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Haridwar: होली 2026, शीत ऋतु की विदाई और वसंत के आगमन, स्वास्थ्य की दिक्कतों पर रहना होगा सावधान

संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार Published by: Renu Saklani Updated Tue, 03 Mar 2026 03:02 PM IST
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सार

होली रंग, रस और स्वास्थ्य का आयुर्वेदिक उत्सव है। शीत ऋतु की विदाई और वसंत के आगमन पर स्वास्थ्य की दिक्कतों पर सावधान रहना जरूरी है।

Holi Ayurvedic festival of color flavor, and health. With the arrival of spring cautious about health concerns
Holi 2026 - फोटो : Adobe
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विस्तार

शीत ऋतु की विदाई और वसंत के आगमन पर रंगों के पर्व होली पर चिकित्सक लोगों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। आयुर्वेद चिकित्सकों का कहना है कि इस समय शरीर में कफ दोष बढ़ने लगता है, जिससे जुकाम, खांसी, सुस्ती और पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे समय में होली के रंग, पकवान, गीत-संगीत और हास्य मिलकर प्राकृतिक चिकित्सा का कार्य करते हैं।

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वरिष्ठ चिकित्सक व आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. अवनीश उपाध्याय का कहना है कि होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि ऋतु परिवर्तन के साथ शरीर, मन और समाज को संतुलित करने वाला अद्भुत आयुर्वेदिक पर्व है। फाल्गुन पूर्णिमा के आसपास शीत ऋतु विदा होती है और वसंत का आगमन होता है। अनुसार इस समय कई समस्याओं के प्रति सजग रहना चाहिए।

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प्राकृतिक रंगों का मिलता है लाभ

विशेषज्ञ कहते हैं कि रासायनिक रंग त्वचा और आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। होली के रंग प्राकृतिक और औषधीय गुणों से युक्त होने चाहिए। इसमें टेसू (पलाश) के फूल से बना केसरिया रंग त्वचा रोगों में लाभकारी होता है। हल्दी और बेसन पीला रंग बनाते हैं, जो त्वचा को एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियल सुरक्षा देता है। चुकंदर गुलाबी या लाल रंग देता है, जो त्वचा को पोषण प्रदान करता है। मेहंदी और पालक हरे रंग के लिए उपयोगी हैंं जो त्वचा को ठंडक और पोषण देता है।

होली के पकवान का महत्व

होली पर पारंपरिक पकवान भी स्वास्थ्य के संतुलन के लिए होते हैं। इसमें गुजिया, जिसमें मेवा, नारियल और खोया होता है जो शरीर को ऊर्जा और पोषण देता है। दही बड़ा पाचन को संतुलित करता है। ठंडाई में बादाम, सौंफ, काली मिर्च, तरबूज के बीज और गुलाब होते हैं, जो पाचन शक्ति बढ़ाने के साथ शरीर को शीतलता प्रदान करते हैं।


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फाग, संगीत और ध्वनि चिकित्सा

होली में गाए जाने वाले फाग केवल मनोरंजन नहीं हैं, बल्कि मनोवैज्ञानिक और चिकित्सीय प्रभाव भी उत्पन्न करते हैं। सामूहिक रूप से गाए जाने वाले गीत, ढोलक और मंजीरे की ध्वनि मन में उत्साह और ऊर्जा भर देती है। आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि संगीत और सामूहिक गायन से तनाव कम होता है, मन प्रसन्न रहता है और हार्मोन संतुलित रहते हैं। इसे हम ध्वनि और संगीत चिकित्सा का पारंपरिक रूप कह सकते हैं। होली का महत्वपूर्ण पक्ष है हंसी। लोग इस दिन एक-दूसरे से मजाक करते हैं, व्यंग्य और फाग गाते हैं। आयुर्वेद और आधुनिक मनोविज्ञान इसे हास्य चिकित्सा कहते हैं।

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