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600 टेस्ट, 94 साल का सफर: कैसे भारत क्रिकेट के सबसे लंबे प्रारूप की मजबूत ताकत बनता गया? आंकड़े बता रहे कहानी

Sat, 15 Aug 2026 11:15 AM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, गॉल
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, गॉल Published by: स्वप्निल शशांक Updated Sat, 15 Aug 2026 11:15 AM IST
सार

भारत स्वतंत्रता दिवस के दिन श्रीलंका के खिलाफ अपना 600वां टेस्ट खेलेगा। 1932 में टेस्ट क्रिकेट में कदम रखने वाली भारतीय टीम ने शुरुआती दौर में संघर्ष किया, लेकिन पिछले दो दशकों में उसका प्रदर्शन तेजी से बदला। हाल के 100 टेस्ट में भारत ने 56 मुकाबले जीते, जबकि तेज गेंदबाजों और स्पिनरों दोनों के प्रदर्शन में जबरदस्त सुधार हुआ है।

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India's 600-Test Journey: How Wins, Bowling and Greats Transformed the Team Into a Test Powerhouse
आंकड़ों में भारत के 600 टेस्ट का सफर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत 15 अगस्त 2026 को श्रीलंका के खिलाफ गॉल में अपना 600वां टेस्ट मैच खेलने उतरा है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, गॉल में शुरू हुआ यह मुकाबला भारतीय टेस्ट क्रिकेट के सफर में एक और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ गया। भारत 600 टेस्ट खेलने वाली दुनिया की तीसरी टीम बनी है। उससे पहले सिर्फ इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया इस मुकाम तक पहुंचे हैं।

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भारत ने 1932 में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में अपना पहला टेस्ट खेला था। टीम को 100 टेस्ट तक पहुंचने में 35 साल लगे। इसके बाद अगले 200 टेस्ट के पड़ाव तक पहुंचने में 15 और 14 साल लगे। हालांकि, पिछले कुछ दशकों में मैच खेलने की रफ्तार बढ़ी और भारत ने करीब हर 10 साल में 100 टेस्ट पूरे किए।

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India's 600-Test Journey: How Wins, Bowling and Greats Transformed the Team Into a Test Powerhouse
भारतीय टीम - फोटो : ANI

भारत के ऐतिहासिक टेस्ट पड़ाव

टेस्ट खिलाफ साल मैदान नतीजा
पहला टेस्ट इंग्लैंड 1932 लॉर्ड्स इंग्लैंड 158 रन से जीता
100वां टेस्ट इंग्लैंड 1967 बर्मिंघम इंग्लैंड 132 रन से जीता
200वां टेस्ट पाकिस्तान 1982 लाहौर ड्रॉ
300वां टेस्ट दक्षिण अफ्रीका 1996 अहमदाबाद भारत 64 रन से जीता
400वां टेस्ट वेस्टइंडीज 2006 किंग्स्टन भारत 49 रन से जीता
500वां टेस्ट न्यूजीलैंड 2016 कानपुर भारत 197 रन से जीता
600वां टेस्ट श्रीलंका 2026 गॉल -

जीत का आंकड़ा लगातार बढ़ता गया
भारत के टेस्ट सफर को 100-100 मैचों के हिस्सों में देखें तो टीम की सफलता में साफ बदलाव दिखाई देता है। पहले 100 टेस्ट में भारत ने सिर्फ 10 मैच जीते थे और 40 गंवाए थे। अगले तीन हिस्सों में भी जीत की संख्या 25, 21 और 32 रही। लेकिन 401 से 500वें टेस्ट के बीच भारत ने 42 मैच जीते। इसके बाद 501 से 599वें टेस्ट के बीच टीम ने 56 जीत दर्ज कीं। यानी भारत ने अपने शुरुआती 300 टेस्ट में जितने मैच जीते थे, उतने ही मैच उसने हाल के 99 टेस्ट में जीत लिए।

100-100 टेस्ट के हिस्सों में भारत का प्रदर्शन
टेस्ट जीत हार टाई ड्रॉ जीत-हार अनुपात
1-100 10 40 0 50 0.250
101-200 25 32 0 43 0.781
201-300 21 26 1 52 0.808
301-400 32 31 0 37 1.032
401-500 42 28 0 30 1.500
501-599 56 31 0 12 1.806

