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Hindi News ›   Cricket ›   Cricket News ›   'Rohit-Virat were not scoring runs But I Was Dropped', Manoj Tiwary targets MS Dhoni after Gambhir

Manoj Tiwary: 'रोहित-विराट रन नहीं बना रहे थे, लेकिन मुझे बाहर कर दिया', तिवारी का गंभीर के बाद धोनी पर निशाना

Sat, 25 Jan 2025 09:35 AM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: स्वप्निल शशांक Updated Sat, 25 Jan 2025 09:35 AM IST
सार

मनोज तिवारी ने 2011 में चेन्नई में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना पहला वनडे शतक लगाया, लेकिन उस मैच के बाद महीनों तक वह बेंच पर रहे थे। एमएस धोनी तब टीम के कप्तान थे। अब मनोज ने टीम से खुद को बाहर किए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं।

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'Rohit-Virat were not scoring runs But I Was Dropped', Manoj Tiwary targets MS Dhoni after Gambhir
मनोज तिवारी ने गंभीर के बाद धोनी पर निशाना साधा है - फोटो : BCCI

विस्तार

भारतीय क्रिकेट टीम में जगह बनाना कठिन है, लेकिन टीम में जगह बनाए रखना और भी कठिन है। देश में सबसे लोकप्रिय खेल होने के नाते क्रिकेट में हर रोज नई प्रतिभाएं उभर कर सामने आती हैं। ऐसे में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को मौका नहीं मिल पाता और वह अपनी असंतुष्टि जाहिर भी करते हैं। इनमें से एक खिलाड़ी मनोज तिवारी भी हैं। मनोज ने हाल फिलहाल में कई ऐसे बयान दिए हैं, जिसने भारतीय क्रिकेट में भूचाल ला दिया। भारतीय टीम के मौजूदा कोच गौतम गंभीर पर हमले के बाद अब उन्होंने पूर्व कप्तान एमएस धोनी पर निशाना साधा है। मनोज ने धोनी पर बिना किसी वजह के उन्हें टीम से ड्रॉप करने का आरोप लगाया है।
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मनोज तिवारी को बाहर किया गया था
अब संन्यास ले चुके स्टार ने 2006-07 रणजी ट्रॉफी में 99.50 की औसत से रन बनाए थे, लेकिन चोट के कारण उन्हें अंतरराष्ट्रीय डेब्यू के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा था। हालांकि, जब 2008 में उनका डेब्यू हुआ तो यह कुछ खास नहीं था। उन्होंने 2011 में चेन्नई में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना पहला वनडे शतक लगाया, लेकिन उस मैच के बाद महीनों तक वह बेंच पर रहे थे। एमएस धोनी तब टीम के कप्तान थे।
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'कप्तान सारे फैसले लेते हैं'
मनोज तिवारी ने एक मीडिया संस्थान को दिए इंटरव्यू में कहा, 'धोनी तब कप्तान थे। टीम इंडिया कप्तान की प्लानिंग के अनुसार चलती है। राज्य की टीमों में चीजें अलग होती हैं, लेकिन टीम इंडिया में सब कुछ कप्तान के बारे में होता है। अगर आप देखें तो कपिल देव ने यह प्रथा शुरू की थी। सुनील गावस्कर के कार्यकाल में उन्होंने अपने कप्तानी के प्रभाव को बरकरार रखा था। मोहम्मद अजहरुद्दीन के कार्यकाल में भी वह ही सारे फैसले लेते थे। उसके बाद दादा वगैरह आए। यह तब तक चलेगा जब तक कि एक सख्त प्रशासक नहीं आता और एक निर्धारित नियम नहीं बनाता।'
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'युवा खिलाड़ियों को डर लगता था'
उन्होंने कहा, 'आप अजित अगरकर (बीसीसीआई के मौजूदा मुख्य चयनकर्ता) को देखते हैं और आपको लगता है कि वह मजबूत फैसले ले सकते हैं। वह कोच से असहमत हो सकते हैं। जहां तक शतक जड़ने के बाद 14 मैचों में मुझे बाहर किए जाने की बात है तो निश्चित रूप से मैं इसका जवाब जानना चाहता हूं। शतक के बाद मेरी तारीफ हुई थी, लेकिन उसके बाद मुझे कोई आभास नहीं हुआ। उस समय, युवाओं को डर लगता था, जिनमें मैं भी शामिल था। यदि आप कुछ पूछते हैं, तो कौन जानता है कि इसे किस तरह से लिया जा सकता था और करियर लाइन पर है।'

'विराट-रोहित रन नहीं बना रहे थे'
उन्होंने कहा, 'तब जो खिलाड़ी टीम में थे वे विराट कोहली, सुरेश रैना, रोहित शर्मा थे। उसके बाद जो दौरा आया, उनमें विराट, रोहिर या रैना रन नहीं बना रहे थे और यहां मैं शतक बनाने और प्लेयर ऑफ द मैच जीतने के बाद भी प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं पा सका। मुझे 14 मैचों के लिए बाहर कर दिया गया था, जो छह महीने के अंतराल में हुए थे। उस समय ड्रॉप किए गए खिलाड़ी को पर्याप्त अभ्यास नहीं मिला था। मैं रिटायर होना चाहता था, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारी के कारण ऐसा नहीं कर सका। मनोज तिवारी ने लंबे समय तक घरेलू क्रिकेट में बंगाल का नेतृत्व किया और वह फिलहाल पश्चिम बंगाल के खेल और युवा मामलों के राज्य मंत्री भी हैं।

यह भी पढ़ें: Manoj Tiwary: 'रोहित-विराट रन नहीं बना रहे थे, लेकिन मुझे बाहर कर दिया', तिवारी का गंभीर के बाद धोनी पर निशाना 

तिवारी ने इससे पहले गंभीर पर आरोप लगाए थे
तिवारी ने इसी इंटरव्यू में गंभीर पर 'गाली और धमकी' का उपयोग करने का आरोप लगाया था। तिवारी ने कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के दिनों में हुई बहस को याद किया। उन्होंने बताया कि दोनों के बीच लगभग भिड़ंत हो ही गई थी और लड़ने वाले थे। तिवारी ने कहा कि उनकी लगभग लड़ाई होने ही वाली थी, लेकिन केकेआर के तत्कालीन गेंदबाजी कोच वसीम अकरम ने रोक दिया था।
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