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जितेश शर्मा का खुलासा: विश्वकप से बाहर होने का दुख था, कहा- पिता के अंतिम दिनों में साथ रहना सबसे बड़ी बात
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Mayank Tripathi
Updated Wed, 11 Mar 2026 10:10 PM IST
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सार
विकेटकीपर-बल्लेबाज जितेश शर्मा ने कहा कि टी20 विश्व कप की टीम से बाहर होने का उन्हें कोई पछतावा नहीं है, क्योंकि उसी दौरान वे अपने बीमार पिता के अंतिम दिनों में उनके साथ रह पाए। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्हें निराशा हुई थी, लेकिन बाद में महसूस हुआ कि उस समय उनके पिता को उनकी ज्यादा जरूरत थी।
जितेश शर्मा
- फोटो : BCCI
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विस्तार
विकेटकीपर-बल्लेबाज जितेश शर्मा ने खुलासा किया है कि भारत के टी20 विश्व कप 2026 अभियान शुरू होने से कुछ दिन पहले ही उनके पिता का निधन हो गया था। उन्होंने कहा कि टीम से बाहर होने की वजह से उन्हें अपने पिता के साथ उनके अंतिम दिनों में रहने का मौका मिला, और इस बात का उन्हें बिल्कुल भी पछतावा नहीं है।
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जितेश की सैमसन और ईशान को मिला मौका
जितेश शर्मा पिछले साल एशिया कप तक भारतीय टीम में दूसरे विकल्प के विकेटकीपर-बल्लेबाज थे, उन्हें टी20 विश्व कप की टीम से बाहर कर दिया गया था। उनकी जगह शानदार फॉर्म में चल रहे ईशान किशन को मौका दिया गया। जितेश की गैरमौजूदगी में विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन और ईशान किशन ने टीम की ऐतिहासिक जीत में अहम भूमिका निभाई।
जितेश शर्मा पिछले साल एशिया कप तक भारतीय टीम में दूसरे विकल्प के विकेटकीपर-बल्लेबाज थे, उन्हें टी20 विश्व कप की टीम से बाहर कर दिया गया था। उनकी जगह शानदार फॉर्म में चल रहे ईशान किशन को मौका दिया गया। जितेश की गैरमौजूदगी में विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन और ईशान किशन ने टीम की ऐतिहासिक जीत में अहम भूमिका निभाई।
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विश्व कप में मौका नहीं मिलने का मलाल नहीं
पीटीआई वीडियो से बातचीत में जितेश ने बताया कि जब उन्हें टीम से बाहर किए जाने की खबर मिली तो शुरुआत में वे थोड़े निराश हुए थे, लेकिन बाद में उन्हें महसूस हुआ कि उस समय उनके पिता को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी। उन्होंने कहा, 'जब मुझे टीम से बाहर किए जाने की खबर मिली तो मैं थोड़ा निराश हुआ था। आखिर मैं भी इंसान हूं, इसलिए दुख हुआ। लेकिन मेरे परिवार और दोस्तों ने मुझे काफी संभाला, जिससे वह दुख ज्यादा समय तक नहीं रहा। मेरे पिता बीमार पड़ गए थे और 1 फरवरी को उनका निधन हो गया। उनके साथ मैं सात दिनों तक था।'
जितेश ने आगे कहा, 'बाद में मुझे एहसास हुआ कि उस समय मेरे पिता को मेरी जरूरत वर्ल्ड कप से ज्यादा थी। इसलिए अब मुझे कोई पछतावा नहीं है। मैं भगवान का शुक्रगुजार हूं कि मैं उनके आखिरी दिनों में उनके साथ रह पाया और उनकी देखभाल कर पाया।'
पीटीआई वीडियो से बातचीत में जितेश ने बताया कि जब उन्हें टीम से बाहर किए जाने की खबर मिली तो शुरुआत में वे थोड़े निराश हुए थे, लेकिन बाद में उन्हें महसूस हुआ कि उस समय उनके पिता को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी। उन्होंने कहा, 'जब मुझे टीम से बाहर किए जाने की खबर मिली तो मैं थोड़ा निराश हुआ था। आखिर मैं भी इंसान हूं, इसलिए दुख हुआ। लेकिन मेरे परिवार और दोस्तों ने मुझे काफी संभाला, जिससे वह दुख ज्यादा समय तक नहीं रहा। मेरे पिता बीमार पड़ गए थे और 1 फरवरी को उनका निधन हो गया। उनके साथ मैं सात दिनों तक था।'
जितेश ने आगे कहा, 'बाद में मुझे एहसास हुआ कि उस समय मेरे पिता को मेरी जरूरत वर्ल्ड कप से ज्यादा थी। इसलिए अब मुझे कोई पछतावा नहीं है। मैं भगवान का शुक्रगुजार हूं कि मैं उनके आखिरी दिनों में उनके साथ रह पाया और उनकी देखभाल कर पाया।'
'घर से विश्व कप देखना तनाव भरा था'
इस दौरान जितेश ने यह भी बताया कि घर से विश्व कप देखना उनके लिए अलग और ज्यादा तनावपूर्ण अनुभव था। उन्होंने कहा, 'घर से विश्व कप देखना बिल्कुल अलग और ज्यादा तनाव भरा था। मैं टीम के लिए बहुत खुश हूं। खिलाड़ियों ने कोच, कप्तान और टीम की जो सोच थी, उसे पूरा किया। एशिया कप से ही उनका लक्ष्य यही था और उन्होंने उसे हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत की।' बता दें कि, टीम की घोषणा से पहले तक जितेश राष्ट्रीय टीम की योजनाओं का अहम हिस्सा माने जा रहे थे, लेकिन अंतिम 15 खिलाड़ियों की सूची से उन्हें बाहर कर दिया गया।
मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर और मुख्य कोच गौतम गंभीर के नेतृत्व में चयन समिति ने रणनीतिक कारणों से यह फैसला लिया। चयनकर्ताओं ने ऐसे विकेटकीपर को प्राथमिकता दी जो टॉप ऑर्डर में भी बल्लेबाजी कर सके। चूंकि संजू सैमसन को मुख्य विकेटकीपर चुना गया था, इसलिए बैकअप के रूप में ईशान किशन को शामिल किया गया, जो उस समय सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में शानदार फॉर्म में थे।
इस दौरान जितेश ने यह भी बताया कि घर से विश्व कप देखना उनके लिए अलग और ज्यादा तनावपूर्ण अनुभव था। उन्होंने कहा, 'घर से विश्व कप देखना बिल्कुल अलग और ज्यादा तनाव भरा था। मैं टीम के लिए बहुत खुश हूं। खिलाड़ियों ने कोच, कप्तान और टीम की जो सोच थी, उसे पूरा किया। एशिया कप से ही उनका लक्ष्य यही था और उन्होंने उसे हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत की।' बता दें कि, टीम की घोषणा से पहले तक जितेश राष्ट्रीय टीम की योजनाओं का अहम हिस्सा माने जा रहे थे, लेकिन अंतिम 15 खिलाड़ियों की सूची से उन्हें बाहर कर दिया गया।
मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर और मुख्य कोच गौतम गंभीर के नेतृत्व में चयन समिति ने रणनीतिक कारणों से यह फैसला लिया। चयनकर्ताओं ने ऐसे विकेटकीपर को प्राथमिकता दी जो टॉप ऑर्डर में भी बल्लेबाजी कर सके। चूंकि संजू सैमसन को मुख्य विकेटकीपर चुना गया था, इसलिए बैकअप के रूप में ईशान किशन को शामिल किया गया, जो उस समय सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में शानदार फॉर्म में थे।