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मां है, कि मानती ही नहीं: बुजुर्गों को प्यार-दुलार के साथ बेहतर देखभाल करना फायदेमंद
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सार
मैं अपनी मां की यह बात सुन-सुनकर थक गई हूं कि ‘मुझे अच्छा नहीं लग रहा।’ लेकिन वह ठीक-ठीक नहीं बता सकती कि ऐसा क्यों है? मैं क्या करूं? अपनी अस्सी वर्षीय मां की शिकायतों से परेशान मिसेज शर्मा को मनोवैज्ञानिक नीलकंठ ने कुछ यों सुझाव दिया।
opinion
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जब कोई हमेशा यही कहता रहे कि उसे बुरा लग रहा है, तो यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है कि उसे सच में कब बुरा लग रहा है। मुझे लगता है कि कभी-कभी बुजुर्ग लोग बढ़ती उम्र की परेशानी या दर्द को मौत का संकेत मान लेते हैं। वह हमेशा लक्षणों के बारे में ही सोचते रहते हैं, इसलिए उम्र का बढ़ना उनके लिए मुश्किल होता है, क्योंकि इसके साथ उन्हें काफी चिंता भी होने लगती है।
कभी-कभी बुजुर्गों को ऐसा महसूस होता है कि कोई उनकी देखभाल नहीं कर रहा या उनकी उपेक्षा हो रही है। ऐसे में, लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए अथवा ज्यादा तवज्जो पाने के लिए वे इस तरह की शिकायतें करते रहते हैं। इसलिए मेरा अंदाजा है कि उन्हें बहुत सारा प्यार-दुलार देने और उनकी बेहतर देखभाल करने से फायदा होगा।
मेरी एक रिश्तेदार के साथ भी ऐसा ही होता है, जो बोल नहीं सकतीं। वह अपने चेहरे के चारों ओर एक गोला बनाती हैं, जिससे पता चलता है कि उन्हेंे चक्कर आ रहे हैं। मैं उन्हें गले लगाता हूं, और उनसे प्यार भरी बातें करता हूं। यह सुनकर वह मुस्कुरा देती हैं और सकारात्मक रवैये के साथ आगे बढ़ जाती हैं। उनके चक्कर आने का इशारा कोई शिकायत नहीं, बल्कि वह बस यह बताना चाहती हैं कि उनकी तबीयत नासाज है। अगर आपको पक्का यकीन है कि आपकी मां को ‘मुझे अच्छा नहीं लग रहा’ जैसी अस्पष्ट शिकायत के अलावा कोई और दिक्कत नहीं है, तो उनके साथ हमदर्दी जताने की कोशिश करें। उन्हें बताएं कि उनकी हालत देखकर आपको दुख हो रहा है और आप उनके लिए कुछ करना चाहती हैं।
उनसे पूछें कि कहीं आपको दर्द तो नहीं हो रहा है या आप उनके लिए क्या कर सकती हैं। इससे उन्हें लगेगा कि उनकी बात सुनी गई और उनकी शिकायत पर ध्यान दिया गया। आप उन्हें सुझाव दे सकती हैं कि वह अगर कुछ खा लें, तो शायद उन्हें बेहतर महसूस हो और फिर आप उन्हें कहीं बाहर घूमने का सुझाव देकर उनका ध्यान भटकाने की कोशिश करें। हो सकता है कि घर में बंद रहने के कारण भी उन्हें घुटन महसूस होती हो और उनका ध्यान सिर्फ अपने दर्द और तकलीफों पर, या असली या मनगढ़ंत बीमारियों पर ही टिका रहता हो।
अवसाद से पीड़ित लोगों के पूरे शरीर में दर्द और तकलीफ हो सकती है। बाजार में कुछ ऐसी दवाएं उपलब्ध हैं, जो इसमें उनकी मदद कर सकती हैं। आप किसी योग्य चिकित्सक की सलाह लेकर पता करें कि क्या आपकी मां को ऐसी कोई दवा दी जा सकती है, जो उनके दर्द और तकलीफ को दूर कर सके। कोई ऐसी एंटी-डिप्रेसेंट दवा, जो मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द को कम करे।
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कभी-कभी बुजुर्गों को ऐसा महसूस होता है कि कोई उनकी देखभाल नहीं कर रहा या उनकी उपेक्षा हो रही है। ऐसे में, लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए अथवा ज्यादा तवज्जो पाने के लिए वे इस तरह की शिकायतें करते रहते हैं। इसलिए मेरा अंदाजा है कि उन्हें बहुत सारा प्यार-दुलार देने और उनकी बेहतर देखभाल करने से फायदा होगा।
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मेरी एक रिश्तेदार के साथ भी ऐसा ही होता है, जो बोल नहीं सकतीं। वह अपने चेहरे के चारों ओर एक गोला बनाती हैं, जिससे पता चलता है कि उन्हेंे चक्कर आ रहे हैं। मैं उन्हें गले लगाता हूं, और उनसे प्यार भरी बातें करता हूं। यह सुनकर वह मुस्कुरा देती हैं और सकारात्मक रवैये के साथ आगे बढ़ जाती हैं। उनके चक्कर आने का इशारा कोई शिकायत नहीं, बल्कि वह बस यह बताना चाहती हैं कि उनकी तबीयत नासाज है। अगर आपको पक्का यकीन है कि आपकी मां को ‘मुझे अच्छा नहीं लग रहा’ जैसी अस्पष्ट शिकायत के अलावा कोई और दिक्कत नहीं है, तो उनके साथ हमदर्दी जताने की कोशिश करें। उन्हें बताएं कि उनकी हालत देखकर आपको दुख हो रहा है और आप उनके लिए कुछ करना चाहती हैं।
उनसे पूछें कि कहीं आपको दर्द तो नहीं हो रहा है या आप उनके लिए क्या कर सकती हैं। इससे उन्हें लगेगा कि उनकी बात सुनी गई और उनकी शिकायत पर ध्यान दिया गया। आप उन्हें सुझाव दे सकती हैं कि वह अगर कुछ खा लें, तो शायद उन्हें बेहतर महसूस हो और फिर आप उन्हें कहीं बाहर घूमने का सुझाव देकर उनका ध्यान भटकाने की कोशिश करें। हो सकता है कि घर में बंद रहने के कारण भी उन्हें घुटन महसूस होती हो और उनका ध्यान सिर्फ अपने दर्द और तकलीफों पर, या असली या मनगढ़ंत बीमारियों पर ही टिका रहता हो।
अवसाद से पीड़ित लोगों के पूरे शरीर में दर्द और तकलीफ हो सकती है। बाजार में कुछ ऐसी दवाएं उपलब्ध हैं, जो इसमें उनकी मदद कर सकती हैं। आप किसी योग्य चिकित्सक की सलाह लेकर पता करें कि क्या आपकी मां को ऐसी कोई दवा दी जा सकती है, जो उनके दर्द और तकलीफ को दूर कर सके। कोई ऐसी एंटी-डिप्रेसेंट दवा, जो मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द को कम करे।