भारत का कुल रिकॉर्ड भी इस बदलाव की कहानी बताता है। 2024 में पहली बार टीम की कुल टेस्ट जीत की संख्या उसकी हार से ज्यादा हुई थी। हालांकि हाल की कुछ हार ने उसे फिर पीछे किया है और अब भारत के नाम 186 जीत और 188 हार हैं।

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भारतीय टीम - फोटो : BCCI

घरेलू मैदान बना भारत का किला
 

  • पिछले दो 100-टेस्ट चरणों में घरेलू परिस्थितियों में भारत का दबदबा बेहद मजबूत रहा। 2006 से 2016 के बीच भारत ने घर में खेले 42 टेस्ट में 26 जीते और सिर्फ चार गंवाए थे।
  • इसके बाद के 100 टेस्ट में भारत ने घर में 50 मैच खेले और इनमें 35 जीत दर्ज कीं। इस दौरान उसे सिर्फ नौ हार मिलीं। हालांकि इनमें पांच हार उसके पिछले आठ घरेलू टेस्ट में आई हैं।
  • भारत ने 2013 से 2024 के बीच लगातार 18 टेस्ट सीरीज घर में जीतीं, जो उसकी टेस्ट क्रिकेट की सबसे शानदार घरेलू उपलब्धियों में से एक रही।
  • पिछले दो चरणों को मिलाकर भारत ने घर में 92 टेस्ट में 61 जीत दर्ज कीं। इसके मुकाबले शुरुआती चार चरणों में 207 घरेलू टेस्ट में भारत के नाम सिर्फ 62 जीत थीं।


विदेश में भी बदली भारत की तस्वीर
भारत का सुधार सिर्फ घरेलू मैदान तक सीमित नहीं रहा। पिछले दो 100-टेस्ट चरणों में भारत ने विदेश में 107 टेस्ट खेले और उनमें से 37 जीते। शुरुआती चार चरणों में 193 विदेशी टेस्ट में उसे सिर्फ 26 जीत मिली थीं।
501 से 599वें टेस्ट के बीच विदेश में भारत ने 49 टेस्ट खेले, जिनमें 21 जीते और 22 हारे। उसका जीत-हार अनुपात 0.955 रहा। अगर भारत 600वें टेस्ट में श्रीलंका को गॉल में हरा देता है तो यह अनुपात 1.00 हो जाएगा।

100-100 टेस्ट के चरणों में भारत की जीत का ब्योरा

टेस्ट मैच नं घरेलू जीत विदेशी जीत कुल जीत
1-100 10 0 10
101-200 15 10 25
201-300 18 3 21
301-400 19 13 32
401-500 26 16 42
501-599 35 21 56
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विराट कोहली - फोटो : ANI

विराट कोहली के दौर में आया बड़ा बदलाव
 

  • भारत के टेस्ट क्रिकेट में इस बदलाव का एक बड़ा हिस्सा विराट कोहली की कप्तानी के दौर से जुड़ा रहा। कोहली भारत के सबसे सफल टेस्ट कप्तान हैं। उन्होंने 68 टेस्ट में कप्तानी की और 40 जीत हासिल कीं।
  • इनमें से 32 जीत 501 से 599वें टेस्ट वाले चरण में आईं। यह किसी भी भारतीय कप्तान की पूरी कप्तानी में हासिल जीत से पांच ज्यादा थीं। कोहली की इस अवधि की 12 जीत विदेशी मैदानों पर आईं, जो किसी भी भारतीय कप्तान की तुलना में सबसे ज्यादा हैं।
  • अजिंक्य रहाणे ने भी कोहली की गैरमौजूदगी में टीम की कप्तानी की। उन्होंने छह टेस्ट में कप्तानी की और इनमें से चार जीते, जबकि एक भी मुकाबला नहीं गंवाया।


