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Amar Ujala Samwad: क्यों क्रिकेट में करियर नहीं बनाना चाहते थे सिद्धू, किसके कहने पर बदला मन? खुद किया खुलासा
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Mon, 18 May 2026 04:58 PM IST
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सार
भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू लखनऊ में आयोजित अमर उजाला संवाद के मंच पर आए। उन्होंने इस दौरान कई दिलचस्प किस्से सुनाए। इस दौरान सिद्धू ने बताया कि वह क्रिकेटर नहीं, बल्कि फौजी बनना चाहते थे।
अमर उजाला संवाद में सिद्धू
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
भारतीय टीम के पूर्व खिलाड़ी नवजोत सिंह सिद्धू अमर उजाला संवाद के मंच पर आए। अमर उजाला समूह उत्तर प्रदेश की राजधानी में संवाद उत्तर प्रदेश 2026 का आयोजन कर रहा है। अमर उजाला संवाद के मंच पर सिद्धू भी पहुंचे जहां उन्होंने क्रिकेट करियर से लेकर सफलता के मंत्र दिए। इस दौरान सिद्धू ने खुलासा करते हुए बताया कि वह क्रिकेटर नहीं, बल्कि फौजी बनना चाहते थे।
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कैसे फौजी की जगह बन गए क्रिकेटर?
सिद्धू ने कहा, 1987 टेस्ट मैच में मेरा आगमन हुआ और जितनी जल्दी आगमन हुआ, उतनी जल्दी बाहर। एक दिन बाथरुम से बाहर निकला तौलिया पहना हुआ। बाबा की आंख में आंसू थे। मैं फौज में जाना चाहता था, लेकिन उनकी वजह से मैं जा नहीं पाया। उन्होंने रोक लिया। उन्होंने कहा कि बेटा तेरे बिना नहीं जी पाऊंगा। उनकी तमन्ना थी कि भारत के लिए क्रिकेट खेल। कम से कम 20 साल, तो उनके सपने के लिए ही जिता था।
उन्होंने कहा, जब उनकी आंखों में पहली बार जिंदगी में आंसू देखे तो स्तब्ध रह गया। मैंने कहा हुआ क्या है? उन्होंने एक अखबार तकिया के नीचे छुपाया। मैं दूसरे कमरे में चला गया, वापस आया तो वो चंडीगढ़ चले गए थे। मैंने वहां से वो अखबार खींच कर निकाला। उस अखबार में एक आर्टिकल था- 'नवजोत सिंह सिद्ध द स्ट्रोकलेस वंडर।' मतलब सिद्धू नेट के बाहर गेंद ही नहीं फेंक सकता, ये कहां शॉट मारेगा। उस फ्रंट पेज के आर्टिकल ने मुझे दफ्न कर दिया। प्रेस वालों से मैं तभी डरता हूं, तीन हजार तलवारों से नहीं डरता, लेकिन तीन प्रेस वालों से डरता हूं।
सिद्धू ने कहा, 1987 टेस्ट मैच में मेरा आगमन हुआ और जितनी जल्दी आगमन हुआ, उतनी जल्दी बाहर। एक दिन बाथरुम से बाहर निकला तौलिया पहना हुआ। बाबा की आंख में आंसू थे। मैं फौज में जाना चाहता था, लेकिन उनकी वजह से मैं जा नहीं पाया। उन्होंने रोक लिया। उन्होंने कहा कि बेटा तेरे बिना नहीं जी पाऊंगा। उनकी तमन्ना थी कि भारत के लिए क्रिकेट खेल। कम से कम 20 साल, तो उनके सपने के लिए ही जिता था।
उन्होंने कहा, जब उनकी आंखों में पहली बार जिंदगी में आंसू देखे तो स्तब्ध रह गया। मैंने कहा हुआ क्या है? उन्होंने एक अखबार तकिया के नीचे छुपाया। मैं दूसरे कमरे में चला गया, वापस आया तो वो चंडीगढ़ चले गए थे। मैंने वहां से वो अखबार खींच कर निकाला। उस अखबार में एक आर्टिकल था- 'नवजोत सिंह सिद्ध द स्ट्रोकलेस वंडर।' मतलब सिद्धू नेट के बाहर गेंद ही नहीं फेंक सकता, ये कहां शॉट मारेगा। उस फ्रंट पेज के आर्टिकल ने मुझे दफ्न कर दिया। प्रेस वालों से मैं तभी डरता हूं, तीन हजार तलवारों से नहीं डरता, लेकिन तीन प्रेस वालों से डरता हूं।
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सिद्धू का क्रिकेट करियर
नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब की राजनीति और भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित चेहरों में से एक हैं। 20 अक्तूबर 1963 को पटियाला में जन्मे सिद्धू की पहचान एक आक्रामक बल्लेबाज की रही। उन्होंने 1983 से 1999 तक भारत के लिए 51 टेस्ट और 136 वनडे मैच खेले। सिद्धू ने भारत के लिए 51 टेस्ट मैचों में 3202 रन बनाए और इस प्रारूप में उनका सर्वोच्च स्कोर 201 रन रहा। टेस्ट में सिद्धू ने नौ शतक और 15 अर्धशतक लगाए हैं। वहीं, 136 वनडे मैचों में सिद्धू ने 4413 रन बनाए जिसमें नाबाद 134 उनका सर्वोच्च स्कोर है। इस प्रारूप में उनके बल्ले से छह शतक और 33 अर्धशतक निकले हैं। प्रथम श्रेणी क्रिकेट की बात करें तो 157 मैचों में उनके नाम 9571 रन हैं। वहीं, लिस्ट ए क्रिकेट में 205 मैचों में सिद्धू ने 7186 रन बनाए हैं।
नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब की राजनीति और भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित चेहरों में से एक हैं। 20 अक्तूबर 1963 को पटियाला में जन्मे सिद्धू की पहचान एक आक्रामक बल्लेबाज की रही। उन्होंने 1983 से 1999 तक भारत के लिए 51 टेस्ट और 136 वनडे मैच खेले। सिद्धू ने भारत के लिए 51 टेस्ट मैचों में 3202 रन बनाए और इस प्रारूप में उनका सर्वोच्च स्कोर 201 रन रहा। टेस्ट में सिद्धू ने नौ शतक और 15 अर्धशतक लगाए हैं। वहीं, 136 वनडे मैचों में सिद्धू ने 4413 रन बनाए जिसमें नाबाद 134 उनका सर्वोच्च स्कोर है। इस प्रारूप में उनके बल्ले से छह शतक और 33 अर्धशतक निकले हैं। प्रथम श्रेणी क्रिकेट की बात करें तो 157 मैचों में उनके नाम 9571 रन हैं। वहीं, लिस्ट ए क्रिकेट में 205 मैचों में सिद्धू ने 7186 रन बनाए हैं।