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IPL मैच के दौरान क्या नहीं पहन या रख सकते खिलाड़ी: किन चीजों पर है पाबंदी? नियमों के उल्लंघन पर लग सकता है बैन

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Swapnil Shashank Updated Sun, 12 Apr 2026 12:23 PM IST
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सार

राजस्थान रॉयल्स टीम के मैनेजर रोमी भिंडर के डगआउट फोन विवाद ने एक बार फिर पीएमओए प्रोटोकॉल को चर्चा में ला दिया है। यह नियम खिलाड़ियों और स्टाफ को किसी भी तरह के बाहरी संपर्क से दूर रखने के लिए बनाया गया है। मोबाइल फोन, स्मार्ट वियरेबल्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर सख्त पाबंदी इसी का हिस्सा है। इस घटना ने साफ कर दिया कि आईपीएल में नियमों का पालन बेहद जरूरी है, क्योंकि छोटी सी गलती भी बड़े सवाल खड़े कर सकती है।

IPL PMOA Protocol Explained: What You Can’t Wear or Use During a Match, and the Romi Bhinder Controversy
आईपीएल के सख्त नियम - फोटो : IPL/BCCI
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विस्तार

आईपीएल 2026 में हाल ही में राजस्थान रॉयल्स के टीम मैनेजर रोमी भिंडर से जुड़ा विवाद सुर्खियों में है। डगआउट में उनके मोबाइल फोन इस्तेमाल करने का वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल तेज हो गया कि आखिर मैच के दौरान क्या-क्या चीजें इस्तेमाल या पहनना मना होता है। यहीं से चर्चा शुरू होती है पीएमओए (प्लेयर्स एंड मैच ऑफिशियल्स एरिया) प्रोटोकॉल की, जो आईपीएल में खेल की निष्पक्षता बनाए रखने का सबसे अहम नियम माना जाता है। अगर इन नियमों का उल्लंघन हुआ तो स्टाफ या खिलाड़ी पर प्रतिबंध भी लग सकता है। एंटी करप्शन यूनिट तुरंत इस पर कार्रवाई कर सकता है।
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पीएमओए प्रोटोकॉल क्या है?

पीएमओए यानी प्लेयर्स एंड मैच ऑफिशियल्स एरिया, वह क्षेत्र होता है जहां खिलाड़ी, कोच, सपोर्ट स्टाफ और मैच अधिकारी मौजूद रहते हैं। इसमें ड्रेसिंग रूम, डगआउट और मैदान का कुछ हिस्सा शामिल होता है। इस एरिया में सख्त नियम लागू होते हैं, खासकर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और कम्युनिकेशन को लेकर। आसान भाषा में कह सकते हैं कि यह नियम सुनिश्चित करता है कि मैदान के अंदर कोई भी बाहरी संपर्क या संदिग्ध गतिविधि न हो।
 
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IPL PMOA Protocol Explained: What You Can’t Wear or Use During a Match, and the Romi Bhinder Controversy
डगआउट में मोबाइल का इस्तेमाल करते रोमी भिंडर - फोटो : twitter

मैच के दौरान क्या पहनना या इस्तेमाल करना मना है?

आईपीएल में मैच के दौरान खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ पर सिर्फ खेल का ही नहीं, बल्कि डिवाइस और पहनावे को लेकर भी सख्त नजर रखी जाती है। नियम साफ कहते हैं, मैदान और डगआउट में ऐसी कोई भी चीज नहीं होनी चाहिए, जिससे बाहर संपर्क किया जा सके।

1. मोबाइल फोन और कम्युनिकेशन डिवाइस

 
  • मोबाइल फोन
  • स्मार्टवॉच
  • ईयरपीस / ब्लूटूथ डिवाइस

डगआउट में इनका इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित होता है। यही वजह है कि रोमी भिंडर का मामला इतना बड़ा बन गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह मैच के दौरान जेब से फोन निकालकर इस्तेमाल करते दिखे और यहीं से विवाद शुरू हो गया। ललित मोदी ने भी आपत्ती जताई। नियम साफ है- फोन साथ रख सकते हैं, लेकिन डगआउट में उसे इस्तेमाल नहीं कर सकते। हार्दिक पांड्या भारत के मैचों के दौरान घड़ी पहने दिखते हैं, लेकिन वह एक सिंपल वॉच होता है, स्मार्टवॉच नहीं।
 

2. स्मार्ट वियरेबल्स

 
  • फिटनेस बैंड (अगर उसमें कनेक्टिविटी हो)
  • स्मार्ट ग्लासेस
  • कोई भी ऐसा गैजेट जो डेटा भेज या रिसीव कर सके

आज के दौर में छोटे-छोटे डिवाइस भी बड़े काम कर सकते हैं। ऐसे गैजेट्स के जरिए बाहर बैठे लोग मैदान की जानकारी हासिल कर सकते हैं या निर्देश भेज सकते हैं। इसलिए इन्हें पूरी तरह बैन किया गया है।

