पहाड़ी खीरे, कई तरह की पकौड़ियां, रायता आदि का स्वाद लेने के लिए राजधानी में शनिवार को ईसी रोड स्थित एक वेडिंग हॉल में कांग्रेसियों का हुजूम उमड़ा। पहाड़ी उत्पादों की दावत के मेजबान और उत्तराखंड के पूर्व सीएम ने इस बहाने अपने को अपनों से जोड़ा, भाजपा पर कसकर तंज कसे और पहाड़ी खीरे और रायते के फायदे गिनाए।
इस बार सीएम को न्यौता न देने पर रावत ने कहा कि भाजपा का काम रायता फैलाना है। यह एक तरह से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पर हरीश रावत का पलटवार भी था। एक दिन पहले ही सीएम त्रिवेंद्र ने कहा था कि हरीश रावत रायता फैला रहे हैं। यूं तो हरीश रावत को काफल से लेकर भुट्टों, आम, भुट्टों आदि की दावतों के लिए भी जाना जाता है, लेकिन शनिवार की दावत कई मायनों में अलग थी।
30 सितंबर को हरीश रावत को स्टिंग मामले में हाईकोर्ट में पेश होना है। इसी मामले को लेकर भाजपा आक्रामक रुख अपनाए हुए है। पिछली सुनवाई में रावत ने नैनीताल स्थित हाईकोर्ट की ओर रुख करते समय फेसबुक पेज पर अपील भी जारी की थी। अब नैनीताल की ओर रुख करने से पहले उन्होंने पहाड़ी खीरे की दावत का इंतजाम कर समर्थकों से सीधी मुलाकात का रास्ता भी निकाल लिया।
कुछ पहाड़ी व्यंजनों की खुशबू और कुछ अपने नेता की अपील का असर हुआ कि आयोजन स्थल की ओर खासी संख्या में कांग्रेसी नेताओं ने रुख किया। हरीश रावत ने भी माइक संभाला और समर्थकों को भाजपा से सावधान रहने को कहा। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के अलावा पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी, दिनेश अग्रवाल, हीरा सिंह बिष्ट, ममता राकेश, राजकुमार, जोत सिंह गुनसाला, मनोज रावत, जोत सिंह बिष्ट सहित अन्य कई कांग्रेसी नेता इस दावत में शामिल हुए।
हरीश रावत ने इससे पहले आम पार्टी दी थी तो मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी इस पार्टी में पहुंचे थे। यही वजह रही कि हरीश रावत के समर्थक इस बार की पार्टी में हरीश रावत से सीएम के पार्टी में न पहुंचने के बारे में भी बात करते दिखाई दिए।