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लक्ष्मण बोले: सीरीज के दौरान नहीं हो सकता यो-यो टेस्ट, इसलिए लाया गया ब्रोंको; CoE की आलोचना पर दिया यह जवाब
Sun, 09 Aug 2026 01:54 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Sun, 09 Aug 2026 01:54 PM IST
सार
वीवीएस लक्ष्मण ने बताया कि सीरीज के दौरान खिलाड़ियों का यो-यो टेस्ट करना संभव नहीं होता, इसलिए फिटनेस की लगातार निगरानी के लिए एड्रियन द्वारा तैयार ब्रोंको टेस्ट को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन की फिटनेस को अलग-अलग मानकों पर परखा गया और खेलने की मंजूरी देने से पहले उन्हें एक पैरामीटर से दूसरे पैरामीटर तक ले जाया गया।
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वीवीएस लक्ष्मण
- फोटो : ANI
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विस्तार
भारतीय क्रिकेट में बढ़ती चोटों के बीच बंगलूरू स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) पर सवाल उठ रहे हैं। खिलाड़ियों की रिहैबिलिटेशन प्रक्रिया, फिटनेस आकलन और स्पोर्ट्स साइंस टीम और राष्ट्रीय चयन समिति के बीच तालमेल को लेकर आलोचना के बीच सीओई के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण ने संस्थान का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि सीओई की भूमिका केवल चोटिल खिलाड़ियों के रिहैबिलिटेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य क्रिकेटरों को बेहतर बनाने और उत्कृष्टता हासिल करने में मदद करना भी है।
लक्ष्मण ने बताया कि भारतीय खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर टीम मैनेजमेंट अब लगातार निगरानी पर जोर दे रहा है। उन्होंने कहा कि किसी सीरीज के दौरान खिलाड़ियों का पारंपरिक यो-यो टेस्ट कराना संभव नहीं होता। ऐसे में फिटनेस पर नजर बनाए रखने के लिए ब्रोंको टेस्ट को इस्तेमाल में लाया गया है।
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लक्ष्मण ने बताया कि भारतीय खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर टीम मैनेजमेंट अब लगातार निगरानी पर जोर दे रहा है। उन्होंने कहा कि किसी सीरीज के दौरान खिलाड़ियों का पारंपरिक यो-यो टेस्ट कराना संभव नहीं होता। ऐसे में फिटनेस पर नजर बनाए रखने के लिए ब्रोंको टेस्ट को इस्तेमाल में लाया गया है।
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हार्दिक और बुमराह
- फोटो : PTI
लगातार फिटनेस की निगरानी के लिए ब्रोंको टेस्ट
लक्ष्मण ने बताया कि ब्रोंको टेस्ट के जरिए सीरीज के दौरान भी खिलाड़ियों की फिटनेस को लगातार मॉनिटर किया जा सकता है। इसे एड्रियन ने तैयार किया है। लक्ष्मण ने कहा, 'जब कोई खिलाड़ी सीरीज का हिस्सा होता है, तब यो-यो टेस्ट नहीं किया जा सकता। इसलिए हमने एड्रियन द्वारा तैयार किया गया ब्रोंको टेस्ट पेश किया है, ताकि फिटनेस की लगातार निगरानी की जा सके।' इस व्यवस्था का मकसद खिलाड़ियों पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना उनकी फिटनेस की स्थिति पर नजर रखना है। इससे टीम मैनेजमेंट को यह समझने में मदद मिलती है कि खिलाड़ी मैच खेलने के लिए किस स्तर तक तैयार है।
बुमराह और साई सुदर्शन की फिटनेस पर खास नजर
लक्ष्मण ने बताया कि ब्रोंको टेस्ट के जरिए सीरीज के दौरान भी खिलाड़ियों की फिटनेस को लगातार मॉनिटर किया जा सकता है। इसे एड्रियन ने तैयार किया है। लक्ष्मण ने कहा, 'जब कोई खिलाड़ी सीरीज का हिस्सा होता है, तब यो-यो टेस्ट नहीं किया जा सकता। इसलिए हमने एड्रियन द्वारा तैयार किया गया ब्रोंको टेस्ट पेश किया है, ताकि फिटनेस की लगातार निगरानी की जा सके।' इस व्यवस्था का मकसद खिलाड़ियों पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना उनकी फिटनेस की स्थिति पर नजर रखना है। इससे टीम मैनेजमेंट को यह समझने में मदद मिलती है कि खिलाड़ी मैच खेलने के लिए किस स्तर तक तैयार है।
बुमराह और साई सुदर्शन की फिटनेस पर खास नजर
- लक्ष्मण ने बताया कि जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन को फिटनेस के आधार पर विशेष रूप से परखा गया। दोनों खिलाड़ियों की फिटनेस को अलग-अलग मानकों पर जांचा गया और खेलने की मंजूरी देने से पहले उनकी स्थिति का कई स्तरों पर आकलन किया गया।
- उन्होंने कहा, 'जसप्रीत बुमराह और बी. साई सुदर्शन को फिटनेस के आधार पर विशेष रूप से परखा गया। खेलने की मंजूरी देने से पहले हम उन्हें एक पैरामीटर से दूसरे पैरामीटर तक ले जाते हैं। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और टीम मैनेजमेंट के बीच संवाद काफी सहज है।'
साई सुदर्शन
- फोटो : PTI
सीओई और टीम मैनेजमेंट के बीच बेहतर तालमेल
लक्ष्मण ने यह भी बताया कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और भारतीय टीम के मैनेजमेंट के बीच लगातार संवाद बना हुआ है। खिलाड़ियों की फिटनेस और उनकी वापसी को लेकर दोनों पक्ष एक-दूसरे के संपर्क में रहते हैं। इस व्यवस्था से चोट से वापसी कर रहे खिलाड़ियों के लिए फिटनेस का आकलन चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी खिलाड़ी को पूरी तरह फिट हुए बिना मैदान पर उतारने का जोखिम न लिया जाए।
'सीओई सिर्फ रिहैब सेंटर नहीं'
बंगलूरू में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लक्ष्मण ने कहा कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को केवल चोटिल खिलाड़ियों के इलाज और वापसी के केंद्र के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। लक्ष्मण ने कहा, 'सीओई सिर्फ एक रिहैब सेंटर नहीं है। क्रिकेटरों को उत्कृष्टता हासिल करने में मदद करने के लिए इसकी और भी बड़ी भूमिकाएं हैं।' उन्होंने कहा कि संस्थान खिलाड़ियों की फिटनेस और प्रदर्शन से जुड़े कई पहलुओं पर काम करता है।
लक्ष्मण ने यह भी बताया कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और भारतीय टीम के मैनेजमेंट के बीच लगातार संवाद बना हुआ है। खिलाड़ियों की फिटनेस और उनकी वापसी को लेकर दोनों पक्ष एक-दूसरे के संपर्क में रहते हैं। इस व्यवस्था से चोट से वापसी कर रहे खिलाड़ियों के लिए फिटनेस का आकलन चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी खिलाड़ी को पूरी तरह फिट हुए बिना मैदान पर उतारने का जोखिम न लिया जाए।
'सीओई सिर्फ रिहैब सेंटर नहीं'
बंगलूरू में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लक्ष्मण ने कहा कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को केवल चोटिल खिलाड़ियों के इलाज और वापसी के केंद्र के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। लक्ष्मण ने कहा, 'सीओई सिर्फ एक रिहैब सेंटर नहीं है। क्रिकेटरों को उत्कृष्टता हासिल करने में मदद करने के लिए इसकी और भी बड़ी भूमिकाएं हैं।' उन्होंने कहा कि संस्थान खिलाड़ियों की फिटनेस और प्रदर्शन से जुड़े कई पहलुओं पर काम करता है।
