Encounter: दोनों भाई थे कुख्यात बदमाश, एक यूपी पुलिस की गोली का निशाना बना, दूसरा उत्तराखंड में हुआ ढेर
Dehradun Crime News: असलम उत्तर प्रदेश में पांच डकैतियों को अंजाम दे चुका था। अब आठ साल बाद अकरम को देहरादून पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया।
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नकरौंदा डकैती व हत्याकांड का आरोपी अकरम और उसका भाई असलम दोनों ही कुख्यात बदमाश थे। असलम की सहारनपुर और शामली में अपने गैंग के साथ कई अपराधों में सक्रिय भूमिका रही थी। वर्ष 2017 में असलम नोएडा पुलिस की गोली का शिकार बन गया था।
असलम उत्तर प्रदेश में पांच डकैतियों को अंजाम दे चुका था। अब आठ साल बाद अकरम को देहरादून पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया। डकैती व हत्याकांड के लगभग सभी आरोपी कभी न कभी पुलिस की गोली खा चुके हैं। यूपी पुलिस से मुठभेड़ में चार साल पहले नदीम के पैर में गोली लगी थी। दरअसल 10 सितंबर 2014 को नकरौंदा में कृषि अधिकारी सुरेंद्र थपलियाल के घर खिड़की की जाली निकालकर छह सशस्त्र बदमाश घुसे थे। इस दौरान थपलियाल परिवार भी जाग गया तो बदमाशों ने उन्हें हथियारों के बल पर बंधक बना लिया। घर में मौजूद सुरेंद्र थपलियाल का इकलौता बेटा 23 वर्षीय अंकित अकरम के साथ भिड़ गया।
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अंकित अकरम पर हावी होने लगा था तो अकरम ने गोली चला दी। इससे अंकित की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने जांच शुरू की तो करीब एक महीने बाद एक बदमाश नदीम को गिरफ्तार किया गया। उससे पूछताछ में पांच और बदमाशों के नाम पता चले। इनमें अकरम, साजिद उर्फ सोनू, साजिद उर्फ पहलवान, सज्जाद उर्फ यामीन और अखलाक शामिल थे। कुछ दिनों के बाद चार और गिरफ्तार हो गए। जबकि, अकरम का कहीं पता नहीं चल पा रहा था।
पुलिस ने शामली स्थित उसके घर की कुर्की भी कराई। उस पर 50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया। इसी बीच सात मार्च 2017 को पुलिस ने अकरम को गुजरात के सूरत में एक ढाबे से गिरफ्तार कर लिया। अकरम वहां पर सलीम नाम से रहकर काम कर रहा था। अकरम को कुछ समय जेल में रहने के बाद न्यायालय से जमानत मिल गई। तब से वह कई अपराधों में शामिल रहा। पिछले साल 25 मार्च को क्लेमेंटटाउन पुलिस ने चोरी के आरोप में भी उसे गिरफ्तार किया। एक चोरी को उसने पटेलनगर थाना क्षेत्र में भी अंजाम दिया।
साजिद उर्फ सोनू नहीं आ रहा तारीख पर
अंकित हत्याकांड का मुकदमा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की कोर्ट में विचाराधीन है। इसमें साजिद उर्फ सोनू लंबे समय से तारीखों पर नहीं आ रहा है। ऐसे में कोर्ट ने उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए हैं। जबकि अकरम और बाकी सभी लगातार तारीख पर आ रहे थे।
हत्याकांड के बाद हुआ था बड़ा आंदोलन
अंकित हत्याकांड के बाद लोगों ने बड़ा आंदोलन किया था। तत्कालीन एडीजी कानून व्यवस्था राम सिंह मीणा ने तत्काल वहां पर एक चौकी स्थापित करने के आदेश दिए थे। इसके बाद से ही वहां पर बालावाला चौकी बनी। लोगों ने आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर बड़ा आंदोलन किया। दो दिनों तक हरिद्वार हाईवे जाम कर दिया। उस वक्त लोग तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत से भी कई बार मिले थे। पुलिस मुख्यालय का भी घेराव हुआ।
