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Uttarakhand: भगवत गीता सिर्फ हिंदुओं के लिए नहीं जो पढ़ेगा उसे लगेगा मेरे लिए : स्वामी ज्ञानानंद महाराज

वत्सल गुप्ता, संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Fri, 16 Jan 2026 10:54 AM IST
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सार

अमर उजाला से विशेष बातचीत में बोले गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि गीता सिर्फ हिंदुओं के लिए नहीं जो पढ़ेगा उसे लगेगा मेरे लिए है। कहा कि गीता पढ़ने से क्षमता बढ़ती है। आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

Bhagavad Gita is not just for Hindus whoever reads it will feel its meant for them:  Swami Gyananand Maharaj
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गीता हिंदुओं की आस्था का ग्रंथ है। यह केवल हिंदुओं के लिए नहीं है। गीता को जो पढ़ेगा उसे लगेगा गीता मेरे लिए है। चुनौतियों को भी चुनौती देने की क्षमता भगवत गीता में है। महाभारत के समय अर्जुन भ्रमित थे, आज उसी प्रकार युवा भी समस्याओं, आशंकाओं और दुविधाओं में हैं। ये बातें गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहीं।

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स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि जीवन की चुनौती, संघर्ष ही आज का महाभारत है। आज वैज्ञानिक सुविधाएं बढ़ी हैं तो समस्याएं, चिंता भी बढ़ी है। भगवत गीता युवाओं को सकारात्मक और रचनात्मक ऊर्जा का संचार करने की प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि गीता मुख्य रूप से युवाओं के लिए ही है। युवाओं में कितनी बड़ी ऊर्जा है वह उसे पहचान नहीं पाते।
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गीता पढ़ते-पढ़ते क्षमता बढ़ जाती
आज के समय में युवा मोबाइल, इंटरनेट की दुनिया में उलझा हुआ है। गीता कहती है कि जब तक आप अपने अंदर की जिज्ञासा को अच्छा बनने के लिए नहीं जगाओगे तब तक उलझे रहोगे। महाराज ने कहा कि गीता पढ़ते-पढ़ते क्षमता बढ़ जाती है जिससे आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि अब रिश्तों में वो आत्मीयता नहीं रही। जब तक आप दूसरों के भाव का सम्मान नहीं करोगे तो रिश्ते पक्के नहीं होंगे। प्रेम चाहते हो तो प्रेम बांटना पड़ेगा। गीता पारस्परिक प्रेम बढ़ाकर रिश्ते को मजबूत करने का ग्रंथ है। उन्होंने कहा कि गीता मेंं हर प्रश्न का उत्तर और समस्या का समाधान है। 

तुम खुद ही अपने मित्र, स्वयं ही शत्रु
उन्होंने कहा कि गीता का हर श्लोक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक है। गीता कहती है कि तुम खुद ही अपने मित्र हो, स्वयं ही अपने शत्रु हो। बुरी आदत में उलझोगे तो अपने शत्रु बनोगे। स्वयं से स्वयं को जगाओ। उन्होंने कहा कि जीवन ही चुनौतियों का नाम है। चुनौतियां जब तक जीवन में नहीं हैं आगे बढ़ने की दृढ़ता भी नहीं बन पाती है। एक भ्रांति बनाई गई कि गीता सिर्फ संन्यासियों के लिए, मंदिरों में रखने के लिए है। गीता में सब कुछ है वह हर क्षेत्र के लिए है। बच्चों के लिए, युवाओं के लिए भी शोध किया जा रहा है।

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गीता में हर प्रश्न का उत्तर

गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने अपने जीवन के बारे में बताते हुए कहा कि पढ़ाई के दिन से ही मन में जीवन के लिए कुछ प्रश्न थे। प्रश्न के उत्तर के रूप में गुरु का सानिध्य मिला और भगवत गीता की प्रेरणा मिली। इसमें पाया कि गीता में हर प्रश्न का उत्तर है और हर समस्या का समाधान है।

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