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Kapil-Gavaskar Controversy: जब कपिल ने गावस्कर पर लगाए थे गंभीर इल्जाम, भारतीय क्रिकेट में आया था भूचाल
Wed, 22 Dec 2021 08:47 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Wed, 22 Dec 2021 08:47 PM IST
सार
1980 के दशक में 1983 विश्व कप के बाद दोनों के बीच दरार की खबरें भी खूब सामने आई थीं। इससे भारतीय क्रिकेट में भूचाल आ गया था।
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सुनील गावस्कर और कपिल देव
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विस्तार
भारतीय क्रिकेट आज निरंतरता के उस स्तर पर पहुंच गया है, जहां इसे तीनों फॉर्मेट में सर्वश्रेष्ठ टीम में से एक के रूप में देखा जाता है। हालांकि, 1960 और 1970 के दशक में ऐसा नहीं था। जब टीम शीर्ष टीमों के खिलाफ संघर्ष करती दिखाई पड़ती थी। उस वक्त दो खिलाड़ियों ने भारतीय क्रिकेट का चेहरा और भाग्य बदल दिया। इन दोनों ने 1980 के दशक में भारतीय क्रिकेट को अलग स्तर पर ले गए। यह दोनों खिलाड़ी और कोई नहीं, बल्कि भारत के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर और महान ऑलराउंडर कपिल देव हैं।
1980 के दशक में दोनों का रहा बोलबाला
दोनों खिलाड़ियों ने क्रिकेट में कई रिकॉर्ड अपने नाम किए। साथ ही बतौर कप्तान भी काफी सफलता हासिल की। 1980 का दशक भारतीय क्रिकेट के लिए अलग-अलग तरह के इमोशन लेकर आया। टीम ने पहली बार 1983 में विश्व कप जीता। इसके साथ ही टेस्ट और वनडे फॉर्मेट में अन्य सफलताएं हासिल कीं। इन दोनों का इसमें काफी योगदान रहा था। हालांकि, इसी दशक में 1983 विश्व कप के बाद दोनों के बीच दरार की खबरें भी खूब सामने आई थीं। इससे भारतीय क्रिकेट में भूचाल आ गया था।
खराब बल्लेबाजी का हुआ था नुकसान
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दरअसल, हुआ यूं कि 1984 में जब कपिल देव और संदीप पाटिल अपने चरम फॉर्म पर थे, तब दोनों को इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच से बाहर कर दिया गया था। यह भारत-इंग्लैंड सीरीज का तीसरा टेस्ट था और कोलकाता में होने वाला था। फैंस के लिए इस बात को हजम करना और भी मुश्किल हो रहा था कि एक साल पहले देश को विश्व कप दिलाने वाले कपिल देव को टीम से बाहर कर दिया गया। हालांकि, इसके लिए पिछले टेस्ट में उनके द्वारा खेला गया खराब शॉट जिम्मेदार था।
चयनकर्ताओं ने कपिल को लेकर बड़ा फैसला लिया
कपिल ने इंग्लैंड के खिलाफ दिल्ली के कोटला मैदान में खेले गए दूसरे टेस्ट में खराब शॉट खेलकर अपने विकेट गंवाए थे। इंग्लैंड की टीम पहले ड्रॉ की तरफ बढ़ रही थी। हालांकि, दो महत्वपूर्ण विकेट मिलने के बाद टीम मैच जीत गई थी। बताया जाता है कि कपिल देव के इस गैरजिम्मेदाराना शॉट और बर्ताव से गावस्कर काफी नाराज थे।
इसी का नतीजा था कि जब सिलेक्शन कमेटी के चेयरमैन चंदू बोर्डे और तत्कालीन कप्तान सुनील गावस्कर ने प्लेइंग-11 को लेकर बैठक की, तो कपिल को बाहर करने का फैसला लिया गया। हालांकि, कोलकाता टेस्ट टीम इंडिया जीत गई थी।
कपिल ने गावस्कर पर लगाए गंभीर इल्जाम
कपिल ने इसके बाद कथित रूप से सुनील गावस्कर पर खुद को बाहर करने का गंभीर इल्जाम लगाया था। हालांकि, गावस्कर बार-बार सफाई देते रहे और उन दावों को खारिज किया। गावस्कर ने कहा था कि वह सिर्फ एक मेंबर के तौर पर चयन समिति की बैठक में शामिल हुए। जो भी फैसला लिया गया था वह चयनकर्ताओं का था। कपिल को बाहर करने में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। कपिल को खेलते नहीं देखने का आक्रोश कोलकाता के दर्शकों भी था। मैच के दौरान दर्शक 'नो कपिल, नो टेस्ट' चिल्ला रहे थे।
दोनों के बीच सुलह हुई और टीम पटरी पर लौटी
