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वो सात क्रिकेटर जिन्होंने की U-19 विश्व कप में कप्तानी, लेकिन टीम इंडिया से कभी नहीं खेल पाए
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Published by: अंशुल तलमले
Updated Sun, 05 Jan 2020 08:34 AM IST
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अंडर-19 भारतीय कप्तान
- फोटो : सोशल मीडिया
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अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप की उलटी गिनती शुरू हो गई है। आज से ठीक 13 दिन बाद 16 टीमों के बीच युवा विश्व विजेता बनने की जंग शुरू होगी। 24 दिन और 48 मुकाबलों के बाद चैंपियन का फैसला होगा। रिकॉर्ड चार बार का चैंपियन और एक बार का उपविजेता भारत अपना खिताब कायम रखने की पूरी कोशिश करेगा। कई ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने अंडर-19 विश्व कप न सिर्फ खेला बल्कि जीता भी पर सीनियर टीम में जगह नहीं बना पाए। जूनियर विश्व कप के 32 साल के इतिहास में 12 में से सिर्फ पांच कप्तान ही भारतीय टीम में जगह बना सके। जबकि सात कप्तानों को सीनियर टीम की नीली जर्सी पहनने का सौभाग्य नहीं मिला।
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अंडर 19 कप्तान
- फोटो : ट्विटर
टीम इंडिया की जर्सी पहनना हर क्रिकेटर का सपना होता है। कुछ की मेहनत रंग लाती है तो कुछ की किस्मत पास आकर भी रूठ जाती है। जूनियर और घरेलू क्रिकेट में अच्छे प्रदर्शन के बावजूद उनका यह ख्वाब पूरा नहीं हो पाता। इनमें से एक दिल्ली के उन्मुक्त चंद की कप्तानी में तो अंडर-19 टीम चैंपियन भी बनी। उन्हें भविष्य का स्टार बताया जा रहा था पर वह भारतीय टीम में जगह नहीं बना पाए। इसी तरह रविकांत शुक्ला, अशोक मनेरिया, विजय जोल, इशान किशन, एस सेंथिलनाथन और अमित पगनिस भी खोकर रह गए।
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U 19 विश्व कप जीतने के बाद विराट
- फोटो : ट्विटर
कोहली का अनोखा रिकॉर्ड: विराट कोहली एकमात्र कप्तान हैं जिन्होंने जूनियर टीम के बाद सीनियर टीम की भी कमान संभाली। विराट की अगुआई में अंडर-19 टीम 2008 में चैंपियन बनी थी। उस टीम में रविंद्र जडेजा, मनीष पांडे और सौरभ तिवारी भी थे।
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एम सेंथिलनाथन
- फोटो : sportskeeda
सेंथिलनाथन थे पहले कप्तान: भारत ने पहली बार तमिलनाडु के एम सेंथिलनाथन की कप्तानी में 1988 में चुनौती पेश की थी। टीम पहले ही संस्करण में छठे स्थान पर रही थी। दाएं हाथ के बल्लेबाज सेंथिलनाथन ने प्रथम श्रेणी के 37 मैचों में 31.66 की औसत से 1615 रन बनाए हैं। इस विश्व कप में भारत की ओर से नयन मोंगिया ने सात मैचों में 19.28 की औसत से 135 रन बनाए थे। वहीं नरेंद्र हिरवानी ने इतने ही मैचों में 21.30 की औसत से दस विकेट लिए थे। मोंगिया, हिरवानी के साथ ही प्रवीण आमरे और वेंकटेशपति राजू भी थे जो बाद में सीनियर टीम से भी खेले।
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अमित पगनिस
- फोटो : ट्विटर
पगनिस भी नहीं कर पाए कमाल: करीब 10 साल बाद 1998 में हुए दूसरे विश्व कप में अंडर-19 टीम की कमान मुंबई के अमित पगनिस के हाथ में थी और टीम दूसरे दौर तक पहुंची। पगनिस ने छह मैचों में 29.16 की औसत से 175 रन बनाए थे। अमित भंडारी ने 11 विकेट, हरभजन सिंह ने आठ और वीरेंद्र सहवाग ने सात विकेट लिए थे। इन्हें तो सीनियर टीम की नीली जर्सी पहनने का गौरव मिला पर पगनिस की किमस्म रूठी रही।
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