क्रिकेट को 'जेंटलमेंस गेम' कहा जाता है, लेकिन समय-समय भद्र पुरुषों के इस खेल पर काला धब्बा लगता रहा है। खिलाड़ियों के साथ नस्लभेदी टिप्पणियां कोई नई बात नहीं। आए दिन किसी न किसी क्रिकेटर को इस तरह की 'गालियों' से दो चार होना पड़ता है। ताजा उदाहरण टीम इंडिया का है, जहां सिडनी टेस्ट के दौरान नशे में धूत फैंस ने मोहम्मद सिराज और जसप्रीत बुमराह पर नस्लीय टिप्पणियां की। 21वीं सदी में हुई ऐसी हरकत से समूचा विश्व क्रिकेट शर्मसार है। आइए आज से ठीक 13 साल पहले की उस कहानी के साथ विवाद के वो पांच किस्से भी आपको बताते हैं जब 'जेंटलमेंस' गेम बदनाम हुआ...
विवाद के वो पांच किस्से, जब नस्लभेदी टिप्पणी से बदनाम हुआ 'जेंटलमेंस गेम क्रिकेट'
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डैरेन लीमन की बदतमीजी
ऑस्ट्रेलिया के डैरेन लीमन ने 2002-03 में वन-डे सीरीज के दौरान श्रीलंकाई टीम पर नस्लभेदी टिप्पणी की थी, इसके बाद उन्हें पांच वन-डे मैचों के लिए प्रतिबंधित किया गया था। हालांकि, बाद में लीमन ने अपनी उस गलती पर खेद व्यक्त किया और उसे जिंदगी की सबसे बड़ी भूल करार दिया।
सरफराज की बदजुबानी
साल 2019 की बात है। डरबन में पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका के बीच दूसरा वन-डे खेला जा रहा था। दक्षिण अफ्रीका की पारी के 37वें ओवर के दौरान पाक कप्तान सरफराज अहमद ने फेहलुकवायो पर नस्लीय टिप्पणी की। सरफराज ने फेहलुकवायो को कहा, 'अबे काले तेरी अम्मी कहां बैठी है? इसके अलावा उन्होंने और कुछ कहा, जो स्टंप माइक में कैद हो गया। नस्लभेदी कमेंट करने के आरोप में आईसीसी ने सरफराज को चार मैचों के लिए सस्पेंड कर दिया गया था।
मंकीगेट विवाद, 2008
आज से ठीक 13 साल पहले 2008 का मंकीगेट आपको याद होगा जब ऑस्ट्रेलिया के एंड्रूय साइमंड्स ने टीम इंडिया के अनुभवी गेंदबाज हरभजन सिंह पर नस्लभेदी टिप्पणी करने का झूठा आरोप लगाया था। भज्जी को कसूरवार माना गया और बैन तक लगा दिया। एकतरफा कार्रवाई से खिन्न बीसीसआई ने बाद में सीरीज बहिष्कार की धमकी दे डाली। हरभजन पर लगा आरोप हटाया गया। बता दें कि इस घटना ने क्रिकेट की दुनिया को हिलाकर रख दिया था। इस घटना वहां की अदालत, दोनों क्रिकेट बोर्ड, मीडिया समेत हर कोई शामिल हो गया था।
गिलक्रिस्ट ने लगाए थे रशीद लतीफ पर आरोप
ऑस्ट्रेलियाई टीम विपक्षी टीम पर गलत आरोप लगाने में पारंगत है। क्रिकेट में खेल भावना को बढ़ावा देने की वकालत करने वाले एडम गिलक्रिस्ट का दामन भी साफ नहीं है। गिलक्रिस्ट ने पाकिस्तानी विकेटकीपर रशीद लतीफ पर 2003 के विश्व कप के दौरान नस्लभेदी टिप्पणी का आरोप लगाया था। हालांकि, बाद में लतीफ को सबूतों के आभाव में छोड़ दिया गया था।