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MS Dhoni: धोनी को बड़ी राहत, BCCI के एथिक्स ऑफिसर ने खारिज किए हितों के टकराव के आरोप; जानिए पूरा मामला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Mayank Tripathi
Updated Thu, 12 Mar 2026 12:00 AM IST
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सार
बीसीसीआई के एथिक्स ऑफिसर अरुण मिश्रा ने धोनी पर लगे हितों के टकराव के आरोपों को खारिज कर दिया। जांच में पाया गया कि आईपीएल में खिलाड़ी रहते हुए क्रिकेट अकादमी से जुड़े होने के बावजूद किसी नियम का उल्लंघन या पक्षपात का सबूत नहीं मिला।
धोनी
- फोटो : PTI
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विस्तार
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के एथिक्स ऑफिसर न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा (सेवानिवृत्त) ने पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के खिलाफ लगाए गए हितों के टकराव के आरोपों को खारिज कर दिया है। फैसले में कहा गया कि धोनी की आईपीएल में भागीदारी को लेकर किसी भी तरह का हितों का टकराव साबित नहीं हुआ। धोनी फिलहाल चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेलते हैं और टीम को पांच बार आईपीएल चैंपियन बना चुके हैं।
2017 में बने थे अकादमियों के मालिक
एथिक्स ऑफिसर ने अपने आदेश में कहा कि भले ही धोनी को M/s Aarka Sports and Management Private Limited द्वारा खोली गई क्रिकेट अकादमियों का मालिक माना जा सकता है, लेकिन यह समझौता 2017 में हुआ था, जबकि बीसीसीआई के हितों के टकराव से जुड़े नियम सितंबर 2018 में लागू हुए थे। फैसले में यह भी कहा गया कि ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि एक खिलाड़ी के रूप में धोनी किसी संस्थागत नियंत्रण या निर्णय लेने की स्थिति में थे। साथ ही, अकादमी के स्वामित्व को लेकर किसी तरह के पक्षपात, पक्षधरता या विशेष लाभ देने का कोई आरोप या प्रमाण भी सामने नहीं आया।
धोनी पर लगा बीसीसीआई के नियमों के उल्लंघन का आरोप
शिकायतकर्ता ने फरवरी 2024 में यह आरोप लगाया था कि धोनी एक मौजूदा खिलाड़ी होने के साथ-साथ क्रिकेट अकादमी के मालिक भी हैं, जो बीसीसीआई के नियम 38(4)(a) और 38(4)(p) का उल्लंघन है। साथ ही यह भी कहा गया कि 2018 में नियमों में बदलाव के बाद धोनी ने जरूरी जानकारी का खुलासा नहीं किया। हालांकि, एथिक्स ऑफिसर ने कहा कि शिकायत में कई आरोप ऐसे हैं जो नियम 38 के दायरे से बाहर हैं और यह मामला व्यक्तिगत विवाद से प्रेरित प्रतीत होता है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि शिकायतकर्ता और धोनी के बीच व्यावसायिक विवाद रहा है। अंत में न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर धोनी के खिलाफ हितों के टकराव का कोई मामला सिद्ध नहीं होता, इसलिए शिकायत को खारिज किया जाता है।
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2017 में बने थे अकादमियों के मालिक
एथिक्स ऑफिसर ने अपने आदेश में कहा कि भले ही धोनी को M/s Aarka Sports and Management Private Limited द्वारा खोली गई क्रिकेट अकादमियों का मालिक माना जा सकता है, लेकिन यह समझौता 2017 में हुआ था, जबकि बीसीसीआई के हितों के टकराव से जुड़े नियम सितंबर 2018 में लागू हुए थे। फैसले में यह भी कहा गया कि ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि एक खिलाड़ी के रूप में धोनी किसी संस्थागत नियंत्रण या निर्णय लेने की स्थिति में थे। साथ ही, अकादमी के स्वामित्व को लेकर किसी तरह के पक्षपात, पक्षधरता या विशेष लाभ देने का कोई आरोप या प्रमाण भी सामने नहीं आया।
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धोनी पर लगा बीसीसीआई के नियमों के उल्लंघन का आरोप
शिकायतकर्ता ने फरवरी 2024 में यह आरोप लगाया था कि धोनी एक मौजूदा खिलाड़ी होने के साथ-साथ क्रिकेट अकादमी के मालिक भी हैं, जो बीसीसीआई के नियम 38(4)(a) और 38(4)(p) का उल्लंघन है। साथ ही यह भी कहा गया कि 2018 में नियमों में बदलाव के बाद धोनी ने जरूरी जानकारी का खुलासा नहीं किया। हालांकि, एथिक्स ऑफिसर ने कहा कि शिकायत में कई आरोप ऐसे हैं जो नियम 38 के दायरे से बाहर हैं और यह मामला व्यक्तिगत विवाद से प्रेरित प्रतीत होता है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि शिकायतकर्ता और धोनी के बीच व्यावसायिक विवाद रहा है। अंत में न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर धोनी के खिलाफ हितों के टकराव का कोई मामला सिद्ध नहीं होता, इसलिए शिकायत को खारिज किया जाता है।