फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Glasgow CWG Mirabai victory significance Winning third gold historic success must not remain mere exceptions

मीरा की जीत के मायने: लगातार तीसरा स्वर्ण जीतना ऐतिहासिक, ऐसी सफलताएं सिर्फ अपवाद बनकर न रह जाएं

Tue, 28 Jul 2026 08:05 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला, नई दिल्ली।
अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 28 Jul 2026 08:05 AM IST
विज्ञापन
सार
मीराबाई चानू का राष्ट्रमंडल खेलों में लगातार तीसरा स्वर्ण जीतना ऐतिहासिक है, पर इसका महत्व पदक तालिका में इजाफे से कहीं अधिक है। खेल का मैदान आज भी लड़कियों के लिए समान अवसरों वाला नहीं बन पाया है। ऐसे में जरूरी है कि ऐसी सफलताएं सिर्फ अपवाद बनकर न रह जाएं।
loader
Glasgow CWG Mirabai victory significance Winning third gold historic success must not remain mere exceptions
पदक जीतने के बाद भावुक मीराबाई चानू (फाइल) - फोटो : IANS

विस्तार

मणिपुर की स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने स्कॉटलैंड में आयोजित हो रहे राष्ट्रमंडल खेलों में महिलाओं के 48 किलोग्राम में स्वर्ण पदक जीतकर अपने शानदार कॅरिअर में एक और उपलब्धि तो जोड़ी है, लेकिन इस जीत का महत्व पदक तालिका में एक स्वर्ण बढ़ जाने से कहीं अधिक है।



वर्षों से भारतीय खेलों की पहचान एकाध अपवाद को छोड़ दें, तो मुख्यत: पुरुष खिलाड़ियों तक ही सीमित रही है, लेकिन पिछले एक-डेढ़ दशक में यह धारणा तेजी से बदली है। हाल ही में लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान पर महिला क्रिकेटरों की ऐतिहासिक उपलब्धि और अब मीराबाई चानू का राष्ट्रमंडल खेलों में लगातार तीसरा स्वर्ण पदक जीतना उसी परिवर्तन की एक और सशक्त अभिव्यक्ति हैं।


भारोत्तोलन जैसे खेलों में, जहां शारीरिक ताकत अहम होती है, महिलाओं का प्रवेश और वहां वैश्विक स्तर पर शीर्ष तक पहुंचना अपने आप में एक बड़े बदलाव को दर्शाता है और मणिपुर के एक साधारण परिवार से निकलकर विश्वमंच तक पहुंचने वाली मीराबाई इसका ही सशक्त प्रतीक बनकर उभरी हैं। रियो ओलंपिक में निराशा झेलने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। विश्व चैंपियन बनीं, टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीता और अब राष्ट्रमंडल खेलों में चमकदार प्रदर्शन से उन्होंने सिद्ध किया है कि महान खिलाड़ी सफलता से अधिक अपनी असफलताओं से सीखते हैं।

उनकी उपलब्धियां देश की नई खेल संस्कृति को दर्शाती हैं, जहां प्रतिभा अवसर मिलने पर किसी भी सामाजिक या आर्थिक बाधा को पार कर सकती है। हालांकि यह स्वीकार करना होगा कि मीराबाई चानू जैसी सफलता के पीछे असाधारण संघर्ष छिपा होता है। देश के अधिकांश हिस्सों में लड़कियों के लिए खेल का मैदान आज भी समान अवसरों वाला नहीं बन पाया है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाओं का अभाव, प्रशिक्षित कोचों की कमी, पोषण संबंधी चुनौतियां, आर्थिक तंगी और सामाजिक पूर्वाग्रह अनेक प्रतिभाओं को शुरुआती दौर में ही रोक देते हैं।

यही वजह है कि जो खिलाड़ी इन तमाम बाधाओं को पार करके विश्व स्तर पर पहुंचते हैं, उनकी उपलब्धियां केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक बन जाती हैं। सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में खेलो इंडिया, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम जैसी योजनाओं के जरिये कई सकारात्मक प्रयास किए हैं, जिनके नतीजे अब धीरे-धीरे दिख भी रहे हैं। इसके बावजूद, खेलों का वास्तविक विस्तार तभी संभव होगा, जब इन योजनाओं का लाभ महानगरों से लेकर गांवों, छोटे कस्बों और सुदूर क्षेत्रों तक समान रूप से पहुंचे।

उम्मीद की जानी चाहिए कि मीराबाई चानू की उपलब्धि आने वाले समय में देश की लाखों बेटियों को आसमान छूने का हौसला देगी। हालांकि नीति नियंताओं और समाज को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी सफलताएं सिर्फ अपवाद बनकर न रह जाएं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed