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क्या पहचान के आधार पर हुई आलोचना?: उस्मान ख्वाजा का गंभीर आरोप, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया-फैंस और मीडिया को लताड़ा!

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, सिडनी Published by: स्वप्निल शशांक Updated Fri, 02 Jan 2026 10:27 AM IST
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सार

अपने आखिरी टेस्ट से पहले उस्मान ख्वाजा ने नस्लीय स्टीरियोटाइप्स, दोहरे मापदंड और क्रिकेट सिस्टम की चुनौतियों पर खुलकर बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि हालात बेहतर हुए हैं, लेकिन लड़ाई अभी बाकी है। मैदान पर रन बनाने के साथ-साथ, ख्वाजा क्रिकेट को ज्यादा समावेशी बनाने की एक गहरी विरासत छोड़कर जा रहे हैं।

Usman Khawaja Speaks Out on Racial Stereotyping: “I Want the Journey for the Next Usman Khawaja to Be Easier”
उस्मान ख्वाजा - फोटो : Twitter
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विस्तार
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ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के आखिरी पड़ाव पर पहुंचते हुए क्रिकेट के एक संवेदनशील, लेकिन अहम पहलू पर खुलकर बात की है। सिडनी टेस्ट से ठीक पहले, अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के आखिरी गर्मियों में, ख्वाजा ने स्वीकार किया कि वह आज भी नस्लीय पूर्वाग्रह और स्टीरियोटाइप्स से जूझ रहे हैं। हालांकि उनका मानना है कि जब उन्होंने डेब्यू किया था, तब की तुलना में क्रिकेट अब कहीं ज्यादा स्वस्थ स्थिति में है।
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गंभीर आरोप: सवालों में नस्लीय सोच के संकेत
एससीजी में लगभग एक घंटे तक चली भावुक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ख्वाजा ने उन आलोचनाओं पर तीखा जवाब दिया, जिनमें एशेज सीरीज के पहले टेस्ट से पहले उनकी तैयारी पर सवाल उठाए गए थे। कुछ पूर्व खिलाड़ियों और मीडिया रिपोर्ट्स ने यह दावा किया था कि पर्थ टेस्ट से पहले कई दिन गोल्फ खेलने और फिर पीठ में ऐंठन (बैक स्पैज्म) के कारण उनका पहले टेस्ट में ओपन न कर पाना आपस में जुड़ा हुआ है।

ख्वाजा ने इस पर कहा, 'मेरे बैक स्पैज्म थे, और यह ऐसी चीज थी जिसे मैं नियंत्रित नहीं कर सकता था। जिस तरह मीडिया और कुछ पूर्व खिलाड़ी मेरे ऊपर टूट पड़े… मैं दो दिन तक झेल सकता था, लेकिन लगातार करीब पांच दिन तक हमला हुआ।'
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Usman Khawaja Speaks Out on Racial Stereotyping: “I Want the Journey for the Next Usman Khawaja to Be Easier”
उस्मान ख्वाजा - फोटो : ANI
'आलोचना प्रदर्शन की नहीं, मेरी नीयत पर थी'
39 वर्षीय ख्वाजा ने साफ कहा कि आलोचना उनके प्रदर्शन को लेकर नहीं थी, बल्कि उनके चरित्र और प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए गए। उन्होंने कहा, 'यह मेरी परफॉर्मेंस के बारे में नहीं था। बातें ऐसी थीं- यह टीम के लिए कमिटेड नहीं है, यह सिर्फ अपने बारे में सोचता है, गोल्फ खेलता है, स्वार्थी है, पर्याप्त ट्रेनिंग नहीं करता, आलसी है। ये वही नस्लीय स्टीरियोटाइप्स हैं, जिनके साथ मैं पूरी जिंदगी बड़ा हुआ हूं।' ख्वाजा ने यह भी बताया कि इस आलोचना से सबसे ज्यादा उनकी पत्नी रेचल नाराज हुईं।

ख्वाजा ने कहा, 'हम स्पष्ट रूप से पूरी तरह उन सोचों से आगे नहीं बढ़ पाए हैं, क्योंकि मैंने इससे पहले ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम में किसी को ऐसे व्यवहार का सामना करते हुए नहीं देखा… मेरे साथ वैसा इसलिए हुआ क्योंकि मैं कुछ नियंत्रित न कर पाने वाली परिस्थितियों में था। अब भी थोड़ी बहुत चीजें बाकी हैं, जिनसे मुझे हर रोज लड़ना पड़ता है, और यही मेरे लिए सबसे निराशाजनक बात है।'

