आमतौर पर विश्व कप के फाइनल एकतरफा ही होते हैं, लेकिन रविवार को अंडर-19 विश्व कप के खिताबी मुकाबले ने रोमांच की नई परिभाषा गढ़ दी। दक्षिण अफ्रीका के पोचेस्ट्रूम में रविवार को हुए इस फाइनल में भारत और बांग्लादेश आमने-सामने थे। छुपा रुस्तम बांग्लादेश ने एक लो स्कोरिंग फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए पहली बार आईसीसी का कोई टूर्नामेंट जीता। चार बार की चैंपियन टीम इंडिया भले ही फाइनल हार गई, लेकिन रवि बिश्नोई के रूप में भारतीय क्रिकेट को अगला 'अनिल कुंबले' मिल सकता है।
भारत भले ही U-19 विश्व कप हार गया, लेकिन रवि बिश्नोई के रूप में मिला अगला 'अनिल कुंबले'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
टॉस गंवाकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम यशस्वी जायसवाल (88) की अर्धशतकीय पारी के बूते जैसे-तैसे स्कोरबोर्ड पर 177 रन टांगने में सफल रही। जवाब में बांग्लादेश की शुरुआत अच्छी रही और पहले विकेट के लिए ही 50 रन की साझेदारी हो गई। पूरे टूर्नामेंट में शानदार लय में नजर आए भारतीय पेसर्स बेअसर साबित हो रहे थे, लेकिन इसके बाद रवि बिश्नोई ने ऐसी गेंद घुमाई कि सवा सौ करोड़ हिंदुस्तानियों को मैच में वापसी की उम्मीद जग गई।
यह रवि बिश्नोई की गेंदबाजी का ही कमाल था कि 50 के स्कोर पर बिना किसी नुकसान के खेल रही बांग्लादेशी टीम को अगले 52 रन बनाने के लिए छह विकेट का नुकसान उठाना पड़ा। अपने दूसरे ही ओवर में रवि ने तंजीत हसन को निपटाया। फिर महमूदुल हसन को बोल्ड किया।
विरोधी इस झटके से उबरे ही नहीं थे कि तौहीद को एलबीडब्ल्यू और फिर शहादत हुसैन को स्टंपिंग करवाई। 5 ओवर के पहले स्पैल के बाद बिश्नोई को गेंदबाजी से हटा दिया गया, यही कप्तान प्रियम गर्ग चूक गए। यह एक खराब मूव था क्योंकि रवि अच्छी लय में थे और बांग्लादेश पूरी तरह से बैकफुट पर।
रवि की तेज लेग स्पिन और गुगली के सामने बांग्लादेशी बेसहाय नजर आ रहे थे। गेंद टप्पा खाने के बाद कहां घूमेगी, किस रफ्तार से घूमेगी इसका अंदाजा लगा पाना उनके लिए मुश्किल हो रहा था, लेकिन यहां से कप्तान अकबर अली और रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान से बाहर जाने के बाद लौटे परवेज हसन इमॉन ने दबाव हटाकर बांग्लादेश को जीत की राह पकड़ दी।
फाइनल में बिश्नोई ने 30 रन देकर चार विकेट लिए। यह किसी भी भारतीय गेंदबाज का फाइनल मैच में दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। पीयूष चावला ने 2006 के फाइनल मुकाबले में 8 रन देकर चार विकेट लिए थे। बिश्नोई ने टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा (17) विकेट लिए।
राजस्थान के जोधपुर में जन्में रवि बिश्नोई को बचपन में बहुत ज्यादा सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। पिताजी ने भी क्रिकेट छोड़कर पढ़ाई पर ध्यान देने को कह दिया था, लेकिन अपने चार-पांच दोस्तों के साथ मिलकर रवि ने अपनी अकादमी शुरू की। खेती की जमीन पर मैदान तैयार किया। खुद पिच तैयार की। रोलर चलाया। मैदान पर घास लगाया। बिश्नोई बचपन से शेन वॉर्न को अपना आदर्श मानते आए हैं। रवि की गेंदबाजी का अंदाज काफी हद तक अफगानी राशिद खान से मिलता-जुलता है।