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PCB की NOC नीति फिर सवालों में: LPL के लिए 102 पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने कराया रजिस्ट्रेशन, क्या है पूरा मामला?
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, कराची
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Sun, 24 May 2026 04:15 PM IST
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सार
लंका प्रीमियर लीग 2026 के लिए 102 पाकिस्तानी खिलाड़ियों के रजिस्ट्रेशन के बाद पीसीबी की एनओसी नीति फिर सवालों के घेरे में आ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक बोर्ड अब तक विदेशी टी20 लीगों में खिलाड़ियों की भागीदारी को लेकर कोई स्पष्ट और एक समान नियम लागू नहीं कर पाया है।
बाबर, रिजवान, शादाब, रऊफ और शाहीन
- फोटो : ANI
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विस्तार
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) की विदेशी टी20 लीगों में खिलाड़ियों को अनुमति देने वाली नीति एक बार फिर चर्चा में है। श्रीलंका में जुलाई-अगस्त में होने वाली लंका प्रीमियर लीग (LPL) के लिए 102 पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जिसके बाद पीसीबी की एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
दुनियाभर में लगातार बढ़ती टी20 लीगों के बीच पाकिस्तानी खिलाड़ी बड़ी संख्या में इन टूर्नामेंट्स में हिस्सा लेने के लिए आवेदन करते हैं। हालांकि किसी भी लीग के ड्राफ्ट या नीलामी में शामिल होने के लिए पहले खिलाड़ियों का रजिस्ट्रेशन जरूरी होता है।
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दुनियाभर में लगातार बढ़ती टी20 लीगों के बीच पाकिस्तानी खिलाड़ी बड़ी संख्या में इन टूर्नामेंट्स में हिस्सा लेने के लिए आवेदन करते हैं। हालांकि किसी भी लीग के ड्राफ्ट या नीलामी में शामिल होने के लिए पहले खिलाड़ियों का रजिस्ट्रेशन जरूरी होता है।
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पीसीबी की नीति पर उठे सवाल
एक सूत्र के मुताबिक पीसीबी अब तक विदेशी टी20 लीगों को लेकर कोई स्पष्ट और एक समान नीति लागू नहीं कर पाया है। इसी वजह से खिलाड़ियों के एजेंट पहले ही रजिस्ट्रेशन करा देते हैं, जबकि उन्हें यह भी पक्का नहीं होता कि बोर्ड संबंधित टूर्नामेंट के लिए एनओसी देगा या नहीं। सूत्र ने कहा, 'पीसीबी ने विदेशी टी20 लीगों के लिए अब तक कोई व्यवस्थित और लगातार लागू होने वाली एक समान नीति नहीं बनाई है। इसलिए एजेंट पहले खिलाड़ियों का रजिस्ट्रेशन करा देते हैं, भले ही बाद में बोर्ड अनुमति दे या नहीं।'
एक सूत्र के मुताबिक पीसीबी अब तक विदेशी टी20 लीगों को लेकर कोई स्पष्ट और एक समान नीति लागू नहीं कर पाया है। इसी वजह से खिलाड़ियों के एजेंट पहले ही रजिस्ट्रेशन करा देते हैं, जबकि उन्हें यह भी पक्का नहीं होता कि बोर्ड संबंधित टूर्नामेंट के लिए एनओसी देगा या नहीं। सूत्र ने कहा, 'पीसीबी ने विदेशी टी20 लीगों के लिए अब तक कोई व्यवस्थित और लगातार लागू होने वाली एक समान नीति नहीं बनाई है। इसलिए एजेंट पहले खिलाड़ियों का रजिस्ट्रेशन करा देते हैं, भले ही बाद में बोर्ड अनुमति दे या नहीं।'
कुछ लीगों में ही ज्यादा मिलते हैं मौके
रिपोर्ट के मुताबिक अधिकतर मामलों में बहुत कम पाकिस्तानी खिलाड़ी ड्राफ्ट या नीलामी के अंतिम चरण तक पहुंच पाते हैं। सबसे ज्यादा भागीदारी आमतौर पर बांग्लादेश प्रीमियर लीग (BPL) और लंका प्रीमियर लीग में देखने को मिलती है। एलपीएल इस बार एक साल के अंतराल के बाद आयोजित हो रही है। वहीं दूसरी बड़ी लीगों जैसे एसए20, द हंड्रेड, कैरेबियन प्रीमियर लीग और इंटरनेशनल लीग टी20 में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को ज्यादा मौके नहीं मिलते।
रिपोर्ट के मुताबिक अधिकतर मामलों में बहुत कम पाकिस्तानी खिलाड़ी ड्राफ्ट या नीलामी के अंतिम चरण तक पहुंच पाते हैं। सबसे ज्यादा भागीदारी आमतौर पर बांग्लादेश प्रीमियर लीग (BPL) और लंका प्रीमियर लीग में देखने को मिलती है। एलपीएल इस बार एक साल के अंतराल के बाद आयोजित हो रही है। वहीं दूसरी बड़ी लीगों जैसे एसए20, द हंड्रेड, कैरेबियन प्रीमियर लीग और इंटरनेशनल लीग टी20 में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को ज्यादा मौके नहीं मिलते।
बिग बैश लीग में बढ़ी थी भागीदारी
ऑस्ट्रेलिया की बिग बैश लीग (BBL) में पिछले सीजन पाकिस्तानी खिलाड़ियों की रिकॉर्ड भागीदारी देखने को मिली थी। बाबर आजम, शाहीन शाह अफरीदी और मोहम्मद रिजवान ने पहली बार इस लीग में हिस्सा लिया था। उनके अलावा हसन अली, हारिस रऊफ और शादाब खान जैसे खिलाड़ी पहले भी बिग बैश लीग में खेल चुके हैं।
ऑस्ट्रेलिया की बिग बैश लीग (BBL) में पिछले सीजन पाकिस्तानी खिलाड़ियों की रिकॉर्ड भागीदारी देखने को मिली थी। बाबर आजम, शाहीन शाह अफरीदी और मोहम्मद रिजवान ने पहली बार इस लीग में हिस्सा लिया था। उनके अलावा हसन अली, हारिस रऊफ और शादाब खान जैसे खिलाड़ी पहले भी बिग बैश लीग में खेल चुके हैं।
पीसीबी अभी भी असमंजस में
सूत्रों के मुताबिक, पीसीबी खुद भी इस बात को लेकर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि विदेशी लीगों के लिए खिलाड़ियों को एनओसी देने का एक समान नियम कैसे लागू किया जाए। बोर्ड नहीं चाहता कि उस पर ऐसे खिलाड़ियों को रोकने का आरोप लगे, जो राष्ट्रीय टीम की ड्यूटी में शामिल नहीं हैं। यही कारण है कि हर सीजन में विदेशी लीगों के दौरान पीसीबी की नीति विवाद और बहस का विषय बन जाती है।
सूत्रों के मुताबिक, पीसीबी खुद भी इस बात को लेकर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि विदेशी लीगों के लिए खिलाड़ियों को एनओसी देने का एक समान नियम कैसे लागू किया जाए। बोर्ड नहीं चाहता कि उस पर ऐसे खिलाड़ियों को रोकने का आरोप लगे, जो राष्ट्रीय टीम की ड्यूटी में शामिल नहीं हैं। यही कारण है कि हर सीजन में विदेशी लीगों के दौरान पीसीबी की नीति विवाद और बहस का विषय बन जाती है।