Usman Khawaja Speaks Out on Racial Stereotyping: “I Want the Journey for the Next Usman Khawaja to Be Easier”
उस्मान ख्वाजा - फोटो : PTI
'दूसरों के लिए नियम अलग क्यों?'
ख्वाजा ने दोहरे मापदंडों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'मैं आपको कई ऐसे खिलाड़ियों के नाम बता सकता हूं, जिन्होंने टेस्ट से एक दिन पहले गोल्फ खेला और चोटिल हुए, लेकिन किसी ने कुछ नहीं कहा।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'और इससे भी ज्यादा ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने मैच से पहले रात में 15 बीयर पी और चोटिल हुए, तब भी कोई सवाल नहीं उठा। तब वे 'ऑस्ट्रेलियन लैरिकिन्स' होते हैं, लेकिन जब मैं चोटिल होता हूं, तो मेरी साख और मेरी पहचान पर हमला होता है।'

भारत सीरीज से ही संन्यास का विचार
ख्वाजा ने खुलासा किया कि उन्होंने पिछली गर्मियों में भारत के खिलाफ सीरीज के दौरान ही संन्यास के बारे में सोचना शुरू कर दिया था। हालांकि, उन्होंने अंतिम फैसला पिछले महीने एडिलेड टेस्ट के दौरान लिया, जब ऑस्ट्रेलिया ने एशेज सीरीज अपने नाम की। दिलचस्प बात यह रही कि उसी एडिलेड टेस्ट में उन्हें शुरुआत में टीम से बाहर रखा गया था, लेकिन स्टीव स्मिथ की चोट के कारण आखिरी समय में मौका मिला। वहां ख्वाजा की 82 और 40 रनों की पारियों ने सीरीज जीत में अहम भूमिका निभाई, लेकिन तब तक वह जान चुके थे कि उनका सफर अब पूरा हो चुका है।

Usman Khawaja Speaks Out on Racial Stereotyping: “I Want the Journey for the Next Usman Khawaja to Be Easier”
उस्मान ख्वाजा - फोटो : @cricketcomau
जूनियर सिस्टम में झेला नस्लवाद
ख्वाजा ने जूनियर क्रिकेट के अनुभवों को याद करते हुए कहा कि रास्ता आसान नहीं था। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के जूनियर सिस्टम को 'व्हाइट-डॉमिनेटेड' बताते हुए कहा कि वहां उन्हें नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ा। इस्लामाबाद में जन्मे और बचपन में सिडनी आए ख्वाजा, ऑस्ट्रेलिया के पहले मुस्लिम टेस्ट क्रिकेटर हैं। उन्होंने राजनीतिक और मानवीय मुद्दों पर खुलकर राय रखी, जिसके चलते वह अक्सर आलोचना के केंद्र में रहे। दो साल पहले, जब उन्होंने 'स्वतंत्रता एक मानव अधिकार है' और 'सभी जीवन समान हैं' लिखे जूते पहनने की कोशिश की थी, तो आईसीसी ने इसकी अनुमति नहीं दी थी।

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया में बदलाव की कोशिश
ख्वाजा ने मैदान के बाहर भी बदलाव की दिशा में काम किया है। वह 2023 में लॉन्च हुए क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के मल्टीकल्चरल एक्शन प्लान को आकार देने में अहम भूमिका निभा चुके हैं। उन्होंने कहा, 'अभी भी चुनौतियां हैं, लेकिन क्रिकेट अब पहले से बेहतर जगह पर है।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'ऑस्ट्रेलिया एक मल्टीकल्चरल देश है। क्रिकेट में भागीदारी भी दिखती है, खासकर सबकॉन्टिनेंट बैकग्राउंड के खिलाड़ियों की, लेकिन यह हमेशा राष्ट्रीय टीम में नजर नहीं आती। मैं समझता हूं कि ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम में जगह बनाना बेहद मुश्किल है। सिर्फ 11 स्थान होते हैं। यह आसान नहीं है और हम किसी को यूं ही जगह नहीं देना चाहते, लेकिन फिर भी कहीं-न-कहीं एक अंतर्धारा बनी हुई है और अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना बाकी है।'

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उस्मान ख्वाजा - फोटो : usman_khawajy
'अगले उस्मान ख्वाजा का सफर आसान हो'
ख्वाजा का सबसे भावुक बयान यही था, 'मैं चाहता हूं कि अगले उस्मान ख्वाजा का सफर थोड़ा आसान हो और किसी पीढ़ी में ऐसा समय आए कि उस्मान ख्वाजा का सफर जॉन स्मिथ जैसा ही हो।'

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का समर्थन
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के सीईओ टॉड ग्रीनबर्ग ने ख्वाजा की बातों से सहमति जताई। उन्होंने कहा, 'एक खेल और एक समाज के रूप में हमें अभी काम करना है, लेकिन हम सही रास्ते पर हैं। उस्मान ने क्रिकेट को पहले से बेहतर बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।'
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