हालांकि, दोनों के बीच बाद में सुलह हो गई थी। दोनों कई बार एकसाथ देखे गए और हंसते-खेलते बातचीत की है, लेकिन उस वक्त इस मामले से भूचाल आ गया था। गावस्कर ने कहा कि उनके मन में कपिल देव के लिए काफी सम्मान है और वह इतने मुर्ख नहीं हैं कि भारत के बेस्ट ऑलराउंडर को मैच से बाहर कर देंगे।
फैंस के दिमाग में अब भी यह घटना ताजा
गावस्कर ने कहा था कि उन्हें कपिल के बाहर होने की कोई जानकारी नहीं थी। फैंस के लिए यह विवाद हजम कर पाना इसलिए भी मुश्किल था क्योंकि दोनों 1983 विश्व कप की जीत के जश्न में साथ-साथ मस्ती करते दिखे थे। ये घटना आज भी क्रिकेट फैंस के दिलोदिमाग में ताजा है।
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1980 के दशक में दोनों का रहा बोलबाला
दोनों खिलाड़ियों ने क्रिकेट में कई रिकॉर्ड अपने नाम किए। साथ ही बतौर कप्तान भी काफी सफलता हासिल की। 1980 का दशक भारतीय क्रिकेट के लिए अलग-अलग तरह के इमोशन लेकर आया। टीम ने पहली बार 1983 में विश्व कप जीता। इसके साथ ही टेस्ट और वनडे फॉर्मेट में अन्य सफलताएं हासिल कीं। इन दोनों का इसमें काफी योगदान रहा था। हालांकि, इसी दशक में 1983 विश्व कप के बाद दोनों के बीच दरार की खबरें भी खूब सामने आई थीं। इससे भारतीय क्रिकेट में भूचाल आ गया था।
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खराब बल्लेबाजी का हुआ था नुकसान
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दरअसल, हुआ यूं कि 1984 में जब कपिल देव और संदीप पाटिल अपने चरम फॉर्म पर थे, तब दोनों को इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच से बाहर कर दिया गया था। यह भारत-इंग्लैंड सीरीज का तीसरा टेस्ट था और कोलकाता में होने वाला था। फैंस के लिए इस बात को हजम करना और भी मुश्किल हो रहा था कि एक साल पहले देश को विश्व कप दिलाने वाले कपिल देव को टीम से बाहर कर दिया गया। हालांकि, इसके लिए पिछले टेस्ट में उनके द्वारा खेला गया खराब शॉट जिम्मेदार था।
चयनकर्ताओं ने कपिल को लेकर बड़ा फैसला लिया
कपिल ने इंग्लैंड के खिलाफ दिल्ली के कोटला मैदान में खेले गए दूसरे टेस्ट में खराब शॉट खेलकर अपने विकेट गंवाए थे। इंग्लैंड की टीम पहले ड्रॉ की तरफ बढ़ रही थी। हालांकि, दो महत्वपूर्ण विकेट मिलने के बाद टीम मैच जीत गई थी। बताया जाता है कि कपिल देव के इस गैरजिम्मेदाराना शॉट और बर्ताव से गावस्कर काफी नाराज थे।
इसी का नतीजा था कि जब सिलेक्शन कमेटी के चेयरमैन चंदू बोर्डे और तत्कालीन कप्तान सुनील गावस्कर ने प्लेइंग-11 को लेकर बैठक की, तो कपिल को बाहर करने का फैसला लिया गया। हालांकि, कोलकाता टेस्ट टीम इंडिया जीत गई थी।
कपिल ने गावस्कर पर लगाए गंभीर इल्जाम
कपिल ने इसके बाद कथित रूप से सुनील गावस्कर पर खुद को बाहर करने का गंभीर इल्जाम लगाया था। हालांकि, गावस्कर बार-बार सफाई देते रहे और उन दावों को खारिज किया। गावस्कर ने कहा था कि वह सिर्फ एक मेंबर के तौर पर चयन समिति की बैठक में शामिल हुए। जो भी फैसला लिया गया था वह चयनकर्ताओं का था। कपिल को बाहर करने में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। कपिल को खेलते नहीं देखने का आक्रोश कोलकाता के दर्शकों भी था। मैच के दौरान दर्शक 'नो कपिल, नो टेस्ट' चिल्ला रहे थे।
दोनों के बीच सुलह हुई और टीम पटरी पर लौटी
हालांकि, दोनों के बीच बाद में सुलह हो गई थी। दोनों कई बार एकसाथ देखे गए और हंसते-खेलते बातचीत की है, लेकिन उस वक्त इस मामले से भूचाल आ गया था। गावस्कर ने कहा कि उनके मन में कपिल देव के लिए काफी सम्मान है और वह इतने मुर्ख नहीं हैं कि भारत के बेस्ट ऑलराउंडर को मैच से बाहर कर देंगे।
फैंस के दिमाग में अब भी यह घटना ताजा
गावस्कर ने कहा था कि उन्हें कपिल के बाहर होने की कोई जानकारी नहीं थी। फैंस के लिए यह विवाद हजम कर पाना इसलिए भी मुश्किल था क्योंकि दोनों 1983 विश्व कप की जीत के जश्न में साथ-साथ मस्ती करते दिखे थे। ये घटना आज भी क्रिकेट फैंस के दिलोदिमाग में ताजा है।