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अलर्ट: सपनों का घर बनाने और कारोबार के लिए जमीन खरीदने से पहले सौ बार सोच लें, दून में जालसाज ऐसे हैं फंसा रहे

Tue, 15 Sep 2026 02:55 PM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Tue, 15 Sep 2026 02:55 PM IST
सार

दून के आसपास जमीन खरीदना फायदे का सौदा समझकर की गई जल्दबाजी भारी पड़ सकती है। प्रतिबंधित खसरों की खरीद-फरोख्त के बावजूद लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं और जीवनभर की कमाई गंवा रहे हैं।

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देहरादून - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सपनों का घर बनाने और कारोबार के लिए कोई शहर के आसपास जमीन खरीदने से पहले एक बार नहीं बल्कि 100 बार सोच लें। यहां देश के बड़े-बड़े जालसाजों की जमीनें हैं जिनमें निवेश किया तो फंसना तय है। यहां गोल्डन फॉरेस्ट और पीएसीएल जैसी कंपनियों की सैकड़ों हेक्टेयर जमीनें हैं जिन पर दशकों से विवाद चल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यहां खरीद फरोख्त पर मनाही है। बावजूद इसके हर साल दर्जनों लोग जमीन बेचने वालों के झांसे में आकर अपनी जीवनभर की कमाई लुटा देते हैं।

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बता दें कि पीएसीएल और गोल्डन फॉरेस्ट ने देशभर के लोगों से जमा योजना चलाकर अरबो रुपये की ठगी की। इनकी सभी संपत्तियों को सेबी के अधीन अटैच किया गया है। इनकी खरीद फरोख्त पर प्रतिबंध लागू है। इनकी ज्यादातर संपत्तियां विकासनगर क्षेत्र में है। जिले में प्रतिबंधित खसरों की बात करें तो 73 ऐसे खसरा संख्या हैं जिनकी खरीद फरोख्त पर रोक लगी हुई है।

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इनमें से 52 खसरे विकासनगर क्षेत्र के हैं। इनके अलावा स्थानीय अदालतों और हाईकोर्ट के आदेश पर भी कई खसरा प्रतिबंधित हैं। इनकी सूची प्रशासन ने ई-रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर भी अपलोड की हुई हैं। यही नहीं सब रजिस्ट्रार कार्यालयों में भी इन खसरों की सूची को चस्पा किया हुआ है। प्रशासनिक अधिकारी निवेशकों से इन खसरों की जानकारी लेकर ही निवेश करने की सलाह देते हैं।

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25 से ज्यादा एफआईआर हुईं

प्रतिबंध के बावजूद बिचौलिया भोले भाले लोगों को इन जमीनों का सौदा करने में सफल हो जाते हैं। इसी साल फरवरी में एक महिला को पीएसीएल की संपत्ति को बेचने का मामला सामने आया था जिसमें पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की। इसके अलावा गोल्डन फॉरेस्ट की कई संपत्तियों को बेचे जाने के मामले भी समय-समय पर सामने आते हैं। बीते पांच वर्षों के भीतर ऐसी करीब 25 प्राथमिकियां विभिन्न थानों में दर्ज की जा चुकी हैं। चार साल पहले एसटीएफ ने भी एक गिरोह का भंडाफोड़ किया था।

सरकारी और वन भूमि की भी करें जांच

देहरादून और इसके आसपास आरक्षित वन भूमि भी है। कई मामले बीते वर्षों में ऐसी जमीनों के खरीद फरोख्त के भी सामने आए जिनमें आरक्षित वन भूमि का ही सौदा कर दिया गया। इसके अलावा नदी क्षेत्र की भूमि का क्रय विक्रय करना प्रतिबंधित है। ऐसी जगहों में रायपुर और ऋषिकेश के बहुत से इलाके शामिल हैं जहां आरक्षित वन भूमि है।

शहर में इन जगहों का रखें ध्यान

अजबपुर कलां (श्रेणी ई)

मोथरोंवाला (श्रेणी-सी)

हरिद्वार रोड पर लच्छीवाला फलाईओवर के बाद से डोईवाला टाउन एरिया क्षेत्र के प्रारम्भ होने तक (श्रेणी वन)

बलवीर रोड (श्रेणी ए)

हिमालयन अपार्टमेंट

चाय बाग कोलागढ़

मिटठी बेहड़ी (श्रेणी-सी)

लक्ष्मण चौक (श्रेणी सी)

बंजारावाला (श्रेणी-ए)

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प्रतिबंधित खसरों की सूची ऑनलाइन उपलब्ध है। इसे ई-रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर देखा जा सकता है। इसके अलावा सभी सब रजिस्ट्रार कार्यालयों में भी सूची को चस्पा किया गया है। लोगों से अपील है कि वे निवेश से पहले इसकी पूरी तरह पड़ताल कर लें। -केके मिश्रा, एडीएम फाइनेंस

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