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IND vs ENG: सेमीफाइनल से पहले बढ़ी टीम इंडिया की टेंशन! क्या बड़े मैच में चलेगा भारत का बिखरता बल्लेबाजी क्रम?
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Swapnil Shashank
Updated Wed, 04 Mar 2026 10:17 AM IST
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सार
भारत ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल में जगह तो बना ली है, लेकिन बल्लेबाजी की अस्थिरता चिंता का विषय बनी हुई है। ईशान किशन को छोड़कर कोई भी बल्लेबाज निरंतर प्रदर्शन नहीं कर पाया है। इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में जीत के लिए टीम इंडिया को सामूहिक और दमदार बल्लेबाजी दिखानी होगी।
भारतीय टीम
- फोटो : ANI
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विस्तार
टीम इंडिया ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल में जगह बना ली है, जहां पांच मार्च को उसका सामना इंग्लैंड से होगा। सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारत छठी बार टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल में उतरेगा। हालांकि, घरेलू सरजमीं पर खेले जा रहे इस टूर्नामेंट में टीम का सफर उतना आसान नहीं रहा, जितनी उम्मीद की जा रही थी। ग्रुप स्टेज से लेकर सुपर-8 तक भारत ने जीत तो हासिल की, लेकिन चैंपियन जैसी निरंतरता और दबदबा नजर नहीं आया। सबसे बड़ी चिंता बल्लेबाजी क्रम की अस्थिरता रही है।
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अमेरिका के खिलाफ खुली पोल
टूर्नामेंट के पहले ही मुकाबले में अमेरिका के खिलाफ भारतीय बल्लेबाजी की कमजोरी उजागर हो गई थी। महज 77 रन पर छह विकेट गिर गए थे और टीम संकट में फंस गई थी। उस समय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने 84 रनों की शानदार पारी खेलकर टीम को संभाला। अगर सूर्या की यह पारी नहीं होती, तो टीम इंडिया की शुरुआत बेहद शर्मनाक हो सकती थी।
टूर्नामेंट के पहले ही मुकाबले में अमेरिका के खिलाफ भारतीय बल्लेबाजी की कमजोरी उजागर हो गई थी। महज 77 रन पर छह विकेट गिर गए थे और टीम संकट में फंस गई थी। उस समय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने 84 रनों की शानदार पारी खेलकर टीम को संभाला। अगर सूर्या की यह पारी नहीं होती, तो टीम इंडिया की शुरुआत बेहद शर्मनाक हो सकती थी।
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छोटी टीमों के खिलाफ भी संघर्ष
नामीबिया जैसी अपेक्षाकृत कमजोर टीम के खिलाफ भी भारतीय बल्लेबाज खुलकर नहीं खेल पाए। ईशान किशन और हार्दिक पांड्या ने रन जरूर बनाए, लेकिन बाकी बल्लेबाजों का प्रदर्शन फीका रहा। सूर्यकुमार यादव और तिलक वर्मा जैसे खिलाड़ी भी धीमी बल्लेबाजी करते नजर आए। इसी तरह पाकिस्तान के खिलाफ भी सिर्फ ईशान किशन ने 40 गेंदों में 77 रन बनाकर जिम्मेदारी निभाई, जबकि अन्य बल्लेबाज बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे। नीदरलैंड के खिलाफ शिवम दुबे की 66 रनों की पारी को छोड़ दें, तो बाकी बल्लेबाजों ने निराश किया। यह सिलसिला ग्रुप स्टेज में लगातार देखने को मिला।
