Hindi News
›
Columns
›
Opinion
›
india-new-zealand-strategic-partnership-roadmap-2030-indo-pacific-relations
{"_id":"6a5436fe7f7dd2dada074ae6","slug":"india-new-zealand-strategic-partnership-roadmap-2030-indo-pacific-relations-2026-07-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"भरोसे का साथ: भारत-न्यूजीलैंड की रणनीतिक साझेदारी, हिंद-प्रशांत में नए समीकरणों का मजबूत संकेत","category":{"title":"Opinion","title_hn":"विचार","slug":"opinion"}}
भरोसे का साथ: भारत-न्यूजीलैंड की रणनीतिक साझेदारी, हिंद-प्रशांत में नए समीकरणों का मजबूत संकेत
वैश्विक भू-राजनीतिक संकटों के दौर में चुनौतियां बेशक कम नहीं हैं, लेकिन अगर भारत व न्यूजीलैंड राजनीतिक इच्छाशक्ति से अपने संकल्पों को जमीन पर उतारने में सफल रहते हैं, तो आने वाला दशक इस संबंध को हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सबसे सशक्त और भरोसेमंद साझेदारियों में बदल सकता है।
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
प्रधानमंत्री मोदी की हालिया न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाना और रोडमैप-2030 जारी करने का निर्णय दो देशों के बीच द्विपक्षीय रिश्तों का विस्तार भर नहीं है, बल्कि यह तेजी से बदल रहे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नई भू-राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताओं की स्वाभाविक प्रतिक्रिया भी है। वर्तमान समय में, जब वैश्विक शक्ति संतुलन पुनर्गठित हो रहा है और समुद्री मार्ग पहले से कहीं अधिक अहम हो गए हैं, तब भारत और न्यूजीलैंड का एक-दूसरे के और निकट आना संकेत है कि दोनों देश साझा हितों को दीर्घकालिक दृष्टि से देख रहे हैं। उल्लेखनीय है कि भारत और न्यूजीलैंड के संबंध सौहार्दपूर्ण तो हमेशा से रहे हैं, लेकिन उनमें वह रणनीतिक गहराई नहीं थी, जो दोनों देशों की वास्तविक क्षमता के अनुरूप हो। आज भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जबकि न्यूजीलैंड हिंद-प्रशांत क्षेत्र का एक स्थिर, भरोसेमंद और लोकतांत्रिक साझेदार है। दोनों ही देश स्वतंत्र, खुले और नियमाधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के पक्षधर हैं और पिछले 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला न्यूजीलैंड दौरा इसी सोच को अधिक व्यवस्थित नीतिगत ढांचे में बदलने को लक्षित माना जा सकता है। रोडमैप-2030 की खासियत यह है कि यह सिर्फ राजनीतिक घोषणाओं तक सीमित न होकर सहयोग के कई व्यावहारिक क्षेत्रों को भी शामिल करता है। गौरतलब है कि न्यूजीलैंड और भारत ने नौ महीनों के रिकॉर्ड समय में मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत के लिए यह इसलिए अहम है, क्योंकि इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक और विकसित बाजार खुलेगा और निर्यातकों को पारंपरिक साझेदारों के अलावा व्यापार का एक नया गंतव्य भी मिलेगा। पिछले एक दशक में भारत ने एक्ट ईस्ट और इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव जैसे कदमों के जरिये हिंद प्रशांत क्षेत्र में अपनी सक्रिय मौजूदगी दर्ज कराई है। न्यूजीलैंड के साथ रणनीतिक साझेदारी इसी व्यापक नीति का स्वाभाविक विस्तार है। भारत आज बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था में ऐसे विश्वसनीय साझेदारों का नेटवर्क विकसित कर रहा है, जिनके साथ उसके मूल्य और हित, दोनों मेल खाते हों। दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग उस नई कूटनीतिक सोच का प्रतीक है, जिसमें लोकतांत्रिक मूल्य, आर्थिक परस्परता, तकनीकी सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश दिखती है। वैश्विक भू-राजनीतिक संकटों के इस दौर में चुनौतियां बेशक कम नहीं हैं, लेकिन अगर दोनों देश राजनीतिक इच्छाशक्ति बनाए रखते हुए इन संकल्पों को जमीन पर उतारने में सफल रहते हैं, तो आने वाला दशक इस संबंध को हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सबसे सशक्त और भरोसेमंद साझेदारियों में बदल सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।