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न्याय के इलाके में उलझनें बेशुमार: जेन-जी का भरोसा कायम रहे, इसके लिए न्यायिक तंत्र में जमीनी सुधारों की जरूरत
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न्यायपालिका (प्रतीकात्मक)
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अमर उजाला
विस्तार
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को भी धन्यवाद दिया है। सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा है कि यह ट्रेलर था, पिक्चर अभी बाकी है। एथेनॉल मामले में डिजिटल पार्टी के गठन के साथ जजों के हवाले से कॉकरोच की तरह केकड़ा शब्द को वायरल किया जा रहा है। जजों की मौखिक टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश करने के बढ़ते चलन के बाद सीधे प्रसारण वाले वीडियो की क्लिपिंग के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंध लगा दिया है। इससे पहले खुली अदालत में जजों के साथ अभद्रता और मुख्य न्यायाधीश को गाली देने के मामले के बाद व्यक्तिगत सुनवाई के मामलों के सीधे प्रसारण पर रोक लगाई गई थी।
पेपर लीक आरोपियों का फास्ट ट्रैक कोर्ट में ट्रायल और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मुकदमों की वापसी जैसे सरकारी आश्वासनों की सफलता अदालती आदेशों पर निर्भर रहेगी। नीट से जुड़े पुराने मामलों की सुनवाई के दौरान जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा की पीठ ने कहा कि पेपर लीक रोकने के कदमों की सुप्रीम कोर्ट निगरानी करेगा। जजों के अनुसार, प्रश्न-पत्रों को पहुंचाने में वायु सेना की मदद अस्थायी उपाय था और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) में तदर्थवाद खत्म करके संस्थागत सुधारों को लागू करना होगा। लेकिन अदालतों में तदर्थ सुनवाई के बढ़ते चलन और संस्थागत सुधारों से परहेज से युवाओं का गुस्सा बढ़ रहा है। इससे जुड़े चार पहलुओं को समझना जरूरी है।
पहला, राज्यों के बजाय केंद्रीय स्तर पर नीट परीक्षा के आयोजन के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दी थी। 2024 में पेपर लीक मामले के बाद राधाकृष्णन समिति बनी थी, जिसकी अनेक सिफारिशों पर अभी तक अमल नहीं हुआ। परीक्षाओं के आयोजन और प्रश्नपत्रों की छपाई जैसे गोपनीय मामलों को निजी वेंडरों को आउटसोर्स किया जा रहा है। पिछले नौ वर्षों में एनटीए 270 परीक्षाएं आयोजित करा चुका है, लेकिन वहां कुल स्वीकृत 39 स्थायी पदों में 15 खाली हैं, 73 लोग संविदा पर हैं और 124 कर्मचारी आउटसोर्सिंग से हैं। इनमें से 47 लोगों को सरकार ने हटाया है, जिसे बर्खास्तगी का नाम दिया जा रहा है। नंदन नीलेकणि को अब शिक्षा का आधार सुधारने की जिम्मेदारी दी गई है। यूपीए काल में तदर्थ तरीके से शुरू हुए आधार के लिए कानून में विलंब, सत्यापन नहीं होने और निजी एजेंसियों से क्रियान्वयन के चलते तदर्थवाद और फर्जीवाड़ा बढ़ा। उसी तरह से एनटीए सिर्फ रजिस्टर्ड सोसाइटी है, जिसे वैधानिक दर्जा नहीं मिलने से नकल माफिया बढ़ रहा है। एनटीए को वैधानिक दर्जा मिलने से अधिकारियों की जिम्मेदारी और जवाबदेही बढ़ेगी। आउटसोर्सिंग खत्म करने और कंप्यूटर बेस्ड टेस्टिंग को सफल बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट को सख्त आदेश पारित करना चाहिए।