नामीबिया जैसी अपेक्षाकृत कमजोर टीम के खिलाफ भी भारतीय बल्लेबाज खुलकर नहीं खेल पाए। ईशान किशन और हार्दिक पांड्या ने रन जरूर बनाए, लेकिन बाकी बल्लेबाजों का प्रदर्शन फीका रहा। सूर्यकुमार यादव और तिलक वर्मा जैसे खिलाड़ी भी धीमी बल्लेबाजी करते नजर आए। इसी तरह पाकिस्तान के खिलाफ भी सिर्फ ईशान किशन ने 40 गेंदों में 77 रन बनाकर जिम्मेदारी निभाई, जबकि अन्य बल्लेबाज बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे। नीदरलैंड के खिलाफ शिवम दुबे की 66 रनों की पारी को छोड़ दें, तो बाकी बल्लेबाजों ने निराश किया। यह सिलसिला ग्रुप स्टेज में लगातार देखने को मिला।
सुपर-8 में और गहराई समस्या
उम्मीद थी कि सुपर-8 में भारतीय बल्लेबाज दमदार वापसी करेंगे, लेकिन दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टीम महज 111 रन पर सिमट गई। यह प्रदर्शन बड़े मुकाबलों में टीम की मानसिक मजबूती पर सवाल खड़े करता है। हालांकि जिम्बाब्वे के खिलाफ भारत ने टूर्नामेंट का अपना सबसे बड़ा स्कोर बनाया, लेकिन यह प्रदर्शन निरंतरता नहीं दिखा पाया। वेस्टइंडीज के खिलाफ संजू सैमसन ने 97 रनों की शानदार पारी खेली, लेकिन बाकी बल्लेबाजों ने उनका साथ नहीं दिया।
उम्मीद थी कि सुपर-8 में भारतीय बल्लेबाज दमदार वापसी करेंगे, लेकिन दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टीम महज 111 रन पर सिमट गई। यह प्रदर्शन बड़े मुकाबलों में टीम की मानसिक मजबूती पर सवाल खड़े करता है। हालांकि जिम्बाब्वे के खिलाफ भारत ने टूर्नामेंट का अपना सबसे बड़ा स्कोर बनाया, लेकिन यह प्रदर्शन निरंतरता नहीं दिखा पाया। वेस्टइंडीज के खिलाफ संजू सैमसन ने 97 रनों की शानदार पारी खेली, लेकिन बाकी बल्लेबाजों ने उनका साथ नहीं दिया।
प्रमुख बल्लेबाजों का फीका प्रदर्शन
इस टूर्नामेंट में अभिषेक शर्मा से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन वह छह मैचों में सिर्फ 80 रन ही बना सके हैं। तीन मैचों में वह खाता तक नहीं खोल पाए। सूर्यकुमार यादव का स्ट्राइक रेट 135 के आसपास रहा है, जो उनके आक्रामक अंदाज के मुकाबले कम माना जाएगा। हार्दिक पांड्या भी बड़े मौकों पर निर्णायक पारी खेलने में असफल रहे हैं। पूरे टूर्नामेंट में अब तक किसी भारतीय बल्लेबाज ने निरंतरता नहीं दिखाई है।
इस टूर्नामेंट में अभिषेक शर्मा से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन वह छह मैचों में सिर्फ 80 रन ही बना सके हैं। तीन मैचों में वह खाता तक नहीं खोल पाए। सूर्यकुमार यादव का स्ट्राइक रेट 135 के आसपास रहा है, जो उनके आक्रामक अंदाज के मुकाबले कम माना जाएगा। हार्दिक पांड्या भी बड़े मौकों पर निर्णायक पारी खेलने में असफल रहे हैं। पूरे टूर्नामेंट में अब तक किसी भारतीय बल्लेबाज ने निरंतरता नहीं दिखाई है।
इंग्लैंड के खिलाफ दबाव बढ़ेगा
अब सेमीफाइनल में इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम का सामना करना है। ऐसे में भारतीय बल्लेबाजी को सामूहिक प्रदर्शन करना होगा। सिर्फ एक या दो खिलाड़ियों के भरोसे बड़े मैच नहीं जीते जाते। अगर शीर्ष क्रम फिर से लड़खड़ाता है, तो इंग्लैंड के खिलाफ दबाव और बढ़ सकता है। टीम इंडिया को अपने बल्लेबाजी क्रम में स्पष्टता, आक्रामकता और साझेदारी पर ध्यान देना होगा।
अब सेमीफाइनल में इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम का सामना करना है। ऐसे में भारतीय बल्लेबाजी को सामूहिक प्रदर्शन करना होगा। सिर्फ एक या दो खिलाड़ियों के भरोसे बड़े मैच नहीं जीते जाते। अगर शीर्ष क्रम फिर से लड़खड़ाता है, तो इंग्लैंड के खिलाफ दबाव और बढ़ सकता है। टीम इंडिया को अपने बल्लेबाजी क्रम में स्पष्टता, आक्रामकता और साझेदारी पर ध्यान देना होगा।