वीवीएस लक्ष्मण
- फोटो : BCCI
चोटों के लिए किसी को जिम्मेदार ठहराने से इनकार
भारतीय खिलाड़ियों की बढ़ती चोटों के बीच लक्ष्मण ने किसी व्यक्ति या विभाग को जिम्मेदार ठहराने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि चोटें पेशेवर क्रिकेटर के करियर का हिस्सा हैं और ऐसे में खिलाड़ियों की लगातार निगरानी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा, 'चोटें किसी भी खिलाड़ी के करियर का हिस्सा होती हैं। इसलिए निगरानी की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है। और हम दोष शब्द का इस्तेमाल नहीं करते, क्योंकि ऐसा करने पर हम किसी को बलि का बकरा बनाने की कोशिश कर रहे होंगे।'
भारतीय खिलाड़ियों की बढ़ती चोटों के बीच लक्ष्मण ने किसी व्यक्ति या विभाग को जिम्मेदार ठहराने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि चोटें पेशेवर क्रिकेटर के करियर का हिस्सा हैं और ऐसे में खिलाड़ियों की लगातार निगरानी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा, 'चोटें किसी भी खिलाड़ी के करियर का हिस्सा होती हैं। इसलिए निगरानी की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है। और हम दोष शब्द का इस्तेमाल नहीं करते, क्योंकि ऐसा करने पर हम किसी को बलि का बकरा बनाने की कोशिश कर रहे होंगे।'
अजीत अगरकर, देवाजीत सैकिया
- फोटो : IANS
बीसीसीआई सचिव सीओई का करेंगे दौरा
व्हाइट-बॉल खिलाड़ियों का भी चल रहा रिहैब
सीओई में फिलहाल कई सीमित ओवरों के विशेषज्ञ खिलाड़ियों की रिहैबिलिटेशन भी चल रही है। इनमें हार्दिक पांड्या, वरुण चक्रवर्ती और प्रिंस यादव शामिल हैं। इस बीच बंगलूरू की सुविधा में स्पोर्ट्स साइंस टीम पर काम का दबाव भी काफी बढ़ गया है। 2025 की शुरुआत में नितिन पटेल के इस्तीफे के बाद बीसीसीआई के पास स्पोर्ट्स साइंस विभाग का कोई स्थायी प्रमुख नहीं है। फिलहाल धनंजय कौशिक बंगलूरू स्थित सुविधा में स्पोर्ट्स साइंस से जुड़े संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
- चोटिल खिलाड़ियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पहुंचने की उम्मीद है। वह वीवीएस लक्ष्मण से मुलाकात कर खिलाड़ियों की रिहैबिलिटेशन और इंजरी मैनेजमेंट व्यवस्था का जायजा ले सकते हैं।
- भारत को श्रीलंका सीरीज में साई सुदर्शन, हर्षित राणा, नीतीश कुमार रेड्डी और वॉशिंगटन सुंदर की फिटनेस संबंधी परेशानियों से भी जूझना पड़ रहा है। तेज गेंदबाज आकाश दीप भी लंबे समय से पीठ के निचले हिस्से में स्ट्रेस फ्रैक्चर के कारण बाहर हैं।
व्हाइट-बॉल खिलाड़ियों का भी चल रहा रिहैब
सीओई में फिलहाल कई सीमित ओवरों के विशेषज्ञ खिलाड़ियों की रिहैबिलिटेशन भी चल रही है। इनमें हार्दिक पांड्या, वरुण चक्रवर्ती और प्रिंस यादव शामिल हैं। इस बीच बंगलूरू की सुविधा में स्पोर्ट्स साइंस टीम पर काम का दबाव भी काफी बढ़ गया है। 2025 की शुरुआत में नितिन पटेल के इस्तीफे के बाद बीसीसीआई के पास स्पोर्ट्स साइंस विभाग का कोई स्थायी प्रमुख नहीं है। फिलहाल धनंजय कौशिक बंगलूरू स्थित सुविधा में स्पोर्ट्स साइंस से जुड़े संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।