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परीक्षा पर प्रश्न: कटघरे में पूरे तंत्र की विश्वसनीयता, भरोसा लौटाने के लिए ठोस व प्रभावी कदम उठाना जरूरी

अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: Jyoti Bhaskar Updated Wed, 13 May 2026 04:46 AM IST
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सार
प्रश्नपत्र लीक होने की आशंकाओं के मद्देनजर नीट-यूजी परीक्षा का रद्द होना पूरे परीक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़े करता है। पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामले आते रहे हैं, इसलिए ठोस व प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है, ताकि युवाओं का भरोसा लौटाया जा सके।
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NEET UG CBI Probe row Credibility crisis Entire System Under Scrutiny Effective measure vital to Restore Trust
नीट यूजी 2026 परीक्षा रद्द। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) ने प्रश्नपत्र लीक होने की आशंकाओं के बीच तीन मई को आयोजित नीट- यूजी परीक्षा को जिस तरह से रद्द किया है, वह वाकई एक गंभीर मामला है, जो पूरे परीक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।



गौरतलब है कि नीट-यूजी देश की सबसे प्रतिष्ठित और महत्वपूर्ण परीक्षाओं में से एक है, जिसमें हर वर्ष लाखों छात्र-छात्राएं चिकित्सा के क्षेत्र में प्रवेश पाने का सपना लिए शामिल होते हैं। अभिभावकों की पूंजी और उम्मीदों का भी इसमें निवेश होता है। इस बार भी देश भर के 22 लाख से अधिक छात्र इस परीक्षा में शामिल हुए थे, जो फिलहाल ठगा महसूस कर रहे हैं।


यह कोई पहली बार नहीं है, जब इस तरह का मामला सामने आया हो। 2024 में भी नीट-यूजी परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने की वजह से विवादों के घेरे में आ गई थी। तब, सर्वोच्च न्यायालय ने पूरी परीक्षा को निरस्त करने से तो इन्कार कर दिया था, लेकिन कुछ केंद्रों पर एक हजार से अधिक बच्चों की दोबारा परीक्षा हुई थी।

बात सिर्फ नीट की नहीं है, पिछले कुछ वर्षों में रेलवे, शिक्षक व पुलिस भर्ती और नेट जैसी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की भी खबरें आती रही हैं। कई संगठित गिरोहों का पता चला, कई बार परीक्षा केंद्रों की तरफ से बेईमानी, तो कई बार सर्वर से छेड़छाड़ के मामले भी सामने आए। ऐसी स्थितियां न आएं, इसलिए सरकार ने दो वर्ष पहले सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 पारित किया था, जिसमें दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने का प्रावधान भी था।

ऐसे सख्त कानून के बावजूद अगर पेपर लीक को रोका नहीं जा पा रहा, तो यह स्थिति नीति नियंताओं के लिए गंभीर विश्लेषण की मांग करती है। ताजा नीट-यूजी परीक्षा मामले में राजस्थान और दूसरे राज्यों से पेपर लीक संबंधी सूचना मिलते ही एनटीए ने परीक्षा रद्द करने की घोषणा कर दी और केंद्र ने भी अविलंब इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी है। लेकिन देखा गया है कि पेपर लीक मामलों में शुरुआती सख्ती के बावजूद बाद में कार्रवाई धीमी पड़ जाती है, जिससे मूल समस्या जस की तस बनी रहती है।

यह भी विचारणीय है कि अगर पेपर लीक का समानांतर उद्योग इतना मजबूत हो गया है, तो इसकी जड़ में केवल लालच नहीं, बल्कि वह अत्यधिक प्रतिस्पर्धी व्यवस्था भी है, जिसमें सीमित सीटों के लिए करोड़ों युवा संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में इस समस्या को व्यापक संदर्भों में देखने की भी जरूरत है। बेशक एनटीए जल्द ही परीक्षा की नई तारीख का एलान करेगी, लेकिन युवाओं का भरोसा लौटाने के लिए उसे कुछ ठोस कदम तो उठाने ही होंगे, ताकि दोबारा इस तरह के मामले सामने न आएं।

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