इसकी तेज वार्षिक विकास दर को देखते हुए यह उम्मीद जताई जा रही है कि 2033 तक यह जर्मनी व कनाडा जैसे देशों को पीछे छोड़ते हुए विश्व का छठा सबसे बड़ा बाजार बन सकता है। चूंकि बीमा बाजार में निजी कंपनियों की आमद बढ़ती जा रही है, ऐसे में, शत-प्रतिशत विदेशी निवेश से बीमा बाजार में ज्यादा पैसा आने की उम्मीद है। बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से प्रीमियम कम लगेगा, ग्राहकों को सुविधाएं मिलेंगी और बेहतर बीमा उत्पाद भी मिलेंगे। यही नहीं, इससे बीमा क्षेत्र का विकास तो होगा ही, वैश्विक स्तर पर इस क्षेत्र में दिख रहे मापदंड और नवाचार भारतीय बाजारों में भी अपनाए जा सकेंगे। हालांकि यह सुनिश्चित करना होगा कि इसके फायदे पारदर्शी तरीके से आम आदमी तक पहुंच सकें।
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