दूसरा, नए आपराधिक कानूनों में संगठित अपराधियों के खिलाफ सख्त दंड और तीन साल के भीतर न्याय देने का प्रावधान पहले से हैं। 2024 में नीट पेपर लीक के बाद केंद्र सरकार ने नया कानून बनाया था, जिसे सख्त बनाते हुए 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये के जुर्माने के प्रावधान किए जा रहे हैं। यह समझना जरूरी है कि ये प्रावधान पुराने मामलों में लागू नहीं होंगे। इस केंद्रीय कानून और फास्ट ट्रैक कोर्ट के सिस्टम को सफल बनाने के लिए राज्यों की सहमति और सहयोग जरूरी है। लोकसभा में दिए गए सरकारी जवाब के अनुसार, 775 फास्ट ट्रैक अदालतों में 2.45 लाख से ज्यादा मामले लंबित हैं। जिला अदालतों में लंबित करोड़ों मामलों की वजह से लोगों का गुस्सा और परेशानी बढ़ रही है। सुप्रीम कोर्ट में अटके विवाद की वजह से नीट के सुपर स्पेशियल्टी की काउंसलिंग शुरू नहीं हो पा रही। राष्ट्रीय शिक्षा नीति और त्रिभाषा फार्मूलों पर भी सुप्रीम कोर्ट में बहस चल रही है। सोशल मीडिया सरगर्मी के आधार पर पीआईएल सुनवाई करने के बजाय महत्वपूर्ण मामलों का निष्पादन जरूरी है, जिससे लोगों को न्याय मिल सके।
तीसरा, सरकार ने अध्यादेश जारी करके सुप्रीम कोर्ट में चार नए जजों की नियुक्ति पहले ही कर दी और अब संसद से कानून पारित हो रहा है। जिला जजों की रिटायरमेंट उम्र और वेतन भत्तों को बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अनेक आदेश दिए हैं। लेकिन हाईकोर्ट और जिला अदालतों में जजों के एक तिहाई रिक्त पदों पर भर्ती के लिए कोई अभियान नहीं चल रहा। एनसीईआरटी में न्यायिक सुधारों से जुड़े अध्याय को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बदल दिया गया, लेकिन जमीनी हालात नहीं बदले। जांच समितियों की रिपोर्ट के बावजूद दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज यशवंत वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। मणिपुर हाईकोर्ट के जज की टिप्पणी के बाद राज्य में हिंसा भड़की थी। अब तीन साल बाद जांच और ट्रायल की धीमी रफ्तार पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर करते हुए विशेष अदालतों के गठन का सुझाव दिया है।
चौथा, राष्ट्रगीत वंदे मातरम के अपमान के दोषी पाए जाने पर तीन साल की जेल और जुर्माने के लिए संसद में विधेयक पेश हुआ है। पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने प्रदर्शनकारियों से हर्जाना वसूलने का सख्त कानून बनाया है। लेकिन जजों और प्रधानमंत्री को गाली देने और रील वायरल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही। बिहार, पश्चिम बंगाल और दूसरे राज्यों में पुलिस ने आंदोलनकारियों के ऊपर अनेक मुकदमे दर्ज किए हैं। जंतर-मंतर में हिंसा, सरकारी संपत्तियों को क्षति, अंतराराष्ट्रीय साजिश और दंगा भड़काने जैसे मामलों में दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए सरकार और अदालत की अनुमति यदि मिलती है, तो उसे पूरे देश में लागू करना चाहिए। सांविधानिक समानता के आधार पर अन्य राज्यों में सोशल मीडिया से जुड़े सभी आपराधिक मामलों को रद्द होना चाहिए। पिछले 12 वर्षों में 19 राज्यों में 116 पेपर लीक से 7.5 करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं। नकल, कोचिंग और सरकारी नौकरियों में गड़बड़ी के लिए केंद्र सरकार के साथ राज्यों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि विद्यार्थियों का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझे और वे पढ़ाई पर ध्यान दें, इसलिए वह त्यागपत्र दे रहे हैं।
सोनम वांगचुक ने कहा है कि सिर्फ एक इस्तीफे से राष्ट्र नहीं बनता। सुप्रीम कोर्ट के जज भुयान ने अभिव्यक्ति की आजादी और कानून के शासन को लागू करने पर जोर दिया है। संविधान और लोकतंत्र में जेन-जी के भरोसे को बनाए रखने के लिए न्यायिक तंत्र में जमीनी स्तर पर सुधार, बदलाव और जवाबदेही की जरूरत है।