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Uttarakhand: प्रदेश की नर्सरियों को पुनर्जीवित करने की तैयारी, यूरोपीय सब्जियों की भी होगी खेती

अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Mon, 20 Apr 2026 10:42 AM IST
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सार

प्रदेश में उद्यान विभाग की 92 नर्सरी हैं। इसमें कई का पूरी तरह उपयोग नहीं हो पा रहा है। ऐसे में विभाग ने इन्हें पुनर्जीवित करने की योजना बनाई है, जिससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता की पौध उपलब्ध कराई जा सके।

Uttarakhand Preparations Underway to Revitalize State Nurseries Cultivation of European Vegetables Planned
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

राज्य की मुरझाई नर्सरियों को पुनर्जीवित करने की तैयारी है। इसके लिए उद्यान विभाग ने योजना बनाने के साथ नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए हैं। इन नर्सरियों में स्थानीय मांग के अनुसार यूरोपियन सब्जी के बीज व पौध उत्पादन इकाइयां भी स्थापित की जाएंगी।

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प्रदेश में उद्यान विभाग की 92 नर्सरी हैं। इसमें कई का पूरी तरह उपयोग नहीं हो पा रहा है। ऐसे में विभाग ने इन्हें पुनर्जीवित करने की योजना बनाई है, जिससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता की पौध उपलब्ध कराई जा सके। प्रत्येक नर्सरी के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं, जो पुनर्जीवन की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेंगे। नोडल अधिकारी स्थानीय फसल उत्पादन चक्र और विभाग की मिशन मोड योजनाओं को ध्यान में रखते हुए वार्षिक मांग का आकलन करेंगे।
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पौध उत्पादन के लिए बनाए जाएंगे कार्यक्रम
नोडल अधिकारियों को दो वर्ष की छोटी, मध्यम और दीर्घ अवधि की पुनर्जीवन के लिए कार्ययोजना को तैयार करना होगा। बीज, क्लोनल रूट स्टॉक्स कर व्यवस्था से लेकर फल पौध के उत्पादन के लिए कार्यक्रम तैयार करेंगे। स्थानीय बाजार की मांग के अनुसार यूरोपीय सब्जियों के बीज और पौध उत्पादन इकाइयां स्थापित कर ग्रामीणों को पौध उपलब्ध कराने और उनकी आजीविका सुधारने का प्रस्ताव भी तैयार किया जाएगा। साथ ही नर्सरियों में मौन पालन यूनिट की स्थापना करने की भी तैयारी है। इसके अलावा वर्मी कम्पोस्ट यूनिट का भी प्रस्ताव बनाया जाएगा।

संपत्ति की मैपिंग कर हटाया जाएगा अतिक्रमण
नोडल अधिकारियों को नर्सरी की संपत्ति की मैपिंग करनी होगी। कहीं अतिक्रमण मिलता है तो उसका ब्यौरा तैयार कर जिला प्रशासन के सहयोग से हटाने की कार्रवाई करनी होगी। पुनर्जीवन काम के तहत पूरी नर्सरी में घेरबाड़ की जाएगी। जो भूमि उपयोग में नहीं आ रही है उसका तीन महीने में खेती योग्य बनाने का प्लान बनाना होगा। कर्मचारियों के क्षमता विकास के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन भी कराया जाएगा। नर्सरी की ड्रोन से वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी। इस संबंध सचिव एसएन पांडेय ने बताया कि नर्सरियों को पुनर्जीवित करने से किसानों को लाभ हो सकेगा।

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