भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव के लिए साल 1983 बेहद खास रहा। इस साल उन्होंने दुनियाभर के क्रिकेट पंडितों को गलत साबित करते हुए भारत को पहली बार एकदिवसीय विश्व कप का विजेता बनाया। महान कपिल देव ने अपनी शानदार कप्तानी के साथ ही निजी तौर पर भी बेहतरीन प्रदर्शन किया और वो कर दिखाया जिसकी किसी को उम्मीद ही नहीं थी। खुद कपिल देव की पत्नी भी भारत की जीत की उम्मीद छोड़ चुकी थीं।
कपिल की पत्नी रोमी ने नहीं देखा था 1983 विश्व कप का फाइनल, स्टेडियम से चली गई थीं बाहर
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दरअसल क्रिकेट विश्व कप का तीसरा सीजन इंग्लैंड में खेला जा रहा था। नौ से 25 दिसंबर तक चले इस क्रिकेट के महाकुंभ में दो बार की विश्व विजेता वेस्टइंडीज जीत की प्रबल दावेदार मानी जा रही थी, जबकि कपिल देव की अगुवाई वाली भारतीय टीम से किसी को कुछ खास उम्मीद नहीं थी। बावजूद इसके भारतीय टीम लॉर्ड्स में होने वाले फाइनल मुकाबले में जगह बनाने में कामयाब रही।
हालांकि फाइनल में पहुंचने के बावजूद खतरनाक कैरेबियाई टीम ही सबकी पसंदीदा थी और जीत की प्रबल दावेदार मानी जा रही थी। वेस्टइंडीज ने टॉस जीता और पहले गेंदबाजी करना शुरू किया। उम्मीद के मुताबिक भारतीय टीम को सुनील गावस्कर के रूप में शुरुआती झटका लगा, बावजूद इसके श्रीकांत और मोहिंदर अमरनाथ ने दूसरे विकेट के लिए 57 रन जोड़े। लेकिन इसके बाद भारत के विकेट के पतन का सिलसिला शुरू हुआ और फिर पूरी टीम जैसे-तैसे 183 रन बनाकर ढेर हो गई। भारत की बल्लेबाजी देखकर लोगों की बची हुई उम्मीद भी खत्म हो गई। कपिल देव और मदन लाल की पत्नियां भी नाउम्मीदी में स्टेडियम छोड़कर चली गईं।
दरअसल कपिल देव ने अपनी आत्मकथा में इस घटना का जिक्र करते हुए लिखा, 'जैसे ही भारतीय खिलाड़ी आउट होने लगे, दर्शकों के बीच बैठी मेरी पत्नी रोमी ने मदन लाल की पत्नी अनु से होटल जाने को कहा। इसके थोड़ी देर बाद ही अनु भी होटल पहुंच गई। लेकिन जब उन्हें पास ही स्टेडियम से शोर की आवाज सुनाई दी तो उन्होंने टीवी खोल लिया। टीवी खोलते ही उन्होंने मुझे रिचर्ड्स का कैच लेते हुए देखा। दोनों औरतें खुशी से पलंग पर ही उछलने लगीं। दोनों ने इतना शोर मचाया कि नीचे से होटल के कर्मचारी ऊपर आ गए और दोनों को किसी तरह से विदा किया। उधर जीत के बाद मैंने अंदाजे से उस तरफ शैंपेन 'स्प्रे' करनी शुरू कर दी, जहां मैं उन दोनों के होने की उम्मीद कर रहा था। लेकिन तभी मदन ने मुझसे फुसफुसाते हुए बताया कि अनु और रोमी कहीं दिखाई नहीं दे रहीं।
बाद में ये दोनों महिलाएं चाह कर भी दोबारा स्टेडियम में नहीं आ पाईं। बाद में जब हम मिले तो उन्हें मुझे ये बताने की हिम्मत नहीं पड़ी कि जब भारत जीता तो वो लॉर्ड्स के मैदान पर मौजूद ही नहीं थीं और स्टेडियम छोड़कर चली गईं।