3. छिपे हुए डिवाइस वाले कपड़े या एक्सेसरी

 
  • कैप या कपड़ों में फिट इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस
  • मॉडिफाइड (संशोधित) उपकरण

यह सबसे संवेदनशील कैटेगरी मानी जाती है। अगर किसी कपड़े या एक्सेसरी में छिपा डिवाइस हो, तो उसे पकड़ना मुश्किल हो सकता है और यही एंटी-करप्शन के लिए सबसे बड़ा खतरा है। दिलचस्प बात यह है कि जब खिलाड़ी मैच के दौरान माइक लगाकर कमेंटेटर्स से बात करते हैं, तो वह पूरी तरह नियंत्रित प्रक्रिया होती है।

 
  • पहले रेफरी और अंपायर की अनुमति ली जाती है
  • डिवाइस की जांच होती है
  • यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई बाहरी सिग्नल अंदर-बाहर न जा सके

4. अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण

 
  • लैपटॉप / टैबलेट (बिना अनुमति)
  • रेडियो या ट्रांसमीटर

इनका इस्तेमाल सिर्फ अधिकृत स्टाफ ही सीमित परिस्थितियों में कर सकता है। आम खिलाड़ियों या स्टाफ के लिए यह पूरी तरह प्रतिबंधित रहता है।

सख्त नियम ही क्रिकेट की पहचान
यानी कुल मिलाकर, टीम मैनेजर केवल ड्रेसिंग रूम में फोन का इस्तेमाल कर सकता है, डगआउट में नहीं। सभी खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को मैदान पर पहुंचते ही अपने मोबाइल फोन और स्मार्टवॉच बंद कर टीम सिक्योरिटी लायजन ऑफिसर को जमा कराना होता है। केवल टीम एनालिस्ट को ही निर्धारित एनालिस्ट टेबल पर कंप्यूटर इस्तेमाल करने की अनुमति होती है। बीसीसीआई की एंटी-करप्शन और सिक्योरिटी यूनिट (ACSU) डगआउट में किसी भी तरह के कम्युनिकेशन डिवाइस को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाती है और किसी भी उल्लंघन को गंभीर अपराध मानती है।

रोमी भिंडर मामले से क्या समझें?

रोमी भिंडर का मामला इसलिए इतना चर्चा में आया क्योंकि वह डगआउट में फोन इस्तेमाल करते दिखे। यह नियमों का सीधा उल्लंघन माना जा सकता है। इससे एंटी-करप्शन सिस्टम पर भी सवाल उठे। यहां सबसे अहम बात यह है कि नियमों में कोई ग्रे एरिया नहीं है, डगआउट में फोन का इस्तेमाल नो एंट्री जोन में आता है। 

न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में बीसीसीआई के एक अधिकारी ने पुष्टि की कि भिंडर ने पीएमओए प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है, जो डगआउट में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाता है। अधिकारी ने कहा, 'हां, भिंडर ने पीएमओए प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है क्योंकि मैच के दौरान डगआउट में मोबाइल फोन पूरी तरह प्रतिबंधित हैं।'

उन्होंने आगे जोड़ा, 'यह अनजाने में हुआ हो सकता है, लेकिन यह उल्लंघन है, इसलिए कुछ कार्रवाई तो होगी। चेतावनी मिलेगी या मैच से प्रतिबंध, यह मैच रेफरी और एसीयू की रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। उसी आधार पर आईपीएल गवर्निंग काउंसिल फैसला लेगी।' मैच के लिए नियुक्त बीसीसीआई के दो एंटी-करप्शन मैनेजर इस मामले की रिपोर्ट एसीएसयू प्रमुख को सौंपेंगे। भिंडर पर संभावित कार्रवाई में जुर्माना या पीएमओए क्षेत्र से अस्थायी प्रतिबंध शामिल हो सकता है।

पूरा विवाद पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- IPL 2026 Controversy: डगआउट में फोन इस्तेमाल से मचा बवाल, राजस्थान रॉयल्स विवादों में; ललित मोदी ने उठाए सवाल

इतने सख्त नियम क्यों?

क्रिकेट, खासकर टी20 लीग जैसे आईपीएल में, हर गेंद पर करोड़ों रुपये दांव पर लगे होते हैं। ऐसे में स्पॉट फिक्सिंग, मैच फिक्सिंग या फिर अंदर की जानकारी का लीक होना, ये सभी बड़े खतरे बने रहते हैं। इसीलिए ये नियम बनाए गए हैं ताकि बाहरी संपर्क पूरी तरह बंद रहे, कोई भी अंदर की जानकारी बाहर न भेज सके और खेल पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बना रहे। आसान शब्दों में यूं कहें कि मैदान के अंदर जो हो रहा है, वही बाहर दिखे, बीच में कोई छिपा कनेक्शन न हो। रोमी भिंडर विवाद ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि आईपीएल में नियम सिर्फ कागज पर नहीं, बल्कि मैदान पर भी उतनी ही सख्ती से लागू होते हैं और छोटी सी चूक भी बड़े विवाद में बदल सकती है।
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