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आग लगने की घटनाओं का पैटर्न समझें: मालवीय नगर अग्निकांड का बड़ा सबक

patralekha chatterjee पत्रलेखा चटर्जी
Updated Tue, 09 Jun 2026 06:49 AM IST
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सार

देश में लगातार आग लगने की घटनाएं एक गहरे पैटर्न को उजागर करती हैं, जिसे पहचानना और उसका तोड़ निकालना जरूरी है।

malviya nagar fire tragedy impact on india medical tourism corruption system failure
मालवीय नगर अग्निकांड - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

हममें से ज्यादातर लोग जब किसी होटल या अस्पताल में जाते हैं, तो अग्नि सुरक्षा के बारे में नहीं पूछते हैं। लेकिन तीन जून, 2026 को दिल्ली के मालवीय नगर में ‘फ्लोरिश स्टे बी एंड बी’ में लगी आग ने हमें इस बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया है। यह कोई हादसा नहीं था। यह व्यवस्था की लापरवाही का पहले से तय नतीजा था। साकेत में मैक्स हॉस्पिटल के ठीक सामने, हौज रानी की एक तंग गली में, सिर्फ छह कमरों की लाइसेंस वाली एक इमारत में 25-26 कमरों वाला व्यावसायिक होटल चल रहा था।


इसमें आग से सुरक्षा का कोई अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं था। आने-जाने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता था, खिड़कियां सील थीं, आपातकालीन रास्ते बंद थे और कोई अलार्म या स्प्रिंकलर काम नहीं कर रहा था। इस हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई, जिनमें नौ अफ्रीकी थे, और बाकी अफगानिस्तान, बांग्लादेश, तुर्कमेनिस्तान, किर्गिजस्तान, उज्बेकिस्तान, इराक और भारत से थे। इस हादसे में एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए। यह कोई अकेली घटना नहीं थी। इसके कुछ ही दिनों बाद, नोएडा की एक ऊंची इमारत में भी आग लग गई। इसी दौरान चार जून को, बिहार के मुजफ्फरपुर में प्रसाद अस्पताल के आईसीयू में संभवतः शॉर्ट सर्किट की वजह से भीषण आग लग गई, जिसमें धुएं में दम घुटने से कम से कम पांच मरीजों की मौत हो गई।
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भारत में हर साल होटलों, अस्पतालों, बाजारों और ऊंची इमारतों में आग लगने से सैकड़ों लोगों की मौत होती है। बार-बार होने वाली जांच में एक ही पैटर्न सामने आता है: गैर-कानूनी विस्तार, जरूरी मंजूरी न होना, मिली-भगत से होने वाली जांच और ऐसा नियम-पालन, जो सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहता है। नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक, मालवीय नगर के होटल को सामान्य बिस्तर एवं सुबह जलपान की व्यवस्था वाले अतिथि गृह की मंजूरी दी गई थी, जो एक जानलेवा जगह बन गई। यहां आस-पास के अस्पतालों में सस्ता इलाज कराने आने वाले मेडिकल टूरिस्ट ठहरते थे। इसके मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन असली दोषी (वे अधिकारी, जिन्होंने वर्षों तक इस पर ध्यान नहीं दिया) बेफिक्र हैं और उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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पीड़ितों में कई विदेशी भी थे, जो इलाज के लिए अफ्रीका से आए थे और उनके साथ उनके रिश्तेदार भी थे। फर्टिलिटी का इलाज कराने आए एक अफ्रीकी जोड़े को बाथरूम में एक-दूसरे को गले लगाए हुए पाया गया; धुएं से बचने के लिए यही उनकी आखिरी पनाहगाह थी। इन मरीजों ने भारत को इसलिए चुना था, क्योंकि भारत किफायती और बेहतरीन गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सुविधा के लिए जाना जाता है। इस हादसे को रोका जा सकता था। इस त्रासदी के अंतरराष्ट्रीय पहलू ने भारत की शर्मिंदगी को बढ़ा दिया है। एक नाइजीरियाई अखबार ने कहा, 'भारत में इमारतों में आग लगना बार-बार होने वाली सुरक्षा चूक है, जो अक्सर बचाव के अपर्याप्त उपायों और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन से जुड़ी होती है।' इस घटना का असर अफ्रीका के उन हिस्सों में जरूर हुआ है, जहां से लोग इलाज के लिए भारत आते हैं। भारत को मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में जो बढ़त हासिल है, उसे ऐसी मामूली लापरवाही से नुकसान पहुंच रहा है।
 
मेडिकल टूरिज्म भारत की अर्थव्यवस्था और 'सॉफ्ट पावर' में अरबों का योगदान देता है। लेकिन जब ऐसी खबर छपे कि मरीजों की मौत बीमारी से नहीं, बल्कि एक गैर-कानूनी होटल में धुएं की वजह से हुई, तो लोगों का भरोसा कम हो जाता है। आसानी से रोकी जा सकने वाली आग, वर्षों की मेहनत और प्रचार पर पानी फेर सकती है। इस भयावह मंजर के बीच भी इन्सानियत की मिसाल देखने को मिली। मालवीय नगर के स्थानीय लोग असली नायक बनकर सामने आए। गद्दे की दुकान के मालिकों ने ऊपर से कूद रहे बेबस मेहमानों के लिए सड़क पर 20-25 गद्दे बिछा दिए, जिससे कई लोगों की जान बच गई। यह उस संस्थागत विफलता के बिल्कुल उलट है, जिसकी वजह से यह त्रासदी हुई। पूरे भारत में लगातार लग रही आग की घटनाएं एक गहरी समस्या को उजागर करती हैं: नगर निकायों की कमजोर निगरानी व लाइसेंसिंग में भ्रष्टाचार। नियमों को लागू करने का काम अनियमित है और रिश्वतखोरी आम बात है। इसे ठीक करने के लिए सिर्फ जांच से काम नहीं चलेगा। सभी व्यावसायिक आवासों के लिए अनिवार्य और पारदर्शी थर्ड-पार्टी फायर ऑडिट की जरूरत है। जब तक विनियामक सुरक्षा को सबसे जरूरी नहीं मानते, तब तक ऐसी आग लगती रहेगी, जिसमें भारतीयों और विदेशियों की और भी बेगुनाह जानें जाएंगी और भारत की छवि खराब होगी।
 
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