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शिक्षकों की नियुक्ति के मामले में नहीं हुआ न्यायालय के आदेश का पालन : जुगरान
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- याचिकाकर्ता रविंद्र जुगरान ने कहा, महादेवी कन्या महाविद्यालय बंदी की कगार पर
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। भाजपा नेता और याचिकाकर्ता रविंद्र जुगरान ने कहा, प्रदेश के अशासकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों, कर्मचारियों की नियुक्ति न होने से इनमें छात्र-छात्राओं की संख्या तेजी से घटती जा रही है। उन्होंने कहा, महादेवी कन्या महाविद्यालय में 80 प्रतिशत पद खाली हैं। जिससे महाविद्यालय बंदी की कगार पर है। उन्होंने बताया कि इस प्रकरण में उन्होंने अवमानना याचिका दाखिल की है।
याचिकाकर्ता के मुताबिक अशासकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों के वेतन के मसले पर उन्होंने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी। जिस पर वर्ष 2021 में हाईकोर्ट ने स्पष्ट फैसला दिया था कि वेतन के मसले पर राज्य और केंद्र सरकार निर्णय लें। वहीं, महाविद्यालयों के रखरखाव का दायित्व राज्य सरकार का है। जुगरान ने कहा, हाईकोर्ट के फैसले के बाद भी राज्य के 10 अशासकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई। जिससे देहरादून के एमकेपी पीजी कॉलेज में विभिन्न विषयों में शिक्षक न होने से छात्राओं की संख्या घटती जा रही है। कभी 3500 छात्रा संख्या वाले महाविद्यालय में छात्राओं की संख्या अब बहुत कम रह गई है। यही स्थिति रही तो बालिका महाविद्यालय अगले कुछ वर्षों में बंद हो सकता है। जुगरान के मुताबिक प्रकरण में उनकी ओर से अवमानना याचिका दाखिल की गई है। जिस पर हाईकोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। प्रकरण की अगली सुनवाई मई के पहले सप्ताह में होगी।
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देहरादून। भाजपा नेता और याचिकाकर्ता रविंद्र जुगरान ने कहा, प्रदेश के अशासकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों, कर्मचारियों की नियुक्ति न होने से इनमें छात्र-छात्राओं की संख्या तेजी से घटती जा रही है। उन्होंने कहा, महादेवी कन्या महाविद्यालय में 80 प्रतिशत पद खाली हैं। जिससे महाविद्यालय बंदी की कगार पर है। उन्होंने बताया कि इस प्रकरण में उन्होंने अवमानना याचिका दाखिल की है।
याचिकाकर्ता के मुताबिक अशासकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों के वेतन के मसले पर उन्होंने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी। जिस पर वर्ष 2021 में हाईकोर्ट ने स्पष्ट फैसला दिया था कि वेतन के मसले पर राज्य और केंद्र सरकार निर्णय लें। वहीं, महाविद्यालयों के रखरखाव का दायित्व राज्य सरकार का है। जुगरान ने कहा, हाईकोर्ट के फैसले के बाद भी राज्य के 10 अशासकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई। जिससे देहरादून के एमकेपी पीजी कॉलेज में विभिन्न विषयों में शिक्षक न होने से छात्राओं की संख्या घटती जा रही है। कभी 3500 छात्रा संख्या वाले महाविद्यालय में छात्राओं की संख्या अब बहुत कम रह गई है। यही स्थिति रही तो बालिका महाविद्यालय अगले कुछ वर्षों में बंद हो सकता है। जुगरान के मुताबिक प्रकरण में उनकी ओर से अवमानना याचिका दाखिल की गई है। जिस पर हाईकोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। प्रकरण की अगली सुनवाई मई के पहले सप्ताह में होगी।
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