गेंदबाजी ने बदली भारत की टेस्ट पहचान
भारत की टेस्ट सफलता में सबसे बड़ा बदलाव गेंदबाजी विभाग में आया। खासकर तेज गेंदबाजों ने टीम को नई ताकत दी। भारत के शुरुआती दो 100-टेस्ट चरणों में स्पिनरों ने तेज गेंदबाजों से करीब दोगुने विकेट लिए थे। इसके बाद यह अंतर लगातार कम हुआ। 501 से 599वें टेस्ट के चरण में पहली बार तेज गेंदबाजों ने स्पिनरों से ज्यादा विकेट लिए। हाल के 100 टेस्ट में भारत के गेंदबाजों का औसत सिर्फ 25.35 रहा, जो इससे पहले वाले चरण के 34.45 के मुकाबले करीब नौ रन बेहतर है। गेंदबाजों का स्ट्राइक रेट भी 65.6 से घटकर 50.1 हो गया।

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भारतीय टीम - फोटो : BCCI

100-100 टेस्ट के हिस्सों में भारत की बल्लेबाजी और गेंदबाजी

टेस्ट बल्लेबाजी
औसत
गेंदबाजी
औसत
गेंदबाजी
स्ट्राइक रेट
तेज गेंदबाजी
औसत
स्पिन औसत
1-100 27.13 37.38 94.4 42.16 35.30
101-200 28.98 33.03 77.8 35.43 31.03
201-300 32.99 34.70 79.3 34.02 35.25
301-400 34.16 34.93 70.1 36.73 33.29
401-500 34.90 34.45 65.6 36.77 32.31
501-599 33.21 25.35 50.1 26.00 24.62

हाल के 100 टेस्ट में तेज गेंदबाजों का औसत 26 और स्पिनरों का 24.62 रहा। इससे पहले भारत के किसी भी 100-टेस्ट चरण में तेज गेंदबाजों या स्पिनरों का औसत 30 से नीचे नहीं गया था। स्ट्राइक रेट में भी ऐसा ही सुधार दिखता है। हाल के चरण में तेज गेंदबाजों ने हर 48.5 गेंद और स्पिनरों ने हर 51.8 गेंद पर विकेट लिया।

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कोहली और कुंबले - फोटो : Twitter

25 का गेंदबाजी औसत बना नया मानक
हाल के 100 टेस्ट में 50 या उससे ज्यादा विकेट लेने वाले भारत के सभी नौ गेंदबाजों का औसत 30 से कम रहा। इनमें पांच गेंदबाजों का औसत 25 से भी कम था और दो गेंदबाज 20 से नीचे रहे। पहले पांच चरणों को मिलाकर सिर्फ एक गेंदबाज ऐसा था, जिसका औसत 25 से कम रहा था। इसी तरह हाल के चरण में चार गेंदबाजों का स्ट्राइक रेट 50 से कम रहा, जबकि इससे पहले ऐसा कोई गेंदबाज नहीं था।

100-100 टेस्ट के हिस्सों में गेंदबाजी के आंकड़े

टेस्ट 50+ विकेट लेने वाले औसत <30 औसत <25 स्ट्राइक रेट <60 स्ट्राइक रेट <50
1-100 9 3 0 0 0
101-200 8 4 0 1 0
201-300 10 4 0 1 0
301-400 7 3 0 1 0
401-500 11 2 1 4 0
501-599 9 9 5 9 4

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पुजारा और रहाणे - फोटो : BCCI
बल्लेबाजों के औसत में आई गिरावट
जहां गेंदबाजी में जबरदस्त सुधार हुआ, वहीं बल्लेबाजी औसत में हाल के चरण में थोड़ी गिरावट आई। पहले से पांचवें चरण तक भारत का बल्लेबाजी औसत लगातार बढ़ा, लेकिन 501 से 599वें टेस्ट के दौरान यह घटकर 33.21 हो गया। पिछले चरण में यह 34.90 था। हाल के चरण में 1000 या उससे ज्यादा रन बनाने वाले 12 भारतीय बल्लेबाजों में सिर्फ दो का औसत 45 या उससे ज्यादा रहा। किसी का औसत 50 तक नहीं पहुंचा।

1000+ रन बनाने वाले बल्लेबाजों के औसत का विश्लेषण
टेस्ट 1000+ रन
वाले बल्लेबाज
औसत 40+ औसत 45+ औसत 50+
1-100 13 3 1 0
101-200 15 3 2 1
201-300 13 7 5 2
301-400 10 6 5 3
401-500 17 11 6 3
501-599 12 8 2 0

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भारतीय टीम - फोटो : PTI
भारत कैसे पहुंचा 'बिग थ्री' में?
दूसरी टीमों के मुकाबले भारत की स्थिति देखें तो पिछले दो दशकों में उसकी रैंकिंग में भी बड़ा सुधार हुआ है। पहले, दूसरे और चौथे 100-टेस्ट चरण में भारत का जीत-हार अनुपात छठे स्थान पर था। तीसरे चरण में वह पांचवें स्थान पर रहा। 401 से 500वें टेस्ट के दौरान भारत तीसरे स्थान पर पहुंच गया और उसके ऊपर सिर्फ दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया थे।

हाल के चरण में भारत का जीत-हार अनुपात 1.806 रहा, जो ऑस्ट्रेलिया के बाद दूसरा सर्वश्रेष्ठ है। गेंदबाजी में भी भारत ने लंबी छलांग लगाई। पहले चार चरणों में वह गेंदबाजी औसत के मामले में शीर्ष पांच में भी नहीं था। 401-500 के चरण में वह पांचवें स्थान पर आया और हाल के चरण में दूसरे स्थान पर पहुंच गया। उससे आगे सिर्फ विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की मौजूदा चैंपियन दक्षिण अफ्रीका है।

हर दौर में चमके भारत के बड़े सितारे
भारत के 600 टेस्ट के सफर में अलग-अलग दौर के कई महान खिलाड़ियों ने टीम को आगे बढ़ाया। पॉली उमरीगर, सुनील गावस्कर, मोहम्मद अजहरुद्दीन, राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली ने अलग-अलग चरणों में भारत के लिए सबसे ज्यादा रन बनाए। गेंदबाजी में वीनू मांकड़, बिशन सिंह बेदी, कपिल देव, अनिल कुंबले, इशांत शर्मा और रविचंद्रन अश्विन ने अपनी-अपनी पीढ़ी में कमाल किया।

भारत के हर 100 टेस्ट चरण के सबसे बड़े रन स्कोरर और विकेट टेकर
टेस्ट भारत के शीर्ष
रन स्कोरर
रन भारत के शीर्ष
विकेट टेकर
विकेट
1-100 पॉली उमरीगर 3631 वीनू मांकड़ 162
101-200 सुनील गावस्कर 7034 बिशन सिंह बेदी 252
201-300 मोहम्मद अजहरुद्दीन 4459 कपिल देव 267
301-400 राहुल द्रविड़ 8741 अनिल कुंबले 405
401-500 सचिन तेंदुलकर 5452 इशांत शर्मा 209
501-599 विराट कोहली 5958 रविचंद्रन अश्विन 334

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सचिन और द्रविड़ - फोटो : ANI/PTI
द्रविड़, गावस्कर, सचिन और विराट का खास योगदान
राहुल द्रविड़ ने 301 से 400वें टेस्ट के चरण में भारत के लिए 8741 रन बनाए, जो किसी एक 100-टेस्ट चरण में किसी भारतीय बल्लेबाज का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
सुनील गावस्कर 101 से 200वें टेस्ट के चरण में 7034 रन बनाकर भारत ही नहीं, बल्कि सभी बल्लेबाजों में शीर्ष पर रहे। इसी दौर में वह टेस्ट क्रिकेट में 10 हजार रन पूरे करने वाले पहले बल्लेबाज बने।
सचिन तेंदुलकर ने 401 से 500वें टेस्ट के दौरान भारत के लिए 5452 रन बनाए। वह 200 टेस्ट खेलने वाले दुनिया के इकलौते क्रिकेटर हैं।
भारत के कुल 600 टेस्ट में से करीब एक-तिहाई मुकाबलों में तेंदुलकर मैदान पर उतरे। अपने 24 साल के करियर में उन्होंने भारत के 92.1 प्रतिशत टेस्ट खेले।
विराट कोहली ने 501 से 599वें टेस्ट के चरण में 5958 रन बनाए। इस अवधि में वह भारत के सबसे बड़े बल्लेबाजी सितारे रहे और कप्तानी के दौरान टीम के टेस्ट प्रदर्शन में बड़ा बदलाव आया।

कुंबले और अश्विन की गेंदबाजी का दबदबा
 
  • भारत के दो महान ऑफ स्पिनरों में अनिल कुंबले और रविचंद्रन अश्विन ने भी अलग-अलग दौर में अपनी छाप छोड़ी।
  • कुंबले 301 से 400वें टेस्ट वाले चरण में भारत के सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे और उन्होंने 405 विकेट लिए।
  • हालांकि उस चरण में वह दुनिया के सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज नहीं थे। मुथैया मुरलीधरन, ग्लेन मैक्ग्रा और शेन वॉर्न उनसे आगे थे।
  • अश्विन ने 401 से 500वें और 501 से 599वें टेस्ट के दोनों चरणों में भारत के लिए सबसे ज्यादा विकेट लिए।
  • हाल के चरण में उनके 334 विकेट पूरी दुनिया में दूसरे सर्वाधिक थे। उनसे आगे सिर्फ नाथन लियोन रहे।

हर 100 टेस्ट के दौर में भारत के सबसे बड़े खिलाड़ी
टेस्ट का दौर सबसे ज्यादा रन
बनाने वाले (दुनिया)
भारत के
टॉप रन स्कोरर
विश्व रैंक सबसे ज्यादा विकेट
लेने वाले (दुनिया)
भारत के
टॉप विकेट टेकर
विश्व रैंक
1-100 हटन – 6971 पॉली उमरीगर – 3631 17 ट्रूमैन – 307 वीनू मांकड़ – 162 12
101-200 गावस्कर – 7034 सुनील गावस्कर – 7034 1 लिली – 332 बिशन सिंह बेदी – 252 5
201-300 बॉर्डर – 7918 मोहम्मद अजहरुद्दीन – 4459 14 मार्शल – 342 कपिल देव – 267 5
301-400 द्रविड़ – 8764 राहुल द्रविड़ – 8741 1 मुरलीधरन – 540 अनिल कुंबले – 405 4
401-500 कुक – 10241 सचिन तेंदुलकर – 5452 11 एंडरसन – 422 इशांत शर्मा – 209 9
501-599 रूट – 10109 विराट कोहली – 5958 3 लियोन – 356 रविचंद्रन अश्विन – 334 2

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सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण - फोटो : ANI
भारत की टेस्ट यात्रा की सबसे बड़ी कहानी क्या है?
  • भारत का 600 टेस्ट तक पहुंचना सिर्फ मैचों की संख्या का आंकड़ा नहीं है, बल्कि टेस्ट क्रिकेट में टीम के बदलते स्तर की कहानी भी है। शुरुआती 300 टेस्ट में भारत ने सिर्फ 56 मुकाबले जीते थे। इसके बाद के 300 टेस्ट में उसने 88 जीत दर्ज कीं।
  • घरेलू मैदान पर मजबूत प्रदर्शन, विदेशों में बेहतर रिकॉर्ड, तेज गेंदबाजी में आई क्रांति और स्पिनरों की निरंतरता ने भारत को टेस्ट क्रिकेट की शीर्ष टीमों में पहुंचाया। हाल के 100 टेस्ट में भारत का 1.806 का जीत-हार अनुपात उसकी इस यात्रा का सबसे मजबूत सबूत है।
  • अब 600वें टेस्ट में श्रीलंका के खिलाफ जीत भारत को एक और खास आंकड़ा दे सकती है। गॉल में जीत मिलते ही विदेशी टेस्ट में उसका जीत-हार अनुपात भी 1.00 हो जाएगा। यानी जिस टीम ने टेस्ट क्रिकेट में अपने शुरुआती दशकों में लंबा संघर्ष किया, वह आज दुनिया की सबसे मजबूत टेस्ट टीमों में शामिल है।
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