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यह 5 निशानी बतलाती हैं, विराट एंड कंपनी खेल नहीं 'ओवर कॉन्फिडेंस' की वजह से हारी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Updated Tue, 23 Jan 2018 11:52 AM IST
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टीम इंडिया
- फोटो : File
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विराट कोहली नेतृत्व वाली टीम इंडिया से दक्षिण अफ्रीका दौरे पर ढेरों उम्मीद थी, लेकिन जिस तरह से खिलाड़ियों ने खासतौर पर बल्लेबाजों ने प्रदर्शन किया, उसे देखकर सभी भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को बड़ा झटका लगा।
टीम इंडिया
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खराब स्लिप फील्डिंग
किसी भी टीम में करीब 4 से 5 खिलाड़ी ऐसे होते हैं, जो स्लिम के स्पेशलिस्ट माने जाते हैं। लेकिन मौजूदा टीम इंडिया में एक भी स्पेशलिस्ट स्लिप फील्डर नहीं है।
इस सीरीज में हमें के एल राहुल, धवन, पुजारा, रोहित, अश्विन, मुरली विजय और कोहली को स्लिप में फील्डिंग करते हुए देखा। जबकि यकीकत यह है कि इनमें से एक भी खिलाड़ी स्लिप का फील्डर नहीं है और नतीजा दोनों टेस्ट में किसी न किसी अफ्रीकी बल्लेबाजों को अतिरिक्त मौका मिला।
किसी भी टीम में करीब 4 से 5 खिलाड़ी ऐसे होते हैं, जो स्लिम के स्पेशलिस्ट माने जाते हैं। लेकिन मौजूदा टीम इंडिया में एक भी स्पेशलिस्ट स्लिप फील्डर नहीं है।
इस सीरीज में हमें के एल राहुल, धवन, पुजारा, रोहित, अश्विन, मुरली विजय और कोहली को स्लिप में फील्डिंग करते हुए देखा। जबकि यकीकत यह है कि इनमें से एक भी खिलाड़ी स्लिप का फील्डर नहीं है और नतीजा दोनों टेस्ट में किसी न किसी अफ्रीकी बल्लेबाजों को अतिरिक्त मौका मिला।
टीम इंडिया
- फोटो : File
मौके गंवाए
जीतनी भी टीमें इतिहास में टॉप पर रही हैं, उनकी सबसे खास बात यह रही है कि वह कभी भी अपने प्रतिद्वदी को मैच में वापसी का मौका नहीं देती थी। उदाहरण के तौर पर 70 और 80 के दौर पर वेस्टइंडीज और उसके बाद 90 के दौर पर ऑस्ट्रेलिया टीम इसी रणनीति के तहत खेला करती थी।
कभी किसी मैच में अगर वह गलती करती भी तो मैच में वो जरूर मजबूत वापसी करके मैच का रूख पल्ट दिया करती थी। लेकिन बात करें मौजूदा नंबर वन टेस्ट टीम भारत की बात करें उसमें वह बात नजर नहीं आती है।
दोनों टेस्ट में टीम इंडिया को जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी ने अपनी गेंदबाजी से कई मौके दिलाए, लेकिन एक बार फिर कोहली एंड कंपनी उसे भुना पाने में नाकाम रही।
जीतनी भी टीमें इतिहास में टॉप पर रही हैं, उनकी सबसे खास बात यह रही है कि वह कभी भी अपने प्रतिद्वदी को मैच में वापसी का मौका नहीं देती थी। उदाहरण के तौर पर 70 और 80 के दौर पर वेस्टइंडीज और उसके बाद 90 के दौर पर ऑस्ट्रेलिया टीम इसी रणनीति के तहत खेला करती थी।
कभी किसी मैच में अगर वह गलती करती भी तो मैच में वो जरूर मजबूत वापसी करके मैच का रूख पल्ट दिया करती थी। लेकिन बात करें मौजूदा नंबर वन टेस्ट टीम भारत की बात करें उसमें वह बात नजर नहीं आती है।
दोनों टेस्ट में टीम इंडिया को जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी ने अपनी गेंदबाजी से कई मौके दिलाए, लेकिन एक बार फिर कोहली एंड कंपनी उसे भुना पाने में नाकाम रही।
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विराट कोहली
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अत्यधिक आक्रामकता
इस पूरी सीरीज में कप्तान कोहली ने लगातार जो काम किया है, वह है अत्यधिक आक्रमकता। कोहली ने मैदान और इंटरव्यू दोनों जगह पर अत्यधिक आक्रामकता दिखाई है। अच्छा होता अगर टीम इंडिया के खिलाड़ी अपने अत्यधिक आक्रामकता को बातों से कम बल्ले से ज्यादा दिखाती।
इस सीरीज में अभी तक सिर्फ हार्दिक पांड्या ने अपने बल्ले से अत्यधिक आक्रामकता दिखाई है। उन्होंने बल्ले के अलावा गेंदबाजी से भी कमाल किया है और टीम इंडिया के दूसरे खिलाड़ियों को भी उनसे सीखना चाहिए।
इस पूरी सीरीज में कप्तान कोहली ने लगातार जो काम किया है, वह है अत्यधिक आक्रमकता। कोहली ने मैदान और इंटरव्यू दोनों जगह पर अत्यधिक आक्रामकता दिखाई है। अच्छा होता अगर टीम इंडिया के खिलाड़ी अपने अत्यधिक आक्रामकता को बातों से कम बल्ले से ज्यादा दिखाती।
इस सीरीज में अभी तक सिर्फ हार्दिक पांड्या ने अपने बल्ले से अत्यधिक आक्रामकता दिखाई है। उन्होंने बल्ले के अलावा गेंदबाजी से भी कमाल किया है और टीम इंडिया के दूसरे खिलाड़ियों को भी उनसे सीखना चाहिए।
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टीम इंडिया
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5 बल्लेबाजों के साथ न उतरना पड़ा महंगा
कप्तान कोहली को समझना होगा कि ओवरसीज दौरे पर एक अतिरिक्त गेंदबाज लेकर ही उतरना चाहिए। कहीं न कहीं दोनों ही टेस्ट मैचों में टीम को एक अतिरिक्त तेंज गेंदबाज की कमी खली है। 6 बल्लेबाजों ने मिलकर भी टीम के स्कोर में कोई खास इजाफा नहीं किया, जिसका सीधा मलतब यह है कि यदि एक अतिरिक्त तेज गेंदबाज खेलता तो दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज उतने रन न बना पाते, जितने उन्होंने बनाए।
कप्तान कोहली को समझना होगा कि ओवरसीज दौरे पर एक अतिरिक्त गेंदबाज लेकर ही उतरना चाहिए। कहीं न कहीं दोनों ही टेस्ट मैचों में टीम को एक अतिरिक्त तेंज गेंदबाज की कमी खली है। 6 बल्लेबाजों ने मिलकर भी टीम के स्कोर में कोई खास इजाफा नहीं किया, जिसका सीधा मलतब यह है कि यदि एक अतिरिक्त तेज गेंदबाज खेलता तो दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज उतने रन न बना पाते, जितने उन्होंने बनाए।