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मुझे भी विश्वास होने लगा मैं तांत्रिक हूं : हरदा
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- पूर्व सीएम हरीश रावत बोले, आलोचक हर बात में कमी निकालेंगे, मैं कभी विचलित नहीं हुआ
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व सीएम हरीश रावत अवकाश पर जाने से पार्टी में मचे घमासान व आलोचकों की टिप्पणियों पर लगातार प्रहार कर रहे हैं। रावत ने कहा, कभी-कभी मुझे भी विश्वास होने लगता है कि मैं तांत्रिक हूं। उत्तराधिकार में मिली हुई संगठनात्मक स्थिति को चुनौती देने वाले संगठन को खड़ा करने के लिए तंत्र शास्त्री होना आवश्यक था।
रावत ने कहा, वर्ष 2000 में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बना, उस समय हमें दो सदस्यों से विधानसभा में 40 सदस्यों तक पहुंचने की दरकार थी, जिससे कांग्रेस की सरकार बन सके। भाजपा ने राज्य बनाया था और संगठनात्मक रूप में वह हमसे बहुत आगे थी। सोनिया के प्रभाव से कांग्रेस वर्ष 2002 में चमत्कार कर पाई, लेकिन दुर्भाग्य से कांग्रेस सरकार के समय राज्य को बड़े पैमाने पर दैवीय आपदा आईं और सब कुछ अस्त-व्यस्त हो गया। उस समय में मेरे पास केंद्र सरकार जल संसाधन मंत्री की जिम्मेदारी थी। मैंने अपने दायित्व को बसूबी निभाया।
उसके बाद पार्टी हाईकमान ने उन्हें राज्य का मुख्यमंत्री बनाने का आदेश दिया। हमारी सरकार ने प्रयास किया कि उत्तर प्रदेश की कार्बन कॉपी के बजाय गवर्नेंस व विकास का उत्तराखंडी मॉडल तैयार करें और उस पर हम आगे भी बढ़े। वर्तमान विपक्ष में रहते हुए हर मुद्दे पर अपनी बात रखने के साथ जनता की आवाज को बुलंद करता हूं। मैं जनता के विश्वास, अपने कर्तव्य व संकल्प में अटूट आस्था रखता हूं। आलोचक हमेशा रहेंगे, जो हर बात में कमी निकालेंगे, मगर मैं न कभी विचलित नहीं हुआ और न अपने रास्ते से डिगा हूं। जिस रास्ते पर अपने लंबे सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन में चलता आया है, शेष जीवन में भी उसी रास्ते पर आगे चलता रहूंगा।
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देहरादून। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व सीएम हरीश रावत अवकाश पर जाने से पार्टी में मचे घमासान व आलोचकों की टिप्पणियों पर लगातार प्रहार कर रहे हैं। रावत ने कहा, कभी-कभी मुझे भी विश्वास होने लगता है कि मैं तांत्रिक हूं। उत्तराधिकार में मिली हुई संगठनात्मक स्थिति को चुनौती देने वाले संगठन को खड़ा करने के लिए तंत्र शास्त्री होना आवश्यक था।
रावत ने कहा, वर्ष 2000 में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बना, उस समय हमें दो सदस्यों से विधानसभा में 40 सदस्यों तक पहुंचने की दरकार थी, जिससे कांग्रेस की सरकार बन सके। भाजपा ने राज्य बनाया था और संगठनात्मक रूप में वह हमसे बहुत आगे थी। सोनिया के प्रभाव से कांग्रेस वर्ष 2002 में चमत्कार कर पाई, लेकिन दुर्भाग्य से कांग्रेस सरकार के समय राज्य को बड़े पैमाने पर दैवीय आपदा आईं और सब कुछ अस्त-व्यस्त हो गया। उस समय में मेरे पास केंद्र सरकार जल संसाधन मंत्री की जिम्मेदारी थी। मैंने अपने दायित्व को बसूबी निभाया।
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उसके बाद पार्टी हाईकमान ने उन्हें राज्य का मुख्यमंत्री बनाने का आदेश दिया। हमारी सरकार ने प्रयास किया कि उत्तर प्रदेश की कार्बन कॉपी के बजाय गवर्नेंस व विकास का उत्तराखंडी मॉडल तैयार करें और उस पर हम आगे भी बढ़े। वर्तमान विपक्ष में रहते हुए हर मुद्दे पर अपनी बात रखने के साथ जनता की आवाज को बुलंद करता हूं। मैं जनता के विश्वास, अपने कर्तव्य व संकल्प में अटूट आस्था रखता हूं। आलोचक हमेशा रहेंगे, जो हर बात में कमी निकालेंगे, मगर मैं न कभी विचलित नहीं हुआ और न अपने रास्ते से डिगा हूं। जिस रास्ते पर अपने लंबे सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन में चलता आया है, शेष जीवन में भी उसी रास्ते पर आगे चलता रहूंगा।
