नंदा देवी कोर जोन: जैव विविधता के अध्ययन के लिए 85 सदस्यीय दल रवाना, वन मंत्री ने दिखाई हरी झंडी
नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान के कोर क्षेत्र में प्रत्येक दस वर्ष बाद जैव विविधता और पर्यावरणीय परिवर्तनों के आकलन के लिए वैज्ञानिक अभियान संचालित किया जाता है। इस दौरान विशेषज्ञ क्षेत्र की पारिस्थितिकी, वन्यजीवों, वनस्पतियों और प्राकृतिक संसाधनों का विस्तृत अध्ययन कर आंकड़े एकत्र करते हैं।
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विश्व धरोहर नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान के कोर जोन में जैव विविधता एवं पर्यावरणीय परिवर्तनों के अध्ययन के लिए रविवार को "नंदा देवी बायोडायवर्सिटी मॉनिटरिंग एक्सपीडिशन-2026" का शुभारंभ किया गया। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने मोनाल विश्राम गृह से अभियान दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। अभियान में 30 सदस्यीय कोर टीम सहित पोर्टरों समेत कुल 85 सदस्य शामिल हैं।
अभियान में वन विभाग, वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, जी.बी. पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान, आईटीबीपी, एसडीआरएफ तथा अन्य संस्थानों के वैज्ञानिक और विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। लाता गांव पहुंचने पर दल ने नंदा देवी मंदिर में पूजा-अर्चना की और इसके बाद अपने निर्धारित अभियान के लिए रवाना हो गया।
नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान के कोर क्षेत्र में प्रत्येक दस वर्ष बाद जैव विविधता और पर्यावरणीय परिवर्तनों के आकलन के लिए वैज्ञानिक अभियान संचालित किया जाता है। इस दौरान विशेषज्ञ क्षेत्र की पारिस्थितिकी, वन्यजीवों, वनस्पतियों और प्राकृतिक संसाधनों का विस्तृत अध्ययन कर आंकड़े एकत्र करते हैं।
28 जून तक चलने वाले इस अभियान में वैज्ञानिक ग्लेशियरों की स्थिति का आकलन करेंगे और हिम तेंदुआ, भरल और मोनाल जैसे दुर्लभ वन्यजीवों की निगरानी करेंगे। साथ ही क्षेत्र में पाई जाने वाली लुप्तप्राय औषधीय वनस्पतियों और जड़ी-बूटियों का भी अध्ययन किया जाएगा। सर्वेक्षण कार्य को अधिक सटीक बनाने के लिए ड्रोन, जीआईएस तथा अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान हिमालयी जैव विविधता का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां होने वाले वैज्ञानिक अध्ययन संरक्षण योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होंगे। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत इस प्रकार के अभियान संचालित किए जाते हैं। साथ ही उन्होंने भविष्य में इस अभियान को प्रत्येक पांच वर्ष में आयोजित करने का प्रस्ताव रखने की बात कही, जिससे अधिक वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और वन अधिकारियों को इसमें भागीदारी का अवसर मिल सके।