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Ashwin: मुख्य कोच गौतम गंभीर को लेकर रविचंद्रन अश्विन ने कही ये बात, उनके साथ अपने रिश्ते पर भी रखी राय
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Wed, 21 Aug 2024 06:40 PM IST
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सार
अश्विन 10 टेस्ट मैच के बड़े सत्र के लिए तैयार हैं और अगले महीने बांग्लादेश के खिलाफ होने वाली सीरीज नए मुख्य कोच गौतम गंभीर के मार्गदर्शन में उनकी पहली सीरीज होगी जिनके साथ उन्होंने काफी मैच खेले हैं।
रविचंद्रन अश्विन
- फोटो : ani
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विस्तार
भारतीय टीम श्रीलंका के खिलाफ सीमित ओवरों की सीरीज के बाद ब्रेक पर चल रही है। भारत का सामना अब बांग्लादेश से होगा जिसके खिलाफ टीम को दो मैचों की सीरीज खेलनी है। अश्विन 10 टेस्ट मैच के बड़े सत्र के लिए तैयार हैं और अगले महीने बांग्लादेश के खिलाफ होने वाली सीरीज नए मुख्य कोच गौतम गंभीर के मार्गदर्शन में उनकी पहली सीरीज होगी जिनके साथ उन्होंने काफी मैच खेले हैं। अश्विन उन्हें भारतीय क्रिकेट के हीरो में से एक मानते हैं।
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'हमें हमेशा गंभीर का समर्थन करना चाहिए'
अपने 14 साल के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर में अश्विन ने विभिन्न प्रारूपों में अब तक 281 मैच खेले हैं और 744 विकेट चटकाए हैं। उन्होंने कहा, गौतम ऐसे व्यक्ति हैं जिनके साथ मेरे अब भी बहुत अच्छे संबंध हैं। इस तथ्य के कारण कि वह बहुत सीधे और ईमानदार व्यक्ति हैं। मुझे लगता है कि गौतम भी उन लोगों में से एक हैं जिनका हमें हमेशा समर्थन करना चाहिए। वह भारतीय क्रिकेट के हीरो हैं।
अपने 14 साल के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर में अश्विन ने विभिन्न प्रारूपों में अब तक 281 मैच खेले हैं और 744 विकेट चटकाए हैं। उन्होंने कहा, गौतम ऐसे व्यक्ति हैं जिनके साथ मेरे अब भी बहुत अच्छे संबंध हैं। इस तथ्य के कारण कि वह बहुत सीधे और ईमानदार व्यक्ति हैं। मुझे लगता है कि गौतम भी उन लोगों में से एक हैं जिनका हमें हमेशा समर्थन करना चाहिए। वह भारतीय क्रिकेट के हीरो हैं।
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कोच पर निर्भर रहने के पक्ष में नहीं अश्विन
भारतीय टीम के अनुभवी स्पिनर रविचंद्रन अश्विन कभी भी पारंपरिक रूप से कोच पर निर्भर रहने के पक्ष में नहीं रहे। अश्विन के अनुसार, निर्भरता खिलाड़ियों को हठधर्मी बनाती है। अश्विन की समझदारी और बार-बार खुद को खोजने की उनकी क्षमता ने उन्हें मुश्किल समय में टिके रहने में मदद की है। हालांकि वह इस बात से अच्छी तरह परिचित हैं कि कुछ खिलाड़ी अपने कोच के नजरिये के सामने समर्पण करके नतीजे हासिल करते हैं, लेकिन उन्हें यह भी लगता है कि इस तरह की निर्भरता आपकी सोच को सीमित कर सकती है।
भारतीय टीम के अनुभवी स्पिनर रविचंद्रन अश्विन कभी भी पारंपरिक रूप से कोच पर निर्भर रहने के पक्ष में नहीं रहे। अश्विन के अनुसार, निर्भरता खिलाड़ियों को हठधर्मी बनाती है। अश्विन की समझदारी और बार-बार खुद को खोजने की उनकी क्षमता ने उन्हें मुश्किल समय में टिके रहने में मदद की है। हालांकि वह इस बात से अच्छी तरह परिचित हैं कि कुछ खिलाड़ी अपने कोच के नजरिये के सामने समर्पण करके नतीजे हासिल करते हैं, लेकिन उन्हें यह भी लगता है कि इस तरह की निर्भरता आपकी सोच को सीमित कर सकती है।
इस 37 साल के ऑफ स्पिनर ने कहा, बहुत सारे खिलाड़ी कोच या मार्गदर्शक या किसी एक व्यक्ति पर बहुत अधिक निर्भर होते हैं जो मुझे लगता है कि बहुत खतरनाक प्रवृत्ति है क्योंकि लोगों पर अत्यधिक निर्भरता के कारण आप नए विचारों के लिए तैयार नहीं होते। अक्सर कोच की चुनौती आपके लिए कई समाधान देने में सक्षम होना होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जो एक विशेष खिलाड़ी के लिए काम करता है, वह शायद दूसरे के लिए काम नहीं करे। एक आधुनिक कोचिंग का पहलू जिससे मैं पूरी तरह असहमत हूं, वह यह है कि वे उसी तकनीक को कॉपी-पेस्ट करने की कोशिश करते हैं जो किसी अन्य क्रिकेटर के लिए काम कर चुकी है। एक क्रिकेटर के तौर पर आपको लगातार नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है इसलिए आपको अपने जवाब खुद ही तलाशने चाहिए। यदि आपको अपने खेल के बारे में जानकारी नहीं है और यदि आप खुद को नहीं सिखा सकते हैं, तो मुझे लगता है कि आप हमेशा किसी पर निर्भर रहने वाले हैं, जो मुझे लगता है कि बहुत खतरनाक हिस्सा है।
कैरम बॉल को समझने में लगे तीन साल
दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को उनकी खास कैरम बॉल को समझने के लिए संघर्ष करना पड़ा है और उन्हें इसमें पारंगत होने में लगभग तीन साल लग गए। अश्विन ने कहा, मैंने 2006 या 2007 के बाद से नेट्स में ऐसी गेंदें फेंकना शुरू किया जो शायद मेरे लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट का दूसरा सत्र था। 2008 में विजय हजारे ट्रॉफी के दक्षिण क्षेत्र के मैचों के दौरान मैंने लगभग दो साल बाद इस गेंद को फेंका। 2010 तक मैं जिस गति से गेंदबाजी करता था, उसके बारे में शायद काफी आश्वस्त था। इसलिए मुझे आत्मविश्वास हासिल करने में लगभग दो से तीन साल लग गए।
दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को उनकी खास कैरम बॉल को समझने के लिए संघर्ष करना पड़ा है और उन्हें इसमें पारंगत होने में लगभग तीन साल लग गए। अश्विन ने कहा, मैंने 2006 या 2007 के बाद से नेट्स में ऐसी गेंदें फेंकना शुरू किया जो शायद मेरे लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट का दूसरा सत्र था। 2008 में विजय हजारे ट्रॉफी के दक्षिण क्षेत्र के मैचों के दौरान मैंने लगभग दो साल बाद इस गेंद को फेंका। 2010 तक मैं जिस गति से गेंदबाजी करता था, उसके बारे में शायद काफी आश्वस्त था। इसलिए मुझे आत्मविश्वास हासिल करने में लगभग दो से तीन